टाइप्ट बयान मामले में एसीबी चीफ समेत 3 अफसरों के खिलाफ दायर याचिका खारिज
Arun Tiwari | Feb 18, 2026, 18:34 IST
acb chief 3 officers
रायपुर अदालत ने ACB-EOW अधिकारियों के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज किया। शिकायत में आरोप था कि धारा 164 के तहत फर्जी बयान दर्ज किया गया। कोर्ट ने इसे अधिकार क्षेत्र की समस्या बताया।
News in Short
शिकायत में आरोप था कि फर्जी तरीके से धारा 164 के तहत बयान दर्ज किया गया।
यह मामला छत्तीसगढ़ कोल घोटाले से जुड़ा है।
शिकायतकर्ता ने इसे दस्तावेजों की कूटरचना और साजिश बताया।
अदालत ने मामले को अधिकार क्षेत्र की समस्या के कारण खारिज किया।
News in Detail
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शिकायत में लगाया यह आरोप
राज्य सरकार के अधिवक्ता रवि शर्मा ने कहा कि यह अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। शिकायतकर्ता के अधिवक्ता फैजल रिजवी ने कहा कि अपराध की सूचना देना नागरिक का अधिकार है। फैजल रिजवी ने आदेश के खिलाफ रिविजन याचिका दायर करने की बात की।
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क्या है पूरा मामला
शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन के मुताबिक, कोर्ट में जब निखिल चंद्राकर के बयान की कॉपी सूर्यकांत तिवारी के वकीलों को दी गई, तो उसमें कई गड़बड़ियां सामने आईं। इससे EOW/ACB पर झूठे तरीके से साजिश रचने का शक हुआ।
गिरीश देवांगन के मुताबिक, बयान की जो प्रति कोर्ट को दी गई वह उस भाषा में नहीं है, जो आमतौर पर कोर्ट में इस्तेमाल होती है। उसमें जो फॉन्ट इस्तेमाल हुआ है, वह भी कोर्ट में इस्तेमाल होने वाला फॉन्ट नहीं है। वह फॉन्ट तो छत्तीसगढ़ की अदालतों में कभी इस्तेमाल में लाया ही नहीं जाता।
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गिरीश देवांगन के आरोप
मजिस्ट्रेट के सामने निखिल चंद्राकर का बयान दर्ज नहीं कराया गया, बल्कि बाहर तैयार की गई फाइल को ही उसका बयान बताकर जमा कर दिया गया। शिकायतकर्ता गिरीश देवांगन ने कहा कि, इस तरह की गड़बड़ी से साफ पता चलता है कि, ईओडब्लू/एसीबी ने दस्तावेजों की कूटरचना (फर्जीवाड़ा) की है।
इसलिए इस मामले की गंभीरता से जांच कर जरूरी कार्रवाई की मांग की जा रही है। कानूनी तौर पर यह प्रक्रिया न्यायालयीन नियमों का घोर उल्लंघन माना जाता है। इस खुलासे के बाद यह सवाल उठ गया कि, अगर जांच एजेंसियां इस तरह बयान तैयार करेंगी, तो निष्पक्ष जांच और न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है?
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