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NEWS IN SHORT
- छत्तीसगढ़ में 48 डॉक्टरों को दिया नियमविरुद्ध प्रमोशन
- ये सभी डॉक्टर सिम्स, बिलासपुर में दे रहे थे सेवाएं
- इन डॉक्टरों का चयन पीएससी की बजाय सिम्स ने किया था
- प्रमोशन के बाद ये डॉक्टर पीएससी चयनितों के समकक्ष आ गए
- इन्हें वर्तमान में प्रदेश के बड़े अस्पतालों में अहम पदों पर लगा दिया
NEWS IN DETAIL
रायपुर. छत्तीसगढ़ में 48 चिकित्सा शिक्षकों को नियमविरुद्ध प्रमोशन देने का मामला सामने आया है।
हैरानी की बात यह है कि इन डॉक्टरों की नियुक्ति न तो चिकित्सा शिक्षा विभाग ने की और न ही इनका संविलियन किया।
इसके बावजूद चिकित्सा शिक्षा अधिकारियों ने इन्हें गलत तरीके से वरिष्ठता सूची में शामिल करते हुए प्रमोशन दे दिया।
कई तो डॉक्टर प्रमोशन पाते हुए डायरेक्टर प्रोफेसर तक पहुंच गए। साथ ही कई डॉक्टर मेडिकल कॉलेजों के प्रभारी डीन की भी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
नियमानुसार ये सहायक प्राफेसर बनने के हकदार भी नहीं हैं।
ऐसे समझें पूरा मामला
मामला यह है कि सिम्स यानी छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान बिलासपुर बनने के बाद राज्य शासन ने इसका संचालन करने के लिए जीजीयू यानी गुरु घासीदास विश्वविद्यालय से टाईअप किया था।
विश्वविद्यालय कार्यपरिषद् ने 2002-2007 तक स्वशासी मद से 48 चिकित्मा शिक्षकों की नियुक्ति की। इस बीच, राज्य सरकार ने जून 2008 में सिम्स बिलासपुर के संचालन का जिम्मा अपने पास ले लिया।
शासन ने अन्य स्वास्थ्य कर्मियों का संविलियन कर दिया, लेकिन विश्वविद्यालय कार्यपरिषद् द्वारा नियुक्त चिकित्सा शिक्षकों कोे तकनीकी कारणों से समायोजित नहीं किया। हालांकि, डॉक्टरों की सेवाएं जारी रहीं।
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शासन को अंधेरे में रखकर प्रमोशन
सूत्रों का कहना है कि इन 48 डॉक्टरों की नियुक्ति स्वशासी समिति के माध्यम से हुई थी।
इसलिए इनकी सेवाएं तो समाप्त नहीं की जा सकती थीं, लेकिन इन्हें सिम्स के ही कर्मचारी के रुप में काम करना था।
इनके लिए अलग से प्रमोशन लिस्ट भी बनाई जानी थी। पद सीमित होने के कारण इन्हें जल्द प्रमोशन नहीं मिल सकता था।
ऐसे में चिकित्सा शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत नेे शासन को अंधेरे में रखते हुए इन डॉक्टरों को गलत तरीके से पीएससी सूची में शामिल कर दिया।
इसका लाभ यह हुआ कि इन डॉक्टरों को नियमित चिकित्सा शिक्षकों के समान वेतन भत्ते सहित अन्य सुविधाएं भी दिया जाने लगा।
प्रमोशन देकर दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी भेजा गया। अब तो इन्हें डायरेक्टर प्रोफेसर तक बना दिया गया है। ऐसे मे पीएससी से सिलेक्ट हुए डॉक्टर सीनियरिटी में इनके नीचे हो गए।
इन्हें सौंप दी अहम पदों पर जिम्मेदारी
