CBSE का नया फरमान : अब 10वीं तक पढ़नी होंगी दो भारतीय भाषाएं
Umeshwari Baghel | Jun 15, 2026, 15:46 IST
CBSE का बड़ा फैसला
CBSE ने 9वीं और 10वीं कक्षा में बड़ा बदलाव किया है। अब छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। यह नियम 1 जुलाई से लागू होगा और NCERT पाठ्यक्रम के अनुसार पढ़ाई होगी।
NEWS IN SHORT
- CBSE का बड़ा बदलाव 9वीं-10वीं में अब 3 भाषाएं अनिवार्य
- नई भाषा नीति लागू: दो भारतीय भाषाएं पढ़ना जरूरी
- विदेशी भाषा पर नया नियम, बोर्ड ने जारी किया सर्कुलर
- 10वीं में तीसरी भाषा की परीक्षा नहीं, सिर्फ स्कूल स्तर पर मूल्यांकन
- 1 जुलाई से लागू होगी नई व्यवस्था, स्कूलों को मिले निर्देश
NEWS IN DETAIL
इससे पहले बोर्ड ने छठवीं कक्षा में भी तीन भाषा फॉर्मूले को लागू किया था, जिसे अब आगे बढ़ाते हुए हाई स्कूल स्तर तक लागू किया जा रहा है। शिक्षा प्रणाली में यह बदलाव धीरे-धीरे पूरे देश में भाषा शिक्षण के ढांचे को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
विदेशी भाषा चुनने पर भी तय होंगे नियम
अगर कोई छात्र पहले से ही दो भारतीय भाषाएं नहीं चुनता है, तो उसे विदेशी भाषा को तीसरी भाषा के रूप में नहीं दिया जाएगा। ऐसे मामलों में विदेशी भाषा को केवल चौथी अतिरिक्त भाषा के तौर पर ही पढ़ने की अनुमति होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भाषा शिक्षा पूरी तरह NCERT के नए पाठ्यक्रम के अनुसार ही संचालित होगी।
यह बदलाव छात्रों को अपनी सांस्कृतिक और भाषाई जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ वैश्विक भाषाओं के अध्ययन का संतुलन भी बनाएगा।
तीसरी भाषा पर बोर्ड परीक्षा नहीं होगी
इस भाषा का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के माध्यम से किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि छात्रों पर बोर्ड परीक्षा का अतिरिक्त दबाव नहीं रहेगा, लेकिन उन्हें स्कूल स्तर पर नियमित मूल्यांकन से गुजरना होगा।
इस व्यवस्था से उम्मीद की जा रही है कि छात्र भाषाओं को केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि समझ और उपयोग के स्तर पर सीखेंगे।
किताबों और पाठ्यक्रम को लेकर भी निर्देश
वहीं छठवीं कक्षा के लिए R-3 की पाठ्यपुस्तकें 19 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएंगी। ये किताबें 1 जुलाई से पहले सभी स्कूलों तक पहुंचा दी जाएंगी, ताकि नए सत्र में किसी तरह की बाधा न आए।
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स्कूलों को पोर्टल पर जानकारी अपडेट करनी होगी
इसमें यह स्पष्ट करना होगा कि स्कूल में कौन-कौन सी भाषाएं चुनी गई हैं और प्रत्येक भाषा को पढ़ने वाले छात्रों की संख्या कितनी है। यह डेटा शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और भविष्य की योजना बनाने में मदद करेगा।
CBSE का मानना है कि इससे देशभर में भाषा शिक्षा की स्थिति का एक स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और नीतिगत फैसलों को और बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा।
IMP FACTS
कम से कम 2 भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी है।
विदेशी भाषा केवल तीसरी भाषा तभी बन सकती है जब 2 भारतीय भाषाएं हों।
10वीं में तीसरी भाषा (R-3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।
इसका मूल्यांकन स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से होगा।
नया नियम 1 जुलाई से लागू होगा।
अभी 9वीं के लिए R-3 की नई किताबें उपलब्ध नहीं हैं।
छठवीं कक्षा की R-3 किताबों से 9वीं के छात्र पढ़ाई करेंगे।
6वीं के लिए 19 भारतीय भाषाओं में किताबें 1 जुलाई से पहले मिलेंगी।
सभी स्कूलों को 30 जून तक OASIS पोर्टल पर भाषा डेटा अपलोड करना होगा।
क्या बदल जाएगा छात्रों के लिए?
कुल मिलाकर यह बदलाव सिर्फ एक शैक्षणिक नियम नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा नीति में भाषाई संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
FAQ
- CBSE ने 9वीं और 10वीं में क्या नया नियम लागू किया है?
CBSE ने 9वीं और 10वीं कक्षा में तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य कर दिया है, जिसमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। - क्या तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा होगी?
नहीं, तीसरी भाषा (R-3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। - विदेशी भाषा पढ़ने के लिए क्या शर्त है?
विदेशी भाषा तभी तीसरी भाषा के रूप में चुनी जा सकती है जब छात्र दो भारतीय भाषाएं पहले से पढ़ रहा हो। अन्यथा इसे चौथी अतिरिक्त भाषा माना जाएगा।
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