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News in short
- केंद्र सरकार ने UPSC 2026 के लिए नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी लागू कर दी है।
- अब 5 जोन के बजाय 4 ग्रुप्स में राज्यों का नया बंटवारा होगा।
- इनसाइडर सीट खाली रहने पर उसे तुरंत आउटसाइडर में बदला जाएगा।
- कैडर अलॉटमेंट अब 25- कैडर साइकिल सिस्टम से होगा।
- EWS और दिव्यांगों को अपनी कैटेगरी में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
News in detail
यूपीएससी की तैयारी सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं होती है। इसका रियल एडवेंचर तब शुरू होता है जब बात कैडर अलॉटमेंट की आती है। आसान शब्दों में कहें तो कैडर एक अधिकारी का कार्यक्षेत्र होता है। यानी वह किस राज्य में काम करेगा, लेकिन अब इस सपने के पीछे का गणित बदल गया है।
केंद्र सरकार ने UPSC 2026 के लिए नई कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी का ऐलान किया है। पॉलिसी के मुताबिक, अब तक उम्मीदवार पांच जोन के आधार पर अपनी पसंद चुनते थे। लेकिन अब पुराना जोन सिस्टम खत्म कर राज्यों को चार नए ग्रुप्स में बांटा गया है।
ये नई पॉलिसी न केवल पोस्टिंग के तरीके को बदलेगी, बल्कि होम स्टेट पाने की होड़ को भी नया मोड़ देगी। अगर आप भी सिविल सर्वेंट बनने का सपना देख रहे हैं, तो रैंक के साथ-साथ इन नए ग्रुप्स और साइकिल सिस्टम को समझना बहुत जरूरी है। आइए इसे डिटेल से समझें...
Sootr Knowledge
यूपीएससी में कैडर क्या होता है
यूपीएससी में कैडर (Cadre) का मतलब वो राज्य या राज्यों का समूह होता है, जहां एक ऑफिसर (IAS/IPS/IFS) को अपनी पूरी सर्विस देनी होती है। जब आप यूपीएससी परीक्षा पास करते हैं, तो भारत सरकार आपको एक स्पेसिफिक राज्य अलॉट करती है।
जैसे यूपी, एमपी, बिहार या कोई और। इसे होम स्टेट या आउटसाइडर के बेस पर दिया जाता है। एक बार कैडर अलॉट होने के बाद, आप उसी राज्य के प्रशासन का हिस्सा बन जाते हैं। हालांकि आप डेप्युटेशन पर केंद्र में भी काम कर सकते हैं। लेकिन आपका ओरिजिनल कैडर वही राज्य रहता है।
Important Facts
यूपीएससी 2026 कैडर पॉलिसी में बड़े बदलाव
राज्यों की नई ग्रुपिंग
कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी 2026 के मुताबिक, अब कैडर अलॉटमेंट के लिए राज्यों को 5 जोन की जगह 4 ग्रुप में बांटा गया है। इन राज्यों को अल्फाबेटिकल ऑर्डर में रखा गया है। जैसे-
- ग्रुप-I: इसमें AGMUT, आंध्र प्रदेश, असम-मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़ शामिल हैं।
- ग्रुप-II: यहां गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश हैं।
- ग्रुप-III: इसमें महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु हैं।
- ग्रुप-IV: तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल को यहां रखा गया है।
इनसाइडर-आउटसाइडर नियम
नया सिस्टम आने के बाद भी इनसाइडर और आउटसाइडर का पुराना नियम बना रहेगा। इसका मतलब है कि अधिकारी को अपने राज्य और दूसरे राज्य में काम का मौका मिलेगा। सबसे पहले होम कैडर की खाली सीटें भरी जाएंगी। इसके बाद ही बाहरी राज्यों के लिए अलॉटमेंट शुरू होगा।
