रिश्वत का खेल : भारतमाला प्रोजेक्ट में सिंचित जमीन को बंजर बताकर काटा मुआवजा
Umeshwari Baghel | Jun 21, 2026, 18:50 IST
ACB दफ्तर पहुंचे आक्रोशित किसान
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव के देवादा गांव में भारतमाला परियोजना के तहत मुआवजा घोटाले के आरोप लगे हैं। किसानों का दावा है कि रिश्वत न देने पर उपजाऊ जमीन को बंजर दिखाकर कम मुआवजा दिया गया और रिकॉर्ड में हेरफेर हुआ। ग्रामीणों ने ACB से जांच की मांग की है।
समझें क्या है पूरा मामला
कि जिनकी जमीन उपजाऊ और सिंचित थी, उसे रिकॉर्ड में बंजर दिखाकर कम मुआवजा दिया गया, जबकि कुछ मामलों में फर्जी तरीके से ज्यादा भुगतान भी कर दिया गया। पूरा मामला अब एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) रायपुर तक पहुंच गया है।
किसानों का आरोप: रिश्वत न देने पर घटाया गया मुआवजा
किसानों का कहना है कि जिन लोगों ने पैसे नहीं दिए, उनकी जमीन को कागजों में एक फसली या कम उपजाऊ दिखाकर मुआवजा घटा दिया गया। वहीं, जिन्होंने कथित तौर पर पैसे दिए, उन्हें अपेक्षाकृत अधिक मुआवजा मिला। इस पूरे घटनाक्रम से गांव के किसानों में नाराजगी और असंतोष है।
सिंचाई वाली जमीन को बताया गया बंजर
इस गलत वर्गीकरण के कारण मुआवजे की राशि पर सीधा असर पड़ा और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरी भूमि का दोबारा भौतिक और तकनीकी मूल्यांकन किया जाए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
खसरा रिकॉर्ड और भुगतान सूची में गड़बड़ी के आरोप
इसके विपरीत कुछ ऐसी जमीनें भी शामिल कर ली गईं, जो वास्तव में सड़क या परियोजना की सीमा में आती ही नहीं थीं। ग्रामीणों ने इसे संभावित फर्जी भुगतान और रिकॉर्ड में हेरफेर का मामला बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
अधिग्रहण के बाद जमीन खरीदने का दबाव, बिल्डर पर भी आरोप
एक ग्रामीण महेश सिन्हा ने शिकायत में कहा कि कई जगह अधिग्रहण के नक्शों में बदलाव करके निजी जमीनों को प्रभावित दिखाया गया, जिससे कुछ खास लोगों को फायदा मिल सके। ग्रामीणों का दावा है कि सीमांकन और नक्शा प्रक्रिया में भी अनियमितताएं हुई हैं, जिसकी तकनीकी जांच जरूरी है।
ACB से न्यायिक जांच की मांग
पूरे भूमि अधिग्रहण की स्वतंत्र जांच हो
मुआवजा वितरण की फॉरेंसिक ऑडिट की जाए
पटवारी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच हो
बिल्डर और बिचौलियों की संलिप्तता स्पष्ट की जाए
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक वे आंदोलन जारी रखेंगे।
प्रशासन की भूमिका पर सवाल, जांच पर टिकी नजर
महत्वपूर्ण तथ्य
किसानों का आरोप: रिश्वत न देने पर जमीन को बंजर/असिंचित दिखाया गया
मुआवजा बढ़ाने के बदले 2–3 लाख रुपए मांगने का दावा
खसरा और भुगतान रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप
मामले की शिकायत ACB रायपुर में दर्ज, जांच की मांग तेज
निष्कर्ष
FAQ
- भारतमाला परियोजना में किसानों ने क्या आरोप लगाए हैं?
किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान रिकॉर्ड में हेरफेर किया गया। उपजाऊ जमीन को बंजर दिखाकर कम मुआवजा दिया गया और कुछ मामलों में रिश्वत की मांग भी हुई। - क्या मामले में किसी अधिकारी पर रिश्वत लेने का आरोप है?
हां, किसानों का दावा है कि पटवारी और कुछ राजस्व अधिकारियों द्वारा मुआवजा बढ़ाने के बदले 2 से 3 लाख रूपए तक की मांग की गई थी। - अब इस मामले में क्या कार्रवाई की मांग की गई है?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की ACB जांच, भूमि का दोबारा मूल्यांकन और मुआवजा वितरण की न्यायिक जांच की मांग की है।
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