भारतमाला प्रोजेक्ट; जमीन के 60 टुकड़े कर डकारे 100 करोड़ रुपए

Aishwarya Dwivedi | May 06, 2026, 10:04 IST
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छत्तीसगढ़ भारतमाला प्रोजेक्ट में अफसरों और माफियाओं ने जमीनों के छोटे टुकड़े कर 100 करोड़ का घोटाला किया। रसूखदारों ने रिश्तेदारों के नाम पर फर्जीवाड़े से मुआवजे की भारी बंदरबांट की है।

NEWS IN SHORT

  • अफसरों और भू-माफियाओं ने मिलकर 100 करोड़ का घोटाला किया।
  • एक ही परिवार के नाम जमीनों के 60 टुकड़े किए।
  • किसानों के बजाय बाहरी व्यापारियों ने मुआवजे का लाभ उठाया।
  • अभनपुर और कुरुद ब्लॉक के कई गांवों में बड़ी धांधली।
  • रसूखदारों ने रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी तरीके से करोड़ों डकारे।

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ में विकास की रफ्तार देने वाली भारतमाला परियोजना अब भ्रष्टाचार के बड़े खेल के लिए सुर्खियों में है। एक चौंकाने वाले खुलासे में यह बात सामने आई है कि अभनपुर और कुरुद ब्लॉक के कई गांवों में अधिकारियों, भू-माफियाओं और जमीन मालिकों ने मिलीभगत कर मुआवजे की बंदरबांट की है। 100 करोड़ रुपए से अधिक के इस घोटाले में सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि यहाँ कोई 'ठगा' नहीं गया, बल्कि सेटिंग के जरिए सभी शामिल लोग मालामाल हो गए।

रिश्तेदारों के नाम जमीन के टुकड़े और करोड़ों का वारा-न्यारा

इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांट दिया गया। हाल ही में जिन रसूखदारों के ठिकानों पर छापे पड़े, उन्होंने अपने रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों के नाम पर मुआवजे की मोटी रकम डकारी है।

मुआवजे के खिलाड़ी और करोड़ों की कमाई

Their Multi-Crore Earnings
Their Multi-Crore Earnings


बनारसी लाल अग्रवाल: इन्होंने अपने बेटों और बहुओं के नाम पर 34 खसरों के जरिए 22 करोड़ 81 लाख रुपए से अधिक का मुआवजा लिया।

सत्यनारायण गांधी और गोपालचंद गांधी: पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने 11 खसरों से 8 करोड़ 8 लाख रुपए अपने खाते में डाले।

छोटूराम: इन्होंने अपने बेटों के नाम पर 13 खसरों से 10 करोड़ 7 लाख रुपए की राशि प्राप्त की।

जेपी पांडेय (नेक्स्ट जेन): इन्होंने 15 खसरों के माध्यम से 10 करोड़ 13 लाख रुपए का लाभ उठाया।

सूबेलाल: अपने बच्चों के नाम पर 8 खसरों से 6 करोड़ 41 लाख रुपए बटोरे।

किसान पीछे, बाहरी व्यापारी और नेताजी आगे

इस घोटाले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि मुआवजा पाने वालों में असली किसान कम और बाहरी व्यापारी ज्यादा हैं। जैसे ही भारतमाला कॉरिडोर की योजना की भनक लगी, रसूखदार व्यापारियों ने इन गांवों में डेरा डाल दिया। आनन-फानन में जमीनें खरीदी गईं और प्रशासनिक अमले से सांठगांठ कर रिकॉर्ड्स में हेराफेरी की गई।

इन गांवों में हुआ मुआवजे का बंदरबांट

पड़ताल के अनुसार, अभनपुर और कुरुद ब्लॉक के नायकबांधा, सातपारा, उरला, मुड़पार (भेलवाडीह), टोकरो, तर्रा, कोलर, सारखी, और नांदगांव जैसे इलाकों में खसरों के टुकड़े कर मुआवजे का खेल खेला गया। इसमें अभनपुर के एक कद्दावर नेता का नाम भी सामने आ रहा है, जिन्होंने करोड़ों की राशि मुआवजे के तौर पर ली है।

कैसे हुआ यह स्मार्ट घोटाला

सूत्रों की मानें तो इस घोटाले का मास्टरप्लान बेहद शातिराना था। प्रोजेक्ट की राह में आने वाली जमीन को पहले औने-पौने दाम पर व्यापारियों ने खरीदा, फिर प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से उन जमीनों को कागजों पर कई हिस्सों में बांट दिया गया ताकि अधिकतम मुआवजा लिया जा सके। यह एक ऐसा सिंडिकेट था जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक के अधिकारी कथित तौर पर शामिल थे।

इस पूरे प्रकरण में सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगी है। जमीनों के खसरों में हुए बदलाव और रिकॉर्ड्स की जांच अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।फिलहाल, इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। देखना यह होगा कि जांच की आंच उन सफेदपोशों और अफसरों तक कब पहुंचती है, जिन्होंने विकास की योजना को अपनी तिजोरी भरने का जरिया बना लिया।

निष्कर्ष

भारतमाला प्रोजेक्ट में हुआ यह घोटाला सरकारी तंत्र और भू-माफियाओं के बीच गहरी सांठगांठ को उजागर करता है। कागजों पर जमीनों का कृत्रिम बंटवारा कर करोड़ों रुपए की हेराफेरी विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाती है। इस भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई ही जनता का विश्वास बहाल कर सकती है।

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