CAG रिपोर्ट से खुली मनरेगा की पोल : EPF भुगतान में 84.59 करोड़ की देनदारी

Umeshwari Baghel | Jul 14, 2026, 21:59 IST
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CAG रिपोर्ट से मनरेगा की पोल खुली
CAG रिपोर्ट से मनरेगा की पोल खुली

CAG की रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ की मनरेगा योजना में कई खामियां सामने आई हैं। योजना निर्माण, ग्राम सभा की मंजूरी, भुगतान, निगरानी और सोशल ऑडिट में लापरवाही मिली। EPF भुगतान में 84.59 करोड़ की देनदारी और रोजगार उपलब्ध कराने में कमी का भी खुलासा हुआ है।

समझें क्या है पूरा मामला

Raipur : छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के संचालन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर कमियां सामने आई हैं। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित इस प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट को मंगलवार को विधानसभा में पेश किया गया। रिपोर्ट में योजना तैयार करने से लेकर मजदूरी भुगतान, निगरानी व्यवस्था और सामाजिक अंकेक्षण तक कई स्तरों पर व्यवस्थागत कमजोरियों का उल्लेख किया गया है।

CAG ने अपनी जांच में पाया कि मनरेगा का मूल उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को समय पर रोजगार उपलब्ध कराना और गांवों में स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। हालांकि छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर योजना के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार ग्राम स्तर पर योजना बनाने की प्रक्रिया में भी लापरवाही सामने आई है।

ग्राम सभा की मंजूरी के बिना शुरू हुए कई काम

रिपोर्ट में बताया गया कि मनरेगा के तहत कार्यों को शुरू करने से पहले ग्राम सभा की स्वीकृति जरूरी होती है। लेकिन जांच के दौरान कई पंचायतों में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। CAG ने 48 ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड की जांच की, जिसमें करीब 86 प्रतिशत कार्य ऐसे पाए गए जिन्हें ग्राम सभा की अनिवार्य मंजूरी के बिना शुरू किया गया था।

इसके अलावा श्रम बजट तैयार करने से पहले जरूरी सर्वे प्रक्रिया भी कई जगह पूरी नहीं की गई। इससे जरूरत के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराने की योजना प्रभावित हुई।

मानव संसाधन की कमी से प्रभावित हुआ काम

CAG रिपोर्ट के मुताबिक मनरेगा के बेहतर संचालन के लिए जरूरी कर्मचारियों की कमी भी बड़ी समस्या बनी रही। करीब 21 प्रतिशत मानव संसाधनों की कमी पाई गई। विशेष रूप से तकनीकी सहायक और ग्राम रोजगार सहायकों के पद खाली होने से योजना के कामों की निगरानी और गुणवत्ता जांच प्रभावित हुई।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भारी कमी रही। निर्धारित लक्ष्य की तुलना में प्रशिक्षण गतिविधियों में करीब 97 प्रतिशत तक कमी दर्ज की गई।

EPF भुगतान में गड़बड़ी, 84.59 करोड़ की देनदारी

वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी CAG ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पर्याप्त राशि उपलब्ध होने के बावजूद कई मामलों में मजदूरी भुगतान में देरी हुई। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अंशदान जमा करने में भी गंभीर लापरवाही सामने आई।

अप्रैल 2015 से मार्च 2023 के बीच करीब 29.62 करोड़ रुपये का EPF अंशदान जमा नहीं किया गया। बाद में ब्याज और जुर्माने के कारण यह देनदारी बढ़कर 84.59 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

100 दिन रोजगार का लक्ष्य पूरा करने वाले परिवार बेहद कम

मनरेगा के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक साल में 100 दिन तक रोजगार देने का प्रावधान है। लेकिन CAG की रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में परिवार इस लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए।

वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच 134.10 लाख परिवारों को रोजगार दिया गया। इनमें से 111.31 लाख परिवार यानी करीब 83 प्रतिशत परिवारों को 100 दिनों से कम रोजगार मिला। केवल 1.23 लाख परिवार ही ऐसे रहे जिन्हें पूरे 100 दिन का रोजगार मिल सका।

रिपोर्ट के अनुसार इसी अवधि में 152.36 लाख परिवारों ने रोजगार की मांग की थी, लेकिन 134.10 लाख परिवारों को ही काम मिल पाया। करीब 18.26 लाख परिवारों को रोजगार नहीं दिया जा सका। CAG ने कहा कि ऐसे मामलों में पात्र परिवारों को बेरोजगारी भत्ता भी नहीं मिला।

काम पूरे होने की रफ्तार भी धीमी

CAG की जांच में सामने आया कि मनरेगा के तहत स्वीकृत कार्यों में से अक्टूबर 2024 तक केवल 61 प्रतिशत काम ही पूरे हो सके थे। कई स्थानों पर बनाई गई परिसंपत्तियां उपयोगी स्थिति में नहीं मिलीं।

जांच के दौरान कुछ निर्माण कार्य अधूरे, खराब या अनुपयोगी पाए गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई कार्य बिना पर्याप्त योजना और ग्राम सभा की मंजूरी के शुरू किए गए।

