MP Board Marksheet Controversy: 15 हजार रेगुलर छात्रों को बना दिया प्राइवेट स्टूडेंट, जानें मामला

Manya Jain | Apr 22, 2026, 15:01 IST
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MP Board Marksheet Controversy
MP Board Marksheet Controversy

MP बोर्ड की बड़ी लापरवाही सामने आई है! हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी 15 हजार रेगुलर छात्रों को 'स्वाध्यायी' (प्राइवेट) घोषित कर दिया गया है। अब 250 स्कूलों के बच्चों के भविष्य पर संकट आ गया है।

मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मंडल (MPBSE) ने हाल ही में 10वीं और 12वीं के रिजल्ट घोषित किए हैं। इसके बाद एक बड़ा विवाद सामने आ गया है। बोर्ड की एक बड़ी गलती की वजह से करीब 15 हजार विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।

ये छात्र पूरे साल स्कूल जाकर 'नियमित' (Regular) छात्र के तौर पर पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन जब उन्हें अंकसूची मिली (mp board marksheet), तो उसमें उन्हें 'स्वाध्यायी' या 'प्राइवेट' (Private) छात्र दिखाया गया है।

इस गंभीर गलती के कारण छात्र और उनके पैरेंट्स मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। ये समस्या खासकर उन 250 निजी स्कूलों से जुड़ी है, जिनकी मान्यता को लेकर विवाद चल रहा था। अब सवाल ये है कि आखिर पूरा मामला क्या है, आइए समझते हैं।

क्या है पूरा मामला?

मध्यप्रदेश के 250 निजी स्कूलों की मान्यता पिछले साल रद्द हुई थी। इसके बाद स्कूल संचालक अपनी शिकायत लेकर हाईकोर्ट पहुंचे थे। छात्रों की पढ़ाई खराब न हो इसलिए कोर्ट ने राहत दी।

कोर्ट ने स्कूलों को अस्थायी तौर पर मान्यता देने को कहा था। लोक शिक्षण संचालनालय ने कोर्ट के आदेश का पालन भी किया। नियम के मुताबिक छात्रों को रेगुलर स्टूडेंट माना जाना चाहिए था।

उनकी मार्कशीट पर भी रेगुलर छात्र ही लिखा जाना जरूरी था। लेकिन एमपी बोर्ड (mp board result) ने कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर दिया। बोर्ड ने करीब 15 हजार छात्रों को प्राइवेट घोषित कर दिया है।

राजधानी भोपाल सहित प्रदेशभर के स्कूल प्रभावित

इस गड़बड़ी का असर केवल एक जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के निजी स्कूल इससे प्रभावित हुए हैं। अकेले राजधानी भोपाल के लगभग 10 बड़े स्कूलों के छात्र इस समस्या से जूझ रहे हैं।

प्रभावित प्रमुख स्कूल (Affected Schools)

  • सेवन हिल्स पब्लिक स्कूल
  • रेडियेंट स्कूल, पिपलिया पेंदे खां
  • ज्ञान चेतना हाईस्कूल
  • अंकुर हायर सेकेंडरी स्कूल
इन स्कूलों के संचालकों का कहना है कि उन्होंने समय पर नियमित छात्रों की फीस और फॉर्म जमा किए थे, फिर भी बोर्ड ने ऐसी तकनीकी या प्रशासनिक गलती कैसे की, यह समझ से परे है।

छात्रों के भविष्य पर मंडराता खतरा

  • कॉलेज एडमिशन: कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी और प्रोफेशनल कोर्स में नियमित छात्रों को प्राथमिकता दी जाती है।
  • स्कॉलरशिप योजनाएं: राज्य और केंद्र सरकार की कई छात्रवृत्ति योजनाएं केवल नियमित (Regular) श्रेणी के छात्रों के लिए होती हैं। 'प्राइवेट' टैग लगने से छात्र इन लाभों से वंचित रह सकते हैं।
  • सरकारी नौकरी: भविष्य में सरकारी डाक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन (Verification) के दौरान इस श्रेणी भिन्नता के कारण छात्रों को स्पष्टीकरण देना पड़ सकता है।

माशिमं सचिव ने दिया आश्वासन

माशिमं सचिव बुद्धेश कुमार वैद्य ने कहा कि मामला हमारे संज्ञान में आया है और कुछ स्कूलों से औपचारिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हम इस टेक्निकल एरर की जांच कर रहे हैं। मंडल यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी विद्यार्थी के साथ अन्याय न हो और नियमानुसार मार्कशीट में सुधार किया जाएगा।

रिजल्ट के आंकड़े

हाल ही में जारी परिणामों में प्रदेश का प्रदर्शन मिला-जुला रहा है, लेकिन इस विवाद ने खुशी के माहौल को चिंता में बदल दिया है।

  • 12वीं का परिणाम: 76.01 प्रतिशत
  • 10वीं का परिणाम: 73.42 प्रतिशत
  • त्रुटिपूर्ण अंकसूचियां: लगभग 15 हजार

क्या करें छात्र और पैरेंट्स

  • स्कूल प्रबंधन से संपर्क: सबसे पहले अपने स्कूल प्राचार्य को लिखित में आवेदन दें।
  • मंडल को आवेदन: स्कूल के माध्यम से या स्वयं माशिमं के क्षेत्रीय कार्यालय में सुधार हेतु आवेदन करें।
  • डाक्यूमेंट तैयार रखें: अपने प्रवेश पत्र (Admit Card) और स्कूल उपस्थिति रिकॉर्ड की प्रतियां साथ रखें जिनमें आपको नियमित छात्र दर्शाया गया हो।
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