एजुकेशन रिपोर्ट 2026: लाखों की फीस और चंद हजार की नौकरी, क्या अब बोझ बन रही है डिग्री?
Kaushiki | Apr 24, 2026, 13:20 IST
education report 2026
भारत में B.Tech, MBA और CA जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज का औसत सैलरी पैकेज घट रहा है। अब डिग्री से ज्यादा स्किल और AI की मांग बढ़ रही है। जानें पूरी रिपोर्ट।
एजुकेशन रिपोर्ट 2026: इंडिया में आज एजुकेशन का मतलब सिर्फ डिग्री हासिल करना नहीं रह गया है। फाइनेंस ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, B.Tech, MBA और CA जैसे कोर्सेज का Return on Investment (ROI) तेजी से गिर रहा है।
इंजीनियरिंग में एवरेज 16.8 लाख रुपए खर्च करने के बाद शुरुआती सैलरी महज 4.74 रुपए लाख मिल रही है। इसी तरह, MBA और CA के क्षेत्र में बढ़ती भीड़ ने शुरुआती पैकेजेस को काफी कम कर दिया है।
अब मार्केट में सिर्फ सर्टिफिकेट की नहीं, बल्कि स्पेशल स्किल्स और AI जैसी नई तकनीक की डिमांड है। छात्रों और पेरेंट्स को अब केवल कॉलेज के ब्रांड के पीछे भागने के बजाय प्रैक्टिकल स्किल्स और एवरेज सैलरी पर फोकस करना चाहिए, ताकि शिक्षा बोझ न बने।
B.Tech करना आज भी लाखों युवाओं का पहला सपना होता है। लेकिन प्राइवेट कॉलेजों की फीस अब आसमान छू रही है। एक छात्र एवरेज 16.8 लाख रुपए फीस में खर्च करता है। पढ़ाई के बाद शुरुआती सैलरी मात्र 4.74 लाख रुपए मिलती है।
इस निवेश की भरपाई करने में ही 20 साल लगेंगे। रिपोर्ट कहती है कि 83% इंजीनियर डिग्री लेते समय बेरोजगार हैं। सरकारी और निजी कॉलेजों की फीस में जमीन-आसमान का अंतर है। ये अंतर करीब 10.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है।
पिछले तीन सालों में MBA के करीब 400 कॉलेज खुले हैं। ऑनलाइन कोर्सेज की बाढ़ ने डिग्री की वैल्यू कम कर दी। ज्यादा सप्लाई होने की वजह से बार्गेनिंग पावर घट गई है। 2024 में टॉप बी-स्कूलों के पैकेज में 15% गिरावट आई।
आईआईएम इंदौर और कोझिकोड जैसे संस्थानों में भी पैकेज गिरे हैं। एक्सएलआरआई जमशेदपुर में भी करीब 9% की कमी देखी गई है। अब ब्रांड के नाम पर बड़ी नौकरी मिलना मुश्किल है। कंपनियां अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि ठोस परिणाम मांगती हैं।
चार्टर्ड अकाउंटेंसी यानी CA में भी अब मुकाबला बहुत कठिन है। रिपोर्ट कहती है कि 2019 में 6 लाख छात्र थे, जो अब 12 लाख हो गए। भीड़ बढ़ने से शुरुआती सैलरी 3 से 5 लाख के बीच सिमटा है।
इस कोर्स के लिए लगने वाली मेहनत बहुत ज्यादा है। अनुभव बढ़ने के बाद ही सैलरी में बड़ा उछाल आता है। 5 साल के अनुभव के बाद सैलरी 15 लाख तक पहुंचती है। लेकिन शुरुआती संघर्ष युवाओं की उम्मीदें तोड़ रहा है।
ट्रेडिशनल सेक्टर पिछड़ रहे हैं लेकिन AI में तेजी है। एआई और मशीन लर्निंग (machine learning) में सैलरी 40% तक ज्यादा है। ट्रेडिशनल आईटी में जहां पांच लाख मिलते हैं, वहां एआई में छह लाख।
वहीं, 10 साल के अनुभव पर एआई एक्सपर्ट 36 लाख कमा रहे हैं। ट्रेडिशनल सेक्टर के लोग 26 लाख पर ही रुके हैं। तकनीक के साथ खुद को बदलना अब बहुत जरूरी है। जो छात्र अपडेट नहीं होंगे, वे पीछे छूट जाएंगे।
शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि नजरिया बदलिए। अब सिर्फ कागज की डिग्री से काम नहीं चलेगा। बाजार को अब विशिष्ट कौशल या स्पेशल स्किल्स चाहिए।
पुराने सिलेबस आज की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे। ब्रांड के पीछे भागने के बजाय रिजल्ट्स पर ध्यान दें। वरना शिक्षा का ये निवेश एक बड़ा फाइनेंसियल बोझ बनेगा। डिग्री पाना आसान है, लेकिन अच्छी कमाई करना अब मुश्किल।
