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NEWS IN SHORT
- बिलासपुर में विहिप नेता राजीव शर्मा पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप।
- पीड़िता की शिकायत पर सरकंडा थाना में दुष्कर्म का मामला दर्ज।
- पुलिस ने आरोपी राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया।
- मामले की जांच जारी, पुलिस ने सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
- घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में सवाल खड़े हुए।
NEWS IN DETAIL
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले से एक गंभीर और सनसनीखेज मामला सामने आया है। विश्व हिंदू परिषद (VHP) के नेता राजीव शर्मा पर एक महिला ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की है।
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शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण
पीड़िता का आरोप है कि राजीव शर्मा ने उससे शादी करने का वादा किया (bilaspur rape case) और इसी भरोसे पर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में आरोपी ने शादी से इनकार कर दिया, जिसके बाद महिला ने सरकंडा थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस ने की गिरफ्तारी
शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी राजीव शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले में सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद नेताओं पर यौन अपराध के आरोपों को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
Sootr Knowledge
- शादी का झांसा देकर दुष्कर्म भारतीय कानून में अपराध की श्रेणी में आता है।
- ऐसे मामलों में IPC की धारा 376 के तहत मामला दर्ज किया जाता है।
- आरोपी का राजनीतिक या सामाजिक पद कानूनी कार्रवाई को नहीं रोकता।
- पीड़िता की पहचान गोपनीय रखना कानूनन अनिवार्य है।
- दोष सिद्ध होने पर आरोपी को कठोर सजा का प्रावधान है।
IMP FACTS
- जिला: बिलासपुर (छत्तीसगढ़)
- थाना: सरकंडा
- आरोपी: राजीव शर्मा (विहिप नेता)
- आरोप: शादी का झांसा देकर दुष्कर्म
- स्थिति: आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
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आगे क्या
- आरोपी को न्यायालय में पेश किया जाएगा।
- पुलिस पीड़िता और गवाहों के बयान दर्ज करेगी।
- मेडिकल और अन्य साक्ष्यों की जांच होगी।
- जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
निष्कर्ष
बिलासपुर का यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि भरोसे और रिश्तों की आड़ में होने वाले अपराध कितने गंभीर हो सकते हैं। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अंतिम फैसला अदालत के माध्यम से ही होगा। कानून के तहत निष्पक्ष जांच और न्याय पीड़िता के अधिकार की रक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
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