कॉल मी को फायदा पहुंचाने नियमों की धज्जियां उड़ाई, विधायक कौशिक का मंत्री से सवाल
Arun Tiwari | Jul 15, 2026, 12:45 IST
विधानसभा में कॉल मी विवाद 2026
छत्तीसगढ़ विधानसभा में कॉल मी प्लेसमेंट एजेंसी को काम देने और 14 करोड़ रूपए से अधिक के भुगतान का मामला गूंजा। बीजेपी विधायक धरमलाल कौशिक ने नियमों की अनदेखी कर एजेंसी को फायदा पहुंचाने का आरोप लगाया।
विधानसभा में कॉल मी प्लेसमेंट एजेंसी को काम देने और भुगतान करने का मामला उठा। बीजेपी विधायक धरमलाल कौशिक ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से कहा कि कॉल मी को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों की धज्जियां उड़ाई गई।
मेडिकल कॉलेज में लगे कॉल मी के लोग महिलाओं की सोने की बालियां चुरा रहे हैं। लोगों के साथ गुंडागर्दी कर रहे हैं। इसके बाद भी निजी स्वार्थ के लिए उसको काम दिया जा रहा है।
इन कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा है। इस सवाल पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि वे पुलिस वेरिफिकेशन कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में विभिन्न विभागों में प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों के अनिवार्य पुलिस सत्यापन का मामला विधानसभा में उठाया गया।
विधायक धरमलाल कौशिक ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि सरकार ने पहले केवल 40 कर्मचारियों का ही पुलिस सत्यापन होने की जानकारी दी थी, जबकि सभी कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य है।
विधायक ने जानना चाहा कि वर्ष 2024 से जून 2026 तक बिना पुलिस सत्यापन वाले कर्मचारियों को कितना भुगतान किया गया और इसका माहवार, संस्थावार तथा राशिवार ब्यौरा क्या है।
साथ ही यह भी पूछा कि यदि पुलिस सत्यापन अनिवार्य था तो अब तक सभी कर्मचारियों का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया।
प्रश्न में यह मुद्दा भी उठाया गया कि प्लेसमेंट एजेंसी को कर्मचारियों के भुगतान के लिए 14 करोड़ रूपए से अधिक की राशि जारी की गई।
विधायक ने पूछा कि अनुबंध की शर्तों का पालन किए बिना भुगतान किए जाने की जिम्मेदारी किसकी है और इस वित्तीय अनियमितता के लिए कौन अधिकारी उत्तरदायी है। उन्होंने 20 जून 2026 तक किए गए भुगतान का विस्तृत विवरण भी मांगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में पूछे गए प्रश्न में वर्ष 2023 से जून 2026 तक स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों और संस्थानों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों की संख्या, उनकी तैनाती और पुलिस सत्यापन की स्थिति की जानकारी भी सरकार से मांगी गई है।
यह मामला सामने आने के बाद प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से की जा रही नियुक्तियों, अनुबंधों के पालन और सुरक्षा संबंधी प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं।
विधायक का कहना है कि यदि बिना पुलिस सत्यापन कर्मचारियों से काम लिया गया और उन्हें भुगतान भी किया गया, तो यह नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि प्लेसमेंट एजेंसी के कर्मचारियों का सत्यापन कराना जरूरी है। यदि अनिवार्य पुलिस सत्यापन के नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
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मेडिकल कॉलेज में लगे कॉल मी के लोग महिलाओं की सोने की बालियां चुरा रहे हैं। लोगों के साथ गुंडागर्दी कर रहे हैं। इसके बाद भी निजी स्वार्थ के लिए उसको काम दिया जा रहा है।
इन कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन भी नहीं कराया जा रहा है। इस सवाल पर मंत्री जायसवाल ने कहा कि वे पुलिस वेरिफिकेशन कर रहे हैं।
प्लेसमेंट एजेंसियों की मनमानी:
विधायक धरमलाल कौशिक ने स्वास्थ्य मंत्री से पूछा कि सरकार ने पहले केवल 40 कर्मचारियों का ही पुलिस सत्यापन होने की जानकारी दी थी, जबकि सभी कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य है।
विधायक ने जानना चाहा कि वर्ष 2024 से जून 2026 तक बिना पुलिस सत्यापन वाले कर्मचारियों को कितना भुगतान किया गया और इसका माहवार, संस्थावार तथा राशिवार ब्यौरा क्या है।
साथ ही यह भी पूछा कि यदि पुलिस सत्यापन अनिवार्य था तो अब तक सभी कर्मचारियों का सत्यापन क्यों नहीं कराया गया।
यह मुद्दा भी उठा:
विधायक ने पूछा कि अनुबंध की शर्तों का पालन किए बिना भुगतान किए जाने की जिम्मेदारी किसकी है और इस वित्तीय अनियमितता के लिए कौन अधिकारी उत्तरदायी है। उन्होंने 20 जून 2026 तक किए गए भुगतान का विस्तृत विवरण भी मांगा।
छत्तीसगढ़ विधानसभा में पूछे गए प्रश्न में वर्ष 2023 से जून 2026 तक स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों और संस्थानों में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों की संख्या, उनकी तैनाती और पुलिस सत्यापन की स्थिति की जानकारी भी सरकार से मांगी गई है।
प्लेसमेंट एजेंसियों पर सवाल:
विधायक का कहना है कि यदि बिना पुलिस सत्यापन कर्मचारियों से काम लिया गया और उन्हें भुगतान भी किया गया, तो यह नियमों की अनदेखी का गंभीर मामला है।
सरकार का जवाब:
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