कैटेगरी के हिसाब से मेरिट लिस्ट
कैडर अलॉटमेंट पॉलिसी 2026 के मुताबिक, अब उम्मीदवारों की कैटेगरी के बेस पर अलग-अलग मेरिट लिस्ट बनाई जाएगी। इसमें जनरल, ओबीसी, एससी और एसटी के लिए अलग सूचियां होंगी। इसी लिस्ट के आधार पर पारदर्शी तरीके से कैडर का बंटवारा किया जाएगा।
25 कैडर या पैरामीटर का जादुई साइकिल सिस्टम
कैडर पॉलिसी 2026 के मुताबिक, कैडर अलॉटमेंट अब 25 कैडर के एक खास साइकिल में होगा। हर साइकिल में सबसे ऊंची रैंक वाले को प्राथमिकता मिलेगी। बाकी उम्मीदवारों को अगले साइकिल में जगह दी जाएगी। SC/ST/OBC उम्मीदवारों का अलॉटमेंट भी उसी साइकिल सिस्टम से होगा। दिव्यांग उम्मीदवारों को अपनी कैटेगरी में प्राथमिकता दी जाएगी। बाकी उम्मीदवारों को अगले साइकिल में जगह दी जाएगी। ये नियम सभी कैटेगरी के उम्मीदवारों पर बराबरी से लागू होगा।
खाली सीटों का क्या होगा
अगर किसी होम कैडर (इनसाइडर) की सीट खाली रह जाती है, तो वो बर्बाद नहीं होंगी। उस सीट को तुरंत आउटसाइडर सीट में बदल दिया जाएगा। वह सीट अगले साल के लिए बचाकर नहीं रखी जाएगी।
आउटसाइडर अलॉटमेंट का तरीका
इनसाइडर सीटें भरने के बाद ही आउटसाइडर सीटों का नंबर आएगा। इसमें सबसे पहले दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी पसंद का मौका दिया जाएगा। इसके बाद बाकी अधिकारियों को पूरी तरह मेरिट के आधार पर राज्य अलॉट होंगे।
एक्सचेंज और करेक्शन नियम
अगर किसी उम्मीदवार को गलती से आउटसाइडर होते हुए होम कैडर मिल जाता है, तो उसे सुधारा जाएगा। नियम के मुताबिक उसे अगले उम्मीदवार के साथ एक्सचेंज कर दिया जाएगा। इससे सिस्टम में किसी भी गलती की गुंजाइश नहीं रहेगी।
डेडलाइन और डेटा कलेक्शन
हर साल 1 जनवरी को कैडर गैप के आधार पर खाली पदों का असेसमेंट होगा। राज्य सरकारों को अपनी मांग 31 जनवरी तक केंद्र को भेजनी होगी। इसी डेटा के आधार पर सालभर की अपॉइंटमेंट और ट्रांसफर तय किए जाएंगे।
EWS और दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए नियम
इस पॉलिसी 2026 के मुताबिक, EWS (Economically Weaker Sections) के पद अनरिजर्व्ड कोटे में ही गिने जाएंगे। दिव्यांग उम्मीदवारों को उनकी अपनी कैटेगरी में स्पेशल प्रॉयोरिटी मिलेगी। जरूरत पड़ने पर सरकार उनके लिए अतिरिक्त पद भी बना सकती है।
निष्कर्ष
इस नई कैडर पॉलिसी 2026 के लागू होने से अब यूपीएससी (यूपीएससी बोर्ड) उम्मीदवारों को केवल अच्छी रैंक पर ही नहीं, बल्कि स्मार्ट चॉइस और ग्रुपिंग के गणित पर भी ध्यान देना होगा। इस 4-ग्रुप और साइकिल सिस्टम से देश के एडमिनिस्ट्रेटिव स्ट्रक्च में रीजनल बैलेंस बढ़ेगा।
इससे अधिकारियों को अपनी पसंद के साथ-साथ पूरे भारत की डाइवर्सिटी में सेवा करने का मौका मिलेगा। कुल मिलाकर, ये बदलाव होम-स्टेट की होड़ को कम कर One Nation, One Administration के विजन को और अधिक ट्रांसपेरेंट और डेटा-ड्रिवेन बनाएगा।
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