नौकरी की मांग कर महिलाओं ने भी कराया मुंडन, न्याय की अंतिम पुकार
Arun Tiwari | Dec 27, 2024, 22:34 IST
BEd Teachers Protest Raipur the sootr
छत्तीसगढ़ के 3000 बीएड होल्डर सहायक शिक्षक 14 जनवरी 2025 के बाद शिक्षक नहीं रहेंगे। शिक्षकों की मांग है कि वर्तमान में शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं, जहां इन शिक्षकों को एडजस्ट किया जा सकता है।
B.Ed Teachers Protest Raipur : जहां राजधानी रायपुर में बीते दो हफ्ते से करीब तीन हजार सहायक शिक्षकों ने डेरा रखा है। पहले तो धरना स्थल पर नौकरी की मांग वाले नारे ही लग रहे थे, लेकिन शुक्रवार यानी 27 दिसंबर को कुछ ऐसा हुआ जो मीडिया कैमरों में कैद होकर पूरे देश में वायरल हो गया। हुआ यूं कि गुरुवार को पुरुषों समेत करीब दो दर्जन महिला शिक्षकों ने भी मुंडन कराया।
ये सभी बीएड होल्डर शिक्षक उम्मीदवार हैं, जो कई महीनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार शिक्षा विभाग में उनकी सेवाएं बरकरार रखे लेकिन पेंच ये है कि डी एड होल्डर उम्मीदवारों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि बीएड होल्डर्स को नौकरी से बाहर किया जाए। और भी बड़ी बात ये है कि सरकार भी मजबूर है क्योंकि हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है, लेकिन सहायक शिक्षकों की मांग है कि वर्तमान में शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं, जहां इन शिक्षकों को एडजस्ट किया जा सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बरकरार रहेगा और शिक्षकों की नौकरी भी नहीं जाएगी।
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छत्तीसगढ़ के 3000 बीएड होल्डर सहायक शिक्षक 14 जनवरी 2025 के बाद शिक्षक नहीं रहेंगे। छत्तीसगढ़ में बीएड और डीएलएड शिक्षकों के नियुक्ति विवाद पर कुछ दिन पहले ही हाईकोर्ट का आदेश आया है। जिससे प्राइमरी स्कूलों में पदस्थ बीएड होल्डर सहायक शिक्षकों की नौकरी पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
ऐसे में सहायक शिक्षक सरकार से उनकी नौकरी बचाने की गुहार लगा रहे है। बीते दो हफ्ते से करीब 3000 शिक्षक रायपुर में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार भी उन्हें अपनी मजबूरी बता चुकी है। मजबूरी है कि उन्हें नौकरी से हटाने का फैसला सरकार का नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट का है।मगर सहायक शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं।
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मिसाल के तौर पर सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 5500 पद खाली पड़े हैं जहां सरकार बड़ी आसानी से इन शिक्षकों को एडजस्ट कर सकती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना भी नहीं होगी और हजारों शिक्षकों को नौकरी भी मिल जाएगी।
मगर फिलहाल सरकार का कोई रुख सामने नहीं आया है और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
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ये शिक्षक बीते दिनों अंबिकापुर से पैदल चलकर 14 दिसंबर को रायपुर पहुंचे थे। और तब से अब तक वहीं धरना दे रहे हैं। बार-बार आवेदन-निवेदन और धरना प्रदर्शन के बाद भी सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी तो 27 दिसंबर को महिला और पुरुष शिक्षकों ने सामूहिक मुंडन कराकर सरकार तक अपनी परेशानी पहुंचाने की कोशिश की और अब अपनी नौकरी बचाने के लिए सोशल मीडिया पर भी हैशटैग कैंपेन छेड़ने की तैयारी है।
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सहायक शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने तमाम सरकारी नियम कायदों और शर्तों का पालन कर बीएड की पढ़ाई की। पात्रता परीक्षा पास की और बच्चों को पढ़ाना शुरू किया लेकिन अचानक उनकी योग्यता को ही अमान्य ठहराया जा रहा है। ऐसे में वो क्या करें ये सरकार ही बताए। इधर, सरकार की मजबूरी ये है कि हाईकोर्ट ने 10 दिसंबर को डीएड होल्डर उम्मीदवारों की याचिका पर सुनवाई की थी, जिसमें दो हफ्ते के भीतर बीएड होल्डर उम्मीदवारों की नियुक्ति रद्द कर डीएड होल्डर्स को सहायक शिक्षक के पद पर जॉइनिंग देने का आदेश सुनाया गया था।
ये डेडलाइन वर्किंग डेज के हिसाब से 14 जनवरी को खत्म हो जाएगी। यानी सरकार कोर्ट के आदेश की वजह से मजबूर है। अब शिक्षक ये कह रहे हैं कि सरकार उन्हें शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों पर एडजस्ट करे वरना उनका आंदोलन और भी तेज होगा
ये सभी बीएड होल्डर शिक्षक उम्मीदवार हैं, जो कई महीनों से रायपुर के तूता धरना स्थल पर प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी मांग है कि सरकार शिक्षा विभाग में उनकी सेवाएं बरकरार रखे लेकिन पेंच ये है कि डी एड होल्डर उम्मीदवारों की याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि बीएड होल्डर्स को नौकरी से बाहर किया जाए। और भी बड़ी बात ये है कि सरकार भी मजबूर है क्योंकि हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, वो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आधारित है, लेकिन सहायक शिक्षकों की मांग है कि वर्तमान में शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं, जहां इन शिक्षकों को एडजस्ट किया जा सकता है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी बरकरार रहेगा और शिक्षकों की नौकरी भी नहीं जाएगी।
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3000 शिक्षकों पर संकट
ऐसे में सहायक शिक्षक सरकार से उनकी नौकरी बचाने की गुहार लगा रहे है। बीते दो हफ्ते से करीब 3000 शिक्षक रायपुर में धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार भी उन्हें अपनी मजबूरी बता चुकी है। मजबूरी है कि उन्हें नौकरी से हटाने का फैसला सरकार का नहीं, बल्कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हाईकोर्ट का है।मगर सहायक शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा विभाग में हजारों पद खाली हैं।
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मिसाल के तौर पर सहायक शिक्षक विज्ञान (प्रयोगशाला) के 5500 पद खाली पड़े हैं जहां सरकार बड़ी आसानी से इन शिक्षकों को एडजस्ट कर सकती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना भी नहीं होगी और हजारों शिक्षकों को नौकरी भी मिल जाएगी।
मगर फिलहाल सरकार का कोई रुख सामने नहीं आया है और शिक्षक अपनी मांगों को लेकर डटे हुए हैं।
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योग्यता को ठहराया जा रहा अमान्य
ये डेडलाइन वर्किंग डेज के हिसाब से 14 जनवरी को खत्म हो जाएगी। यानी सरकार कोर्ट के आदेश की वजह से मजबूर है। अब शिक्षक ये कह रहे हैं कि सरकार उन्हें शिक्षा विभाग में खाली पड़े पदों पर एडजस्ट करे वरना उनका आंदोलन और भी तेज होगा
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