बिना तलाक दूसरी शादी करने पर नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता, हाईकोर्ट ने ठुकराई महिला की याचिका

हाईकोर्ट ने दुर्ग-भिलाई की एक महिला की गुजारा भत्ता याचिका खारिज कर दी है। महिला ने अपने दूसरे पति से धारा 125 सीआरपीसी के तहत 1 लाख प्रतिमाह भत्ता मांगा था। सुनवाई में सामने आया कि महिला ने पहले पति से कानूनी तलाक लिए बिना दूसरी शादी की थी।

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Harrison Masih
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NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी करने वाली महिला की याचिका खारिज कर दी।
  • महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ 1 लाख प्रतिमाह गुजारा भत्ता मांगा था।
  • महिला का पहला पति जीवित है और उससे कानूनी तलाक नहीं हुआ था।
  • फैमिली कोर्ट ने पहले ही याचिका खारिज कर दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने सही ठहराया।
  • पहली शादी के अस्तित्व में रहते दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं, ऐसे में गुजारा भत्ता की मांग उचित नहीं।

NEWS IN DETAIL

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दूसरी शादी करने से पहले पहले पति से कानूनी तलाक लेना अनिवार्य है। पहली शादी के अस्तित्व में रहते दूसरी शादी करना और फिर दूसरे पति से गुजारा भत्ता मांगना कानूनन उचित नहीं है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने यह टिप्पणी करते हुए महिला की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी।

क्या है पूरा मामला?

दुर्ग-भिलाई की रहने वाली महिला ने अपने दूसरे पति के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 125 के तहत फैमिली कोर्ट में आवेदन दिया था।

महिला का दावा था कि 10 जुलाई 2020 को आर्य समाज मंदिर में उसकी शादी हुई थी। उसने आरोप लगाया कि शादी के बाद पति ने उसे शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और घर से निकाल दिया।

महिला ने पति की आय 5 लाख रूपए प्रतिमाह बताते हुए 1 लाख रूपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता की मांग की थी।

सुनवाई में क्या सामने आया?

सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि महिला की पहले से शादी हो चुकी है और उसका पहला पति अभी जीवित है।

महिला ने पहले पति से कानूनी तलाक लिए बिना ही दूसरी शादी कर ली थी। प्रति-परीक्षण में महिला ने स्वीकार किया कि पहली शादी से उसके दो बेटे हैं, जो बालिग हैं और उसके साथ रहते हैं।

फैमिली कोर्ट का फैसला

फैमिली कोर्ट ने पाया कि महिला ने खुद को अविवाहित बताकर दूसरी शादी की रस्म निभाई थी, जबकि उसकी पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई थी।

कोर्ट ने यह भी माना कि महिला पहले आशा वर्कर के रूप में कार्य कर चुकी है और शारीरिक रूप से स्वस्थ है, यानी वह स्वयं अपना भरण-पोषण करने में सक्षम है।

20 जनवरी 2026 को फैमिली कोर्ट ने महिला की याचिका खारिज कर दी थी।

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

महिला ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिवीजन दायर किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट के आदेश में कोई त्रुटि नहीं है। बिना तलाक के दूसरी शादी कानूनी रूप से मान्य नहीं है। ऐसे में धारा 125 के तहत गुजारा भत्ता की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने महिला की अपील खारिज कर दी।

Sootr Knowledge

  • सीआरपीसी धारा 125 का उद्देश्य परित्यक्त पत्नी, बच्चों और माता-पिता को भरण-पोषण दिलाना है।
  • यदि पहली शादी कानूनी रूप से समाप्त नहीं हुई है, तो दूसरी शादी हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अवैध मानी जा सकती है।
  • अवैध विवाह के आधार पर भरण-पोषण का दावा कमजोर हो जाता है।
  • भरण-पोषण का अधिकार वैध वैवाहिक संबंध पर निर्भर करता है।
  • कोर्ट यह भी देखता है कि आवेदक स्वयं जीविका चलाने में सक्षम है या नहीं।

निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (CG High Court) के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि विवाह और तलाक से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन अनिवार्य है। पहली शादी के रहते दूसरी शादी करना कानूनन अवैध है और ऐसे संबंध के आधार पर गुजारा भत्ता मांगना न्यायसंगत नहीं माना जाएगा। 

यह फैसला वैवाहिक कानूनों के प्रति जागरूकता और कानूनी अनुशासन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

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