उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बी सुदर्शन रेड्डी का विरोध तेज, आदिवासियों ने की समर्थन न देने की अपील

Harrison Masih | Aug 31, 2025, 19:09 IST
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बस्तर के नक्सल पीड़ितों और बस्तर शांति समिति ने उपराष्ट्रपति पद के लिए INDIA गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी का कड़ा विरोध किया है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर में आदिवासियों ने बी. सुदर्शन रेड्डी की उम्मीदवारी का कड़ा विरोध किया है। रेड्डी INDIA गठबंधन के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। नक्सली हिंसा का शिकार हुए आदिवासियों ने उनका विरोध जताया है।

बस्तर शांति समिति के बैनर तले पीड़ित आदिवासी राजधानी रायपुर पहुंचे, और प्रेस वार्ता कर सांसदों से रेड्डी को समर्थन न देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बी सुदर्शन रेड्डी के फैसलों ने बस्तर के हजारों परिवारों की जिंदगी को नरक बना दिया है।

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सलवा जुडूम पर प्रतिबंध को लेकर विरोध

नक्सल पीड़ितों का कहना है कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जरिए बस्तर में सक्रिय सलवा जुडूम आंदोलन पर प्रतिबंध लगाकर माओवादी हिंसा को बढ़ावा दिया। उनका आरोप है कि सलवा जुडूम से नक्सली संगठन कमजोर हो चुके थे, लेकिन प्रतिबंध लगने के बाद माओवाद को नई ताकत मिली। पीड़ितों का कहना है कि इस बड़े फैसले से पहले उनकी राय नहीं ली गई और बस्तर की जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया।

नक्सली हमलों के पीड़ितों का दर्द

नक्सली हमले में दिव्यांग हुए सियाराम रामटेके ने कहा कि अगर सलवा जुडूम बंद न किया गया होता, तो शायद वे इस स्थिति में नहीं होते। वहीं, केदारनाथ कश्यप ने बताया कि आंदोलन पर प्रतिबंध के बाद उनके भाई की माओवादियों ने हत्या कर दी। चितंगावरम हमले के पीड़ित महादेव दूधु ने बताया कि माओवादी हमले में उन्होंने अपना एक पैर गंवा दिया। इस घटना में 32 लोगों की जान गई थी।
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शहीदों के परिजनों का आक्रोश

शहीद मोहन उइके की पत्नी ने बताया कि माओवादी एम्बुश में उनके पति की मौत हो गई, उस समय उनकी बेटी केवल तीन महीने की थी। उन्होंने कहा कि सलवा जुडूम आंदोलन अगर जारी रहता, तो बस्तर आज नक्सली आतंक से मुक्त हो चुका होता।

छत्तीसगढ़ में बी सुदर्शन रेड्डी का विरोध क्यों हो रहा है?

  1. सलवा जुडूम आंदोलन पर प्रतिबंध का आरोप
    बस्तर के नक्सल पीड़ितों का कहना है कि बी. सुदर्शन रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में सलवा जुडूम आंदोलन पर रोक लगवाई, जिससे माओवाद को बढ़ावा मिला।
  2. माओवादियों के हौसले बढ़े
    आंदोलन के बंद होने से माओवादी संगठनों को बल मिला और नक्सली हमलों में वृद्धि हुई, जिससे हजारों आदिवासी प्रभावित हुए।
  3. नक्सल हमलों के शिकार परिवारों की पीड़ा
    नक्सली हमलों में अपने परिजनों को खोने वाले और दिव्यांग हुए पीड़ितों ने रेड्डी की उम्मीदवारी को अपमानजनक बताया।
  4. सांसदों को समर्थन न देने की अपील
    पीड़ितों और बस्तर शांति समिति ने देशभर के सांसदों को पत्र लिखकर रेड्डी के खिलाफ मतदान की अपील की।
  5. बस्तर की सुरक्षा पर सवाल
    समिति का कहना है कि रेड्डी के फैसले ने बस्तर की शांत भूमि को नरक बना दिया और आज भी हजारों परिवार नक्सली आतंक झेल रहे हैं।
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सांसदों को पत्र लिखकर अपील

बस्तर शांति समिति के सदस्य मंगऊ राम कावड़े ने कहा कि समिति ने देश के सभी सांसदों को पत्र लिखकर रेड्डी को समर्थन न देने की अपील की है। उनका कहना है कि सलवा जुडूम आंदोलन पर रोक से हजारों परिवारों ने माओवादियों का कहर झेला है।

'बस्तर की शांत भूमि को नरक बना दिया'

समिति के सदस्य जयराम ने कहा कि ऐसे व्यक्ति को उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसके फैसलों ने बस्तर को नरक बना दिया। उन्होंने जनता से भी इस विरोध में साथ देने की अपील की। बी. सुदर्शन रेड्डी का विरोध

FAQ

  1. बी. सुदर्शन रेड्डी का बस्तर से क्या विवाद जुड़ा है?
    बी. सुदर्शन रेड्डी पर आरोप है कि उन्होंने सलवा जुडूम आंदोलन पर प्रतिबंध लगवाया, जिससे माओवादी गतिविधियां बढ़ीं और बस्तर में नक्सली हिंसा तेज हुई।
  2. सलवा जुडूम आंदोलन पर रोक क्यों विवाद का कारण बनी?
    परिवार नक्सल आतंक के शिकार हो गए।
  3. बस्तर शांति समिति ने क्या कदम उठाए हैं?
    बस्तर शांति समिति और नक्सल पीड़ितों ने सांसदों को पत्र लिखकर बी. सुदर्शन रेड्डी का समर्थन न करने की अपील की है।
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