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NEWS IN SHORT
.छत्तीसगढ़ में हुआ भ्रष्टाचार का सहकार
.कोऑपरेटिव बैंकों में 500 करोड़ का भ्रष्टाचार
. ईओडब्ल्यू खोलेगी एक एक बैंक की फाइल
. ईओडब्ल्यू को जांच सौंपने की तैयारी
NEWS IN DETAIL
भ्रष्टाचार का सहकार :
छत्तीसगढ़ सहकार से भ्रष्टाचार का खेल खूब चला है। अपेक्स से लेकर जिला कोऑपरेटिव बैंकों तक 500 करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले सामने आए हैं।
किसानों के नाम पर फर्जी ऋण, फर्जी एकाउंट, कूटरचित दस्तावेजों से वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। राज्य में कंसल्टेंसी से अनियमितता की जांच कराई गई और ऑडिट रिपोर्ट में अलग-अलग गड़बड़ियां सामने आई हैं।
इसके बाद सॉफ्टवेयर को ब्लॉक कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स) और जिला सहकारी बैंकों में करोड़ों के घोटालों की जांच ईओडब्ल्यू को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वर्तमान में बरमकेला बैंक के 18 करोड़ के घोटाले मामले की जांच के लिए अपेक्स बैंक ने राज्य शासन को पत्र भेज दिया है। बताया जा रहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद अन्य सहकारी बैंकों के मामलों की भी जानकारी ईओडब्ल्यू को भेजी जाएगी।
पिछले कुछ सालों में राज्य में अनियमितताओं की गाड़ी कमाई और सरकारी खजाने को जिस तरह से लूटा गया है, इस जांच के दायरे में बैंक के एमडी, सीईओ समेत कई जिम्मेदार अधिकारी आ सकते हैं, जो जांच के बीच खुद को बचाने अब राजनीतिक संरक्षण की तलाश कर रहे हैं।
प्रमुख जिला सहकारी बैंकों में भ्रष्टाचार :
रायपुर - 10 करोड़ से अधिक का गबन का आरोप, बैंक के 24 से अधिक लोगों पर हुई थी एफआईआर।
अंबिकापुर - 43 करोड़ से ज्यादा का घोटाला आया है सामने।
बरमकेला - 18 करोड़ के घोटाले का आरोप, जांच में बढ़ सकता है 50 करोड़ से अधिक का मामला।
दुर्ग - 50 करोड़ से अधिक घोटाले का आरोप, कई अधिकारी जांच के घेरे में।
बिलासपुर - 106 करोड़ से अधिक घोटाले के आरोप, कई अफसर हुए बर्खास्त।
राजनांदगांव बैंक में भी करोड़ों की वित्तीय अनियमितता के आरोप, कई जिलों में भी अनियमितता के मामले।
Sootr knowledge :
कोऑपरेटिव बैंक प्रदेश के किसानों को खरीफ, रबी फसलों के लिए कम ब्याज दर पर अल्पकालिक और मध्यम अवधि के कृषि ऋण प्रदान करते हैं।
इसी तरह शक्कर कारखानों, विपणन और अन्य सहकारी समितियों को वर्किंग कैपिटल और ऋण सहायता उपलब्ध कराते है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि अवसंरचना (डेयरी, कुक्कुट पालन) के लिए ऋण देकर ग्रामीण विकास में मदद करते है।
इनका काम सामान्य बैंकिंग, जैसे जमा, निकासी, डीडी और डिजिटल सेवाएं (एटीएम, मोबाइल बैंकिंग) प्रदान करना है।
अपेक्स बैंक सभी जिला सहकारी बैंकों का पर्यवेक्षण और मार्गदर्शन करने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भूमिका निभाता है। कोऑपरेटिव बैंक ग्रामीण कृषि की रीढ़ माने जाते हैं।
important points :
ईओडब्ल्यू जांच शुरू - छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में करोड़ों रूपए के घोटालों की जांच आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को सौंपी गई।
बरमकेला मामला सबसे पहले - 18 करोड़ रूपए के बरमकेला सहकारी बैंक घोटाले की जांच पहले की जा रही है, राशि बढ़कर 50 करोड़ तक पहुंच सकती है।
फर्जीवाड़े के तरीके - किसानों के नाम पर फर्जी ऋण, फर्जी खाते और कूटरचित दस्तावेजों से वित्तीय अनियमितताएं सामने आईं।
वरिष्ठ अधिकारी घेरे में - जांच में अपेक्स बैंक और जिला बैंकों के एमडी, सीईओ समेत कई अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
सुधार और डिजिटाइजेशन - घोटालों के बाद सॉफ्टवेयर ब्लॉक कर डिजिटल बैंकिंग, ई-किसान और एटीएम सुविधाओं को मजबूत किया गया।
अब आगे क्या :
अपेक्स बैंक के अध्यक्ष केदार गुप्ता कहते हैँ कि बरमकेला बैंक घोटाले की जांच के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। जैसे ही यह प्रक्रिया पूरी होगी, अन्य बैंकों से जुड़े वित्तीय अनियमितताओं के दस्तावेज भी ईओडब्ल्यू को सौंपे जाएंगे।
गुप्ता का कहना है कि जांच के बाद सहकारी बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लगेगी। वित्तीय अनियमितता को लेकर ईओडब्ल्यू से जांच कराने की घोषणा की गई है, जिस पर कामय है।
बरमकेला बैंक में हुई गड़बड़ी की जांच भी शुरू हो गई है। दरअसल जांच की एक प्रक्रिया है, पहले रजिस्टर, सचिव, शाखा प्रबंधक, समन्वय प्रशासन समिति के बाद ईओडब्ल्यू तक प्रस्ताव जाता है, इसलिए एक-एक कर निर्णय कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कई नवाचार भी अपनाए गए हैं, जिससे किसानों को सुविधाएं मिल सकें।
निष्कर्ष :
पिछले कुछ वर्षों में सहकारी बैंकों में जिस तरह से सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं, उसने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जब ईओडब्ल्यू जांच शुरू होगी, तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि घोटालों के लिए कौन-कौन जिम्मेदार है।
जानकारों का कहना है कि कुछ अधिकारी खुद को बचाने के लिए राजनीतिक संरक्षण तलाश रहे हैं, लेकिन जांच एजेंसी की सख्ती से कई चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है।
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