बीजेपी के चेहरे जो बने मोदी के खास मोहरे, बंगाल जीत में छत्तीसगढ़िया रंग शामिल, असम में फीके भूपेश
Arun Tiwari | May 04, 2026, 15:44 IST
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हाल ही में हुए चुनावों में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल और असम में शानदार जीत हासिल की, जिसमें छत्तीसगढ़ के नेताओं की अहम भूमिका रही। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और अन्य प्रमुख नेता जैसे पवन साय और विजय शर्मा ने चुनावी अभियान में सक्रिय रूप से भाग लिया।
Raipur. पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव में बीजेपी ने एक तरफा जीत हासिल की है। इन दोनों राज्यों की जीत में छत्तीसगढ़ बीजेपी का रंग भी शामिल है। बीजेपी के कुछ खास नेताओं की ड्यूटी पश्चिम बंगाल में लगाई गई थी। ये नेता महीनों से राज्य में डेरा डाले हुए थे। वहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी कुछ स्थानों पर चुनावी सभाएं की थीं। वहीं असम में कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को जिम्मा सौंपा गया था। इन नतीजों से बीजेपी नेताओं की धाक बढ़ी है तो असम की हार ने भूपेश का रंग फीका कर दिया है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पश्चिम बंगाल में बीजेपी के पक्ष में कई विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव प्रचार किया था। हालांकि उनकी ड्यूटी नहीं लगी थी लेकिन सीएम के नाते उन्होंने पश्चिम बंगाल में अपना ज्यादा समय दिया। चुनावी अभियान के दौरान उन्होंने खास तौर पर दक्षिण बंगाल और उत्तर बंगाल के कई संवेदनशील व बीजेपी के लिए अहम सीटों पर सभाएं कीं। उन क्षेत्रों पर फोकस किया जहां बीजेपी पिछली बार मजबूत प्रदर्शन कर चुकी थी या इस बार जीत की उम्मीद थी उन्होंने परिवर्तन और केंद्र सरकार की योजनाओं को मुख्य मुद्दा बनाया। इनमें से अधिकांश सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है।
बीजेपी के संगठन मंत्री पवन साय आठ महीने पहले से ही पश्चिम बंगाल में डेरा जमा लिए थे। उन्हें 60 से अधिक विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। जीत के बाद उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं और जनता की जीत बताया। उनके मुताबिक यह जनादेश सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ है।
कोलकाता में डटे सौरभ सिंह ने 50 से ज्यादा सीटों पर काम किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव परिणाम के दिन से ही अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर देती है। उन्होंने बीजेपी नेतृत्व को श्रेय दिया। उनके अनुसार जनता ने विकास को समर्थन दिया है।
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव को छह संवेदनशील सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने इस जीत को तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ जनमत बताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रवाद और समान विकास के पक्ष में जनता का फैसला है।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा का नाम भी राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से उभर रहा है। पहले बिहार राज्यसभा चुनाव में उनकी सफलता और फिर बंगाल अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के करीब ला दिया है। उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के भरोसे का परिणाम है।
बीजेपी के इन नेताओं को अब नए अध्यक्ष नितिन नबीन की टीम में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। वैसे पवन साय को पार्टी किसी बड़ी भूमिका में लेकर आएगी। पवन साय को छत्तीसगढ़ के संगठन महामंत्री से मुक्त कर कोई अन्य दायित्व सौंपा जाएगा। वहीं विजय शर्मा के नितिन नबीन की टीम में जाने के आसार नजर आते हैं। इतना तो तय है कि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष की टीम में छत्तीसगढ़ का असर रहने वाला है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की नजर से देखें तो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ही राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय नजर आ रहे हैं। भूपेश बघेल के गांधी परिवार के करीबी होने से उनको बड़ी जिम्मेदारियां भी मिली हैं। असम का जिम्मा भूपेश बघेल के पास था। भूपेश ने असम के कई दौरे भी किए थे और कांग्रेस की जीत का दावा भी किया था।
भूपेश ने असम के सीएम को खूब आड़े हाथों लिया। लेकिन इसका कोई असर नजर नहीं आया। बीजेपी ने असम में भी जीत हासिल कर कांग्रेस को पीछे ढकेल दिया। इस हार ने भूपेश बघेल के रंग को फीका कर दिया। उनके पास पंजाब का भी जिम्मा है। अब लोगों की नजर पंजाब पर है जहां एक साल बाद चुनाव होने हैं।
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पश्चिम बंगाल में इन नेताओं की ड्यूटी :
बीजेपी के संगठन मंत्री पवन साय आठ महीने पहले से ही पश्चिम बंगाल में डेरा जमा लिए थे। उन्हें 60 से अधिक विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। जीत के बाद उन्होंने इसे कार्यकर्ताओं और जनता की जीत बताया। उनके मुताबिक यह जनादेश सत्ता विरोधी लहर, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ है।
कोलकाता में डटे सौरभ सिंह ने 50 से ज्यादा सीटों पर काम किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी चुनाव परिणाम के दिन से ही अगले चुनाव की तैयारी शुरू कर देती है। उन्होंने बीजेपी नेतृत्व को श्रेय दिया। उनके अनुसार जनता ने विकास को समर्थन दिया है।
छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव को छह संवेदनशील सीटों की जिम्मेदारी दी गई थी। उन्होंने इस जीत को तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ जनमत बताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रवाद और समान विकास के पक्ष में जनता का फैसला है।
छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा का नाम भी राष्ट्रीय राजनीति में तेजी से उभर रहा है। पहले बिहार राज्यसभा चुनाव में उनकी सफलता और फिर बंगाल अभियान में उनकी सक्रिय भूमिका ने उन्हें केंद्रीय नेतृत्व के करीब ला दिया है। उन्होंने कहा कि यह जीत कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के भरोसे का परिणाम है।
नितिन नबीन की टीम में जगह :
असम में फीके पड़े भूपेश :
भूपेश ने असम के सीएम को खूब आड़े हाथों लिया। लेकिन इसका कोई असर नजर नहीं आया। बीजेपी ने असम में भी जीत हासिल कर कांग्रेस को पीछे ढकेल दिया। इस हार ने भूपेश बघेल के रंग को फीका कर दिया। उनके पास पंजाब का भी जिम्मा है। अब लोगों की नजर पंजाब पर है जहां एक साल बाद चुनाव होने हैं।
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