अब AI और स्मार्ट फॉरेंसिक से पकड़े जाएंगे अपराधी? NFSU में तैयार हो रही हाईटेक तकनीक

Anjali Dwivedi | May 21, 2026, 16:07 IST
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NFSU में अपराधियों को पकड़ने के लिए स्मार्ट फॉरेंसिक और एआई आधारित तकनीकों पर काम हो रहा है। डिजिटल एविडेंस, सोशल मीडिया डेटा, डिजिटल ट्रांजैक्शन और आधुनिक डीएनए प्रोफाइलिंग की मदद से अब मिनटों में जटिल केस सुलझाए जा सकेंगे।

समझें क्या है पूरा मामला

  • NFSU में स्मार्ट फॉरेंसिक व AI तकनीक से मिनटों में अहम सुराग मिलेंगे।
  • साइबर फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी जैसे आधुनिक अपराधों पर अब शिकंजा कसेगा।
  • घटनास्थल के जैविक नमूनों और डीएनए प्रोफाइलिंग से मजबूत सबूत होंगे।
  • डिजिटल ट्रांजैक्शन और सोशल मीडिया डेटा से पकड़े हाईटेक शातिर जाएंगे।
  • वन्यजीव तस्करी रोकने और पुराने केस सुलझाने में फॉरेंसिक साइंस वरदान साबित होगा।
बदलते समय के साथ अपराधियों के तौर-तरीके भी तेजी से बदल रहे हैं। इसी चुनौती से निपटने के लिए अब जांच एजेंसियां पारंपरिक पूछताछ के पुराने ढर्रे से आगे निकल चुकी हैं। अब अपराधियों को बेनकाब करने के लिए DNA और AI आधारित अत्याधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का सहारा लिया जा रहा है।

राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) कैंपस में इस समय स्मार्ट फॉरेंसिक तकनीक पर तेजी से काम चल रहा है। इससे डिजिटल एविडेंस के जरिए महज मिनटों में अपराधियों के खिलाफ अहम सुराग हासिल किए जा सकेंगे।

इन मॉडर्न क्राइम्स पर कसेगा शिकंजा

जांच एजेंसियों के मुताबिक साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन ब्लैकमेल और फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट में डिजिटल एविडेंस बहुत जरूरी है। NFSU कैंपस में साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल एविडेंस एनालिसिस और डीएनए प्रोफाइलिंग पर रिसर्च हो रही है।

एक्सपर्ट्स स्टडी कर रहे हैं कि अपराध की कड़ियां जोड़ने में डिजिटल ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज कैसे अहम सबूत बन सकते हैं।

DNA तकनीक से मजबूत होंगे सबूत

फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स का कहना है कि अब अपराध जांच सिर्फ फिंगरप्रिंट तक सीमित नहीं रह गई है। घटनास्थल से मिलने वाले बाल, खून, त्वचा या अन्य आर्गेनिक सैंपल से आरोपी की सटीक पहचान करना अब आसान हो गया है।

इस तकनीक की सबसे बड़ी ताकत यह है कि पुराने अनसुलझे मामलों को दोबारा खोलकर जांचा जा सकता है। अपराधियों तक आसानी से पहुंचने में यह तरीका बहुत मददगार साबित हो रहा है।

वन्यजीव अपराधों में फॉरेंसिक जांच होगी

यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर प्रोफेसर डॉ. सतीस कुमार ने बताया कि वन्यजीव अपराधों पर लगाम लगाने में भी फॉरेंसिक साइंस एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। शिकार या अवैध तस्करी के मामलों में बरामद की जाने वाली जानवरों की खाल, हड्डियों या अन्य जैविक नमूनों की गहन डीएनए जांच की जाती है।

इस जांच से न सिर्फ यह सटीक पता लगाया जा रहा है कि संबंधित अवशेष किस प्रजाति का है, बल्कि उसके मूल स्रोत (ऑरिजिन) की जानकारी भी मिल रही है। इससे वन्यजीव तस्करी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ध्वस्त करने में बड़ी मदद मिल रही है।

छात्रों को दी जा रही लाइव केस स्टडी की ट्रेनिंग

भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए NFSU में पढ़ रहे छात्रों को आधुनिक अपराधों की जांच के लिए तैयार किया जा रहा है। डिजिटल एविडेंस, एआई आधारित डेटा एनालिसिस और डीएनए प्रोफाइलिंग को ही अपराध जांच का भविष्य माना जा रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए छात्रों को लाइव केस स्टडी और सिमुलेशन आधारित व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि वे फील्ड में उतरते ही हाई-टेक अपराधियों से दो कदम आगे रह सकें।

FAQ

  1. NFSU में अपराधियों को पकड़ने के लिए किन नई तकनीकों पर काम हो रहा है?
    राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) में स्मार्ट फॉरेंसिक तकनीकों के तहत AI, डिजिटल एविडेंस एनालिसिस, साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग और फॉरेंसिक जीनोमिक्स पर काम किया जा रहा है। इसके जरिए अपराधी के डिजिटल ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया एक्टिविटी और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के डेटा को खंगालकर मिनटों में सुराग जुटाए जाते हैं।
  2. अपराध जांच में DNA प्रोफाइलिंग तकनीक फिंगरप्रिंट से कितनी आगे और मददगार है?
    पारंपरिक फिंगरप्रिंट जांच की तुलना में डीएनए तकनीक बहुत अधिक एडवांस है। इसके तहत घटनास्थल पर मिलने वाले बाल, खून की बूंद, त्वचा या किसी भी जैविक नमूने से आरोपी की सटीक पहचान स्थापित की जा सकती है। इस तकनीक की मदद से सालों पुराने बंद पड़े जटिल मामलों को भी दोबारा खोलकर सबूतों को मजबूत किया जा रहा है।
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