डॉ रमणेश मूर्ति -प्रभारी डीन सिम्स, बिलासपुर
डॉ लखन सिंह - प्रभारी एमएस सिम्स, बिलासपुर
डॉ रमेश चंद्र आर्या -प्रभारी एमएस अंबिकापुर
डा रंजना आर्या - प्रभारी डीन, मनेंद्रगढ मेडिकल कॉलेज
डॉ मनोज मिंज- प्रभाारी डीन, कुनकुरी मेडिकल कॉलेज और एमएस रायगढ
डॉ भानू प्रताप सिंह- एमएस, सुपरस्पेशियली हॉस्पिटल बिलासपुर
डॉ अजय कोसाम - प्रभारी डीन, कर्वधा मेडिकल कॉलेज
डॉ सुरेश कुमार ठाकुर- एमएस, कर्वधा मेडिकल कॉलेज
डॉ ए आर बेन - एसएस जांजगीर-चांपा
डॉ राकेश नहरेल- प्रभारी डीन, जांजगीर चांपा मेडिकल कॉलेज
पीएससी फाइट तक नहीं किया
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सिम्स बिलासपुर को 2008 में टेकओवर कर लिया था लेकिन नियमानुसार डॉक्टरों की नियुक्ति पीएससी के माध्यम से होनी थी इसलिए इनका संविलियन नहीं किया गया।
इस दौरान कुछ डॉक्टरों ने पीएससी फाइट किया और चयनित होकर आ गए। उधर, 48 डॉक्टर सेटिंग की राह देखते रहे और 2015 में धीरे से इन्हें पीएससी फाइट किए गए डॉक्टरों के प्रमोशन लिस्ट में डाल दिया गया।
ऐसे में पीएससी से चयनित नियमित डॉक्टरों की वरिष्ठता प्रभावित हो गई। उधर, 48 डॉक्टर जोड़तोड़ में जुटे रहे।
आखिरकार 2015 में धीरे से इन्हें पीएससी फाइट किए गए डॉक्टरेां के प्रमोशन लिस्ट में डाल दिया गया।
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पीएससी से आए डॉक्टर हो गए जूनियर
पीएससी से चयनित डॉक्टर भी इन डॉक्टरों का विरोध कर रहे हैं। एक चिकित्सक ने बताया कि विभाग के इस गडबडी के कारण उनकी वरिष्ठता प्रभावित हो रही है।
उनकी जगह ऐसे चिकित्सा शिक्षकों को डीन और सुपरिटेंडेंट की जिम्मेदारी दी जा रही है, जो पीएससी के जरिए आए ही नहीं।
बताया जाता है कि पीएससी से चयनित डॉक्टरों ने राज्य शासन के समक्ष भी अपना विरोध जताया है।
सबसे बड़ा पदोन्नति घोटाला
'यह चिकित्सा शिक्षा विभाग का बड़ा पदोन्नति घोटाला है, जो पीएससी से चयनित ही नहीं है उन्हें राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में प्रभारी डीन बनाकर भेजा जा रहा है।
सहायक प्राध्यापक के लिए पीएससी से चयनित होने का नियम है। बाकी अन्य पद पर पीएससी प्रमोशन है।
हमारी मांग है कि इस घोटाले की जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो।'
अनिल पांडे, प्रांताध्यक्ष, छग प्रदेश स्वास्थ्य कर्मचारी संघ
रेगुलर नियुक्ति में रखेंगे सीनियरिटी का ध्यान
'अभी जिन भी डॉक्टरों को मेडिकल कॉलेज के डीन की जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें प्रभारी बनाया गया है।
प्रभारी किसी को भी बनाया जा सकता है। रेगुलर नियुक्ति के दौरान सीनियारिटी का ध्यान दिया जाएगा।
वैसे ये सारे मामले मेरे आने से पहले के हैं। मुझे आप प्वाइंट बनाकर दे दीजिए, इसकी जांच करवाता हूं।
रितेश अग्रवाल, आयुक्त, चिकित्सा शिक्षा विभाग
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