कॉलेज चुनते समय सिर्फ हाईएस्ट पैकेज को बिल्कुल न देखें। हमेशा उस कॉलेज के एवरेज सैलरी पर गौर करें। प्लेसमेंट के दावों की सच्चाई का पता जरूर लगाएं।
एजुकेशन लोन लेने से पहले ईमानदारी से हिसाब लगाएं। पूर्व छात्रों से बात करके असली फीडबैक लेना बेहतर है। ये समझें कि उस एरिया में नौकरी के मौके हैं या नहीं। ग्रेजुएशन के दौरान आप कौन से स्किल सीखेंगे ये पूछें।
Return on Investment (ROI) एक बहुत ही जरूरी फाइनेंशियल टूल है। ये हमें बताता है कि किसी चीज में पैसा लगाने पर हमें कितना फायदा हुआ। आसान भाषा में कहें तो, जितना पैसा लगाया, उसके मुकाबले कितनी कमाई हुई। एजुकेशन के मामले में अगर आप किसी डिग्री पर 15 लाख रुपए खर्च करते हैं।
आपकी शुरुआती सैलरी तीन लाख रुपए है, तो आपका ROI कम माना जाएगा। इसका मतलब है कि अपनी लागत (Cost) वसूलने में आपको बहुत समय लगेगा। वहीं, अगर कम खर्च में अच्छी नौकरी मिल जाए, तो ROI हाई होता है। निवेश करने से पहले ROI चेक करना बहुत स्मार्ट फैसला होता है।
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इंजीनियरिंग में एवरेज 16.8 लाख रुपए खर्च करने के बाद शुरुआती सैलरी महज 4.74 रुपए लाख मिल रही है। इसी तरह, MBA और CA के क्षेत्र में बढ़ती भीड़ ने शुरुआती पैकेजेस को काफी कम कर दिया है।
अब मार्केट में सिर्फ सर्टिफिकेट की नहीं, बल्कि स्पेशल स्किल्स और AI जैसी नई तकनीक की डिमांड है। छात्रों और पेरेंट्स को अब केवल कॉलेज के ब्रांड के पीछे भागने के बजाय प्रैक्टिकल स्किल्स और एवरेज सैलरी पर फोकस करना चाहिए, ताकि शिक्षा बोझ न बने।
इंजीनियरिंग: लाखों का खर्च और कम सैलरी
इस निवेश की भरपाई करने में ही 20 साल लगेंगे। रिपोर्ट कहती है कि 83% इंजीनियर डिग्री लेते समय बेरोजगार हैं। सरकारी और निजी कॉलेजों की फीस में जमीन-आसमान का अंतर है। ये अंतर करीब 10.5 लाख रुपए तक पहुंच गया है।
एमबीए: बढ़ते कॉलेज और गिरते प्लेसमेंट पैकेज
आईआईएम इंदौर और कोझिकोड जैसे संस्थानों में भी पैकेज गिरे हैं। एक्सएलआरआई जमशेदपुर में भी करीब 9% की कमी देखी गई है। अब ब्रांड के नाम पर बड़ी नौकरी मिलना मुश्किल है। कंपनियां अब सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि ठोस परिणाम मांगती हैं।
सीए: बढ़ती भीड़ और सैलरी की नई चुनौतियां
इस कोर्स के लिए लगने वाली मेहनत बहुत ज्यादा है। अनुभव बढ़ने के बाद ही सैलरी में बड़ा उछाल आता है। 5 साल के अनुभव के बाद सैलरी 15 लाख तक पहुंचती है। लेकिन शुरुआती संघर्ष युवाओं की उम्मीदें तोड़ रहा है।
AI और मशीन लर्निंग
वहीं, 10 साल के अनुभव पर एआई एक्सपर्ट 36 लाख कमा रहे हैं। ट्रेडिशनल सेक्टर के लोग 26 लाख पर ही रुके हैं। तकनीक के साथ खुद को बदलना अब बहुत जरूरी है। जो छात्र अपडेट नहीं होंगे, वे पीछे छूट जाएंगे।
अब सर्टिफिकेट नहीं, सिर्फ स्किल की कीमत
पुराने सिलेबस आज की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे। ब्रांड के पीछे भागने के बजाय रिजल्ट्स पर ध्यान दें। वरना शिक्षा का ये निवेश एक बड़ा फाइनेंसियल बोझ बनेगा। डिग्री पाना आसान है, लेकिन अच्छी कमाई करना अब मुश्किल।
छात्रों के लिए खास सुझाव
एजुकेशन लोन लेने से पहले ईमानदारी से हिसाब लगाएं। पूर्व छात्रों से बात करके असली फीडबैक लेना बेहतर है। ये समझें कि उस एरिया में नौकरी के मौके हैं या नहीं। ग्रेजुएशन के दौरान आप कौन से स्किल सीखेंगे ये पूछें।
ROI क्या है
आपकी शुरुआती सैलरी तीन लाख रुपए है, तो आपका ROI कम माना जाएगा। इसका मतलब है कि अपनी लागत (Cost) वसूलने में आपको बहुत समय लगेगा। वहीं, अगर कम खर्च में अच्छी नौकरी मिल जाए, तो ROI हाई होता है। निवेश करने से पहले ROI चेक करना बहुत स्मार्ट फैसला होता है।
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