CAG रिपोर्ट से मनरेगा की पोल खुली
CAG रिपोर्ट से मनरेगा की पोल खुली


निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था कमजोर

मनरेगा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सामाजिक अंकेक्षण यानी सोशल ऑडिट को महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन CAG ने पाया कि छत्तीसगढ़ में सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था भी अपेक्षित स्तर पर काम नहीं कर रही थी।

रिपोर्ट के अनुसार सामाजिक अंकेक्षण के लिए उपलब्ध 58.68 करोड़ रुपये में से केवल 42.55 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। सामाजिक अंकेक्षण इकाई में करीब 45 प्रतिशत पद खाली रहे।

कुछ वर्षों में 99.97 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में सामाजिक अंकेक्षण नहीं हो पाया। इसके अलावा सोशल ऑडिट में दर्ज 53 प्रतिशत से ज्यादा आपत्तियों का समाधान भी लंबित मिला।

वैधानिक समितियों की बैठकें भी नहीं हुईं

CAG ने निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि छत्तीसगढ़ ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद और राज्य स्तरीय सशक्त समिति जैसी संस्थाओं की जरूरी बैठकें नियमित रूप से नहीं हुईं।

वहीं जिला स्तर पर गुणवत्ता निगरानी प्रकोष्ठ भी कई जगह गठित नहीं किए गए। ग्राम पंचायतों में रखे जाने वाले जरूरी दस्तावेज भी अधूरे मिले या उनका सही तरीके से रिकॉर्ड नहीं रखा गया।

CAG ने दिए सुधार के सुझाव

रिपोर्ट में मनरेगा को प्रभावी बनाने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें ग्राम सभा आधारित योजना निर्माण, कर्मचारियों की उपलब्धता बढ़ाना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, वित्तीय प्रबंधन सुधारना और सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था को मजबूत करना शामिल है।

CAG ने कहा कि मनरेगा जैसी रोजगार गारंटी योजना का उद्देश्य तभी पूरा हो सकता है, जब योजना निर्माण से लेकर अंतिम भुगतान तक हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। छत्तीसगढ़ में सामने आई कमियां इसी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत की ओर इशारा करती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

रिपोर्ट अवधि: मार्च 2024 को समाप्त अवधि तक मनरेगा के क्रियान्वयन की जांच।

ऑडिट एजेंसी: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)।

ग्राम पंचायत जांच: 48 ग्राम पंचायतों के रिकॉर्ड की समीक्षा की गई।

ग्राम सभा मंजूरी: जांच किए गए कार्यों में करीब 86% काम ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना शुरू किए गए।

मानव संसाधन कमी: मनरेगा संचालन में करीब 21% कर्मचारियों की कमी पाई गई।

EPF देनदारी: 29.62 करोड़ रुपए का EPF अंशदान जमा नहीं हुआ, ब्याज और जुर्माने सहित देनदारी 84.59 करोड़ रुपए पहुंची।

रोजगार मांग: 2019-20 से 2023-24 के बीच 152.36 लाख परिवारों ने रोजगार मांगा।

रोजगार उपलब्ध: इनमें से 134.10 लाख परिवारों को ही रोजगार मिल पाया।

रोजगार से वंचित परिवार: करीब 18.26 लाख परिवारों को काम नहीं मिला।

100 दिन रोजगार: केवल 1.23 लाख परिवारों (0.92%) को पूरे 100 दिन का रोजगार मिला।

100 दिन से कम रोजगार: 111.31 लाख परिवारों (83%) को 100 दिन से कम काम मिला।

पूर्ण कार्य: स्वीकृत कार्यों में से अक्टूबर 2024 तक केवल 61% कार्य पूरे हो सके।

सामाजिक अंकेक्षण बजट: 58.68 करोड़ रुपये में से केवल 42.55 करोड़ रुपए खर्च हुए।

सोशल ऑडिट में कमी: कई वर्षों में 99.97% ग्राम पंचायतों का सामाजिक अंकेक्षण नहीं हो पाया।

लंबित आपत्तियां: सोशल ऑडिट में दर्ज 53% से अधिक आपत्तियों का निराकरण लंबित मिला।

FAQ

  1. CAG रिपोर्ट में छत्तीसगढ़ मनरेगा को लेकर क्या खामियां सामने आईं?
    CAG रिपोर्ट में योजना निर्माण, ग्राम सभा की मंजूरी, मजदूरी भुगतान, EPF जमा, निगरानी और सामाजिक अंकेक्षण व्यवस्था में कई कमियां सामने आईं।
  2. मनरेगा में EPF से जुड़ी कितनी देनदारी मिली है?
    रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2015 से मार्च 2023 के बीच 29.62 करोड़ रुपए का EPF अंशदान जमा नहीं किया गया। ब्याज और जुर्माने सहित यह देनदारी बढ़कर 84.59 करोड़ रुपये हो गई।
  3. कितने परिवारों को मनरेगा में 100 दिन का रोजगार मिला?
    2019-20 से 2023-24 के दौरान 134.10 लाख परिवारों को रोजगार मिला, लेकिन केवल 1.23 लाख परिवारों को ही पूरे 100 दिन का रोजगार मिल पाया।

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