Unemployment Rate India 2025 रिपोर्ट जारी, माइनॉरिटी कम्यूनिटी में बेरोजगारी दर बढ़ा, ये हैं कारण
Manya Jain | Apr 13, 2026, 17:31 IST
india unemployment rate 2025 report
बेरोजगारी के आंकड़े बताते हैं कि कौशल विकास में अभी भी बहुत असमानता है। मुस्लिम समुदाय की आर्थिक मजबूती के लिए सरकार को विशेष ट्रेनिंग और रोजगार योजनाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।
भारत में बेरोजगारी के नए आंकड़े सामने आए हैं। पीएलएफएस (PLFS) की रिपोर्ट ने बेरोजगारी एक नई तस्वीर पेश की है। साल 2025 में अनएम्प्लॉयमेंट रेट घटकर 3.1% रह गई है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा देखने में काफी अच्छा है। लेकिन गहराई से देखने पर बड़ा अंतर नजर आता है।
अलग-अलग धर्मों और समुदायों में रोजगार की स्थिति भिन्न है। श्रम बल में भागीदारी को लेकर भी बड़ा गैप है। हिंदू समुदाय में बेरोजगारी के आंकड़े धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। वहीं, सिख और मुस्लिम समाज में रोजगार को लेकर चिंता है।
इन समुदायों के युवाओं के लिए स्थितियां अभी चुनौतीपूर्ण हैं। इसके साथ अल्पसंख्यक समुदायों में भी अनएम्प्लॉयमेंट रेट काफी हाई है।
PLFS के आंकड़े बताते हैं कि 2022 से 2025 के बीच विभिन्न समुदायों ने एम्प्लॉयमेंट के अलग-अलग रुझान देखे हैं।
हिंदू समुदाय में अनएम्प्लॉयमेंट रेट 2022 में 3.6% थी, जो 2025 में घटकर 3.0% रह गई है। यह राष्ट्रीय औसत के काफी करीब है, जो गिरावट है।
अनएम्प्लॉयमेंट रेट को समझने के लिए 'लेबर फाॅर्स में भागीदारी' को समझना जरुरी है। इसका मतलब है कि उस समुदाय के कितने प्रतिशत लोग सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं।
मुस्लिम समुदाय की भागीदारी दर (Participation Rate) अन्य समुदायों की तुलना में सबसे कम है। इसका मतलब यह है कि इस समुदाय के बहुत कम लोग फॉर्मल लेबर मार्केट का हिस्सा बन पा रहे हैं।
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा है जो बताता है कि लोग किस तरह का काम कर रहे हैं। यहां मुस्लिम समुदाय और अन्य समुदायों के बीच एक स्पष्ट अंतर नजर आता है।
स्व-रोजगार (
मुस्लिम समुदाय में स्व-रोजगार की दर सबसे अधिक यानी 62.3% है। इसका मुख्य कारण नियमित सैलरी वाली नौकरियों (Regular Wage Jobs) तक उनकी सीमित पहुंच हो सकता है। नियमित नौकरियों में इस समुदाय की हिस्सेदारी केवल 18% है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
इसके विपरीत, ईसाई और सिख समुदायों में नियमित सैलरी वाली नौकरियों की हिस्सेदारी क्रमशः 27.6% और 26.7% है, जो उन्हें अधिक वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है।
बेरोजगारी के ये आंकड़े बताते हैं कि हुनर सीखना बहुत जरूरी है। पढ़ाई और ट्रेनिंग के मामले में अभी बहुत फर्क दिखता है। मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादातर छोटे और खुद के काम करते हैं। इस वजह से उनकी कमाई और आर्थिक स्थिति स्थिर नहीं रहती। सरकार को उन इलाकों और समुदायों पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। जहां काम करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है।
