बिना सबूत पत्नी के चरित्र पर शक मानसिक क्रूरता... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज की पति की अपील

Harrison Masih | Aug 18, 2025, 16:04 IST
Share
CG-highcourt-wife-character-doubt-cruelty-appeal-dismissed the sootr
CG-highcourt-wife-character-doubt-cruelty-appeal-dismissed the sootr

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद में अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा है। जानिए पूरी खबर।

Raigarh divorce dispute: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक पारिवारिक विवाद मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा कि बिना सबूत के पत्नी के चरित्र पर सवाल उठाना उसके साथ मानसिक क्रूरता के समान है। कोर्ट ने पति की अपील को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया है।

ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की शासन को फटकार, सार्वजनिक परिवहन में लापरवाही पर परिवहन सचिव तलब

क्या है पूरा मामला?

रायगढ़ जिले के युवक और ओडिशा के सुंदरगढ़ की युवती का विवाह 24 जून 2012 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुआ था। इस दंपति के दो बच्चे हैं एक बेटा और एक बेटी, जो फिलहाल मां के साथ रहते हैं। साल 2018 में पत्नी दोनों बच्चों को लेकर मायके चली गई। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की और पत्नी के चरित्र पर शक जताते हुए अवैध संबंधों के आरोप लगाए।

पत्नी का पक्ष

पत्नी ने अदालत में बताया कि उसे पति और परिवार की तरफ से प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उसने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पति ने झूठे आधार पर तलाक की अर्जी दी है।

ये खबर भी पढ़ें... बिलासपुर लव मैरिज केस: शादी के बाद लापता हुई पत्नी... हाईकोर्ट ने एसपी को दिया अल्टीमेटम

हाईकोर्ट की सुनवाई और निष्कर्ष

पति ने फैमिली कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की और बच्चों की कस्टडी की भी मांग की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी के खिलाफ एक भी ठोस सबूत मौजूद नहीं है।

मोबाइल पर बातचीत को छोड़कर कोई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं था। यह साबित करने वाला कोई प्रमाण नहीं मिला कि पत्नी का विवाह के बाहर किसी से संबंध है।

हाईकोर्ट का तर्क

हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी की पवित्रता पर सवाल उठाना, बिना किसी साक्ष्य के, क्रूरता की श्रेणी में आता है। पति ने ऐसा कर पत्नी के साथ मानसिक यातना दी, जिसके चलते पत्नी का अलग रहना उचित है।
ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का NHAI को कड़ा निर्देश, आवारा मवेशियों से हादसे रोकें, पेंड्रीडीह में अतिक्रमण पर लगाम

क्या है रायगढ़ तलाक विवाद केस?

1. शादी और पारिवारिक विवाद

रायगढ़ के युवक और ओडिशा की युवती की शादी 24 जून 2012 को हुई थी। दो बच्चे हैं, जो अभी मां के साथ रह रहे हैं।

2. पति का आरोप

साल 2018 में पत्नी मायके चली गई। इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दी और पत्नी पर अवैध संबंधों का आरोप लगाया।

3. पत्नी का पक्ष

पत्नी ने अदालत में कहा कि उसे प्रताड़ित किया गया और पति के आरोप निराधार हैं।

4. सबूतों की कमी

हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी के खिलाफ एक भी ठोस सबूत नहीं है। केवल मोबाइल बातचीत का हवाला दिया गया, लेकिन किसी बाहरी संबंध का प्रमाण नहीं मिला।

5. हाईकोर्ट का फैसला

कोर्ट ने कहा कि बिना सबूत पत्नी के चरित्र पर शक करना मानसिक क्रूरता है। फैमिली कोर्ट का आदेश सही मानते हुए पति की अपील खारिज कर दी गई।

ये खबर भी पढ़ें... छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए सुनहरा मौका: कई पदों पर सीधी भर्ती के लिए प्लेसमेंट कैंप का आयोजन

