राष्ट्रपति भवन के न्योते पर छाई बस्तर की 300 साल पुरानी झिटकू-मिटकी कला
Umeshwari Baghel | Aug 05, 2026, 15:02 IST
राष्ट्रपति भवन तक पहुंची बस्तर की अमर प्रेमगाथा
बस्तर की 300 साल पुरानी लोकगाथा झिटकू-मिटकी को राष्ट्रपति भवन के स्वतंत्रता दिवस एट होम निमंत्रण पत्र में जगह मिली है। पिटवा कला और ढोकरा शिल्प से बनी यह कलाकृति अब राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की संस्कृति की पहचान बनेगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- राष्ट्रपति भवन में गूंजेगी बस्तर की गाथा
- झिटकू-मिटकी को मिला राष्ट्रीय सम्मान
- बस्तर कला की राष्ट्रपति भवन तक पहुंच
- देश देखेगा बस्तर की लोककला
- झिटकू-मिटकी बनी छत्तीसगढ़ की पहचान
इस निमंत्रण पत्र में झिटकू-मिटकी की कहानी को बस्तर की प्रसिद्ध पिटवा कला और ढोकरा (बेल मेटल) शिल्प के जरिए दर्शाया गया है। यह पहली बार है जब बस्तर की इस लोककला को देश के सबसे प्रतिष्ठित आयोजनों में से एक के निमंत्रण पत्र पर जगह मिली है।
बस्तर की संस्कृति को मिला राष्ट्रीय मंच
ढोकरा कला में झिटकू-मिटकी की आकृतियां लंबे समय से बनाई जाती रही हैं। बस्तर के कलाकार अपनी मेहनत और पारंपरिक तकनीक से इन कलाकृतियों को तैयार करते हैं। अब राष्ट्रपति भवन के निमंत्रण पत्र में जगह मिलने से इन कलाकारों और उनकी कला को नई पहचान मिलेगी।
करीब तीन सदियों पुरानी है प्रेम कहानी
इस गाथा में प्रेम, त्याग और सामाजिक मूल्यों की झलक मिलती है। यही वजह है कि बस्तर के लोगों के बीच झिटकू-मिटकी केवल एक कहानी नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है।
राष्ट्रपति को भी भेंट की गई थी कलाकृति
अब उसी कला को स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक निमंत्रण पत्र में शामिल किया गया है। इससे यह साफ है कि बस्तर की पारंपरिक कला अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर देश की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बन रही है।
कलाकारों और छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का पल
प्रदेश के वन मंत्री केदार कश्यप ने भी इसे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि झिटकू-मिटकी की लोकगाथा बस्तर की पहचान है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है।
देश देखेगा बस्तर की कला की खूबसूरती
FAQ
- झिटकू-मिटकी की लोकगाथा क्या है?
झिटकू-मिटकी बस्तर की करीब 300 साल पुरानी लोकगाथा है, जो प्रेम, त्याग और जनजातीय संस्कृति से जुड़ी हुई है। - झिटकू-मिटकी को राष्ट्रपति भवन में क्यों जगह मिली?
बस्तर की पारंपरिक पिटवा कला और ढोकरा शिल्प को सम्मान देने के लिए इसे स्वतंत्रता दिवस के एट होम निमंत्रण पत्र में शामिल किया गया है। - ढोकरा कला क्या है?
ढोकरा छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध बेल मेटल कला है, जिसमें कलाकार पारंपरिक तकनीक से धातु की सुंदर कलाकृतियां तैयार करते हैं।
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