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अलग-अलग धर्मों और समुदायों में रोजगार की स्थिति भिन्न है। श्रम बल में भागीदारी को लेकर भी बड़ा गैप है। हिंदू समुदाय में बेरोजगारी के आंकड़े धीरे-धीरे कम हो रहे हैं। वहीं, सिख और मुस्लिम समाज में रोजगार को लेकर चिंता है।
इन समुदायों के युवाओं के लिए स्थितियां अभी चुनौतीपूर्ण हैं। इसके साथ अल्पसंख्यक समुदायों में भी अनएम्प्लॉयमेंट रेट काफी हाई है।
MANYA JAIN (41)
धार्मिक समुदायों के बीच बेरोजगारी का हाल
1. हिंदू समुदाय: स्थिरता और सुधार
2. अल्पसंख्यक समुदायों की स्थिति
- सिख समुदाय: इस समुदाय में अनएम्प्लॉयमेंट रेट लगातार उच्च बनी हुई है। 2025 में यह 5.1% दर्ज की गई।
- मुस्लिम समुदाय: मुस्लिम युवाओं में अनएम्प्लॉयमेंट रेट में 2022 (2.9%) की तुलना में 2025 (3.3%) में बढ़ोतरी देखी गई है।
- ईसाई समुदाय: यहां आंकड़ों में काफी उतार-चढ़ाव रहा, हालांकि 2025 में यह सुधरकर 3.6% पर आ गई है।
क्या है लेबर फाॅर्स रेट
labour force rate
| समुदाय | 2022 | 2025 |
| हिंदू | 43.0% | 46.0% |
| मुस्लिम | 31.8% | 37.2% |
| ईसाई | 45.5% | 48.2% |
| सिख | 42.6% | 45.3% |
रोजगार का तरीका: सेल्फ-एम्प्लॉयमेंट बनाम नियमित नौकरी
स्व-रोजगार (self employment ) का दबदबा
नियमित सैलरी वाली नौकरियां
भविष्य की चुनौतियां और सरकारी प्रयास
बेरोजगारी के असली कारण
- लिटरेसी का असर: ईसाई और हिंदू समुदाय में नियमित नौकरी करने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है, और इसका कारण ये है कि इन दोनों समुदायों ने 'वोकेशनल एजुकेशन' (हुनर आधारित शिक्षा) पर ज्यादा ध्यान दिया है।
- शहरी बनाम ग्रामीण: रिपोर्ट में ये दिखाया गया है कि शहरों में बेरोजगारी दर 4.5% है, जबकि गांवों में ये दर 2.4% है। यानी शहरों में रोजगार पाने के मौके कम हैं।
- अस्थायी श्रमिक: सिख समुदाय में अस्थायी (यानी दिन-प्रतिदिन काम करने वाले) श्रमिकों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो शायद किसानों के मौसम के कामों के कारण है।
- महिला कार्यबल: 2025 में महिलाओं की काम में भागीदारी में 3% की बढ़ोतरी हुई है, और इसने देशभर में महिला रोजगार के आंकड़े बेहतर बनाने में मदद की है।
- स्टार्टअप कल्चर: भारत के छोटे शहरों में बढ़ते हुए स्टार्टअप्स की वजह से स्व-रोजगार के आंकड़े बढ़े हैं, यानी लोग अब खुद का काम शुरू करने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं।
FAQ
- 2025 में भारत की कुल अनएम्प्लॉयमेंट रेट (India's Total
Unemployment Rate ) क्या है?
पीएलएफएस (PLFS) सर्वे के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत की कुल अनएम्प्लॉयमेंट रेट 3.1% है। - किस समुदाय में अनएम्प्लॉयमेंट रेट सबसे अधिक दर्ज की गई है?
आंकड़ों के अनुसार, सिख समुदाय में अनएम्प्लॉयमेंट रेट सबसे अधिक (5.1%) रही है, जबकि हिंदू समुदाय में यह सबसे कम (3.0%) है। - मुस्लिम समुदाय में स्व-रोजगार (Self-Employment) की दर अधिक होने का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि इस समुदाय के लोग अपनी छोटी दुकानें, व्यापार या असंगठित क्षेत्र में अधिक सक्रिय हैं, जबकि संगठित क्षेत्र की सुरक्षित और नियमित सैलरी वाली नौकरियों में इनकी हिस्सेदारी तुलनात्मक रूप से कम (18%) है।
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