हाईकोर्ट का फैसला

अदालत ने माना कि फैमिली कोर्ट का निर्णय सही था और उसमें दखल देने की कोई आवश्यकता नहीं है। नतीजतन हाईकोर्ट ने पति की अपील को खारिज कर दिया।

FAQ

  1. भारतीय कानून में चरित्र हनन को किस श्रेणी में माना जाता है?
    भारतीय कानून में पत्नी पर झूठे चरित्र आरोप लगाना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है, जो वैवाहिक संबंध को नुकसान पहुँचाता है।
  2. हाईकोर्ट ने पत्नी के चरित्र पर शक करने के मामले में क्या फैसला सुनाया?
    हाईकोर्ट ने कहा कि बिना सबूत पत्नी के चरित्र पर शक करना मानसिक क्रूरता है और पति की तलाक अपील खारिज कर दी।
  3. क्या चरित्र पर बेबुनियाद आरोप तलाक का आधार बन सकता है?
    नहीं, भारतीय कानून में बिना साक्ष्य के चरित्र पर आरोप लगाना तलाक का आधार नहीं है, बल्कि इसे पत्नी के प्रति मानसिक उत्पीड़न माना जाता है।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें

अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧

Tags:
  • छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
  • पत्नी के चरित्र पर शक
  • रायगढ़ तलाक विवाद
  • Raigarh divorce dispute
मंत्रालय में बैठक करने के बाद जबलपुर जाएंगे सीएम मोहन यादव, लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ पदयात्रा में होंगे शामिल

By Aman Vaishnav

मंत्रालय में बैठक करने के बाद जबलपुर जाएंगे सीएम मोहन यादव, लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ पदयात्रा में होंगे शामिल
अर्नब के बाद मुरासु का अटैक, एमपी में 5 नवंबर तक आंधी-बारिश का अलर्ट, CG में भी दिखेगा असर, जानें राजस्थान के हाल

By Aman Vaishnav

अर्नब के बाद मुरासु का अटैक, एमपी में 5 नवंबर तक आंधी-बारिश का अलर्ट, CG में भी दिखेगा असर, जानें राजस्थान के हाल
जबलपुर में भाजपा की बड़ी पदयात्रा, सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल दिखाएंगे ताकत, एक लाख लोगों के जुटने का दावा

By Ramanand Tiwari

जबलपुर में भाजपा की बड़ी पदयात्रा, सीएम मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल दिखाएंगे ताकत, एक लाख लोगों के जुटने का दावा
प्रखरश्री दीदी ने जज की परीक्षा पास कर छोड़ा सांसारिक मोह; पहले पूरा किया माता-पिता का सपना, अब चुना संन्यास

By Amresh Kushwaha

प्रखरश्री दीदी ने जज की परीक्षा पास कर छोड़ा सांसारिक मोह; पहले पूरा किया माता-पिता का सपना, अब चुना संन्यास
एमपी में एप्को पर आर्थिक संकट के सवाल, 8 करोड़ का अनुदान रुका तो कर्मचारियों के भविष्य पर बढ़ी चिंता

By Ramanand Tiwari

एमपी में एप्को पर आर्थिक संकट के सवाल, 8 करोड़ का अनुदान रुका तो कर्मचारियों के भविष्य पर बढ़ी चिंता
पत्नी की निजी जानकारी के लिए RTI का इस्तेमाल गलत, राजस्थान हाई कोर्ट ने बरकरार रखा तलाक

By Mukesh Sharma

पत्नी की निजी जानकारी के लिए RTI का इस्तेमाल गलत, राजस्थान हाई कोर्ट ने बरकरार रखा तलाक
मध्यप्रदेश में IAS के 68 पद खाली, 4 अफसरों को दिल्ली जाने से रोका; आखिर कब पूरी होगी अधिकारियों की कमी?

By Ramanand Tiwari

मध्यप्रदेश में IAS के 68 पद खाली, 4 अफसरों को दिल्ली जाने से रोका; आखिर कब पूरी होगी अधिकारियों की कमी?