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NEWS IN SHORT
.सरेंडर पॉलिसी पड़ी भारी
.सरेंडर करने वाले नक्सलियों को 60 करोड़ रूपए देगी सरकार
. तीन साल बाद मिलेगी इनाम की राशि
. 2937 नक्सलियों ने सरेंडर किया
.1496 नक्सलियों को इनामी राशि दी जानी है
NEWS IN DETAIL
सरेंडर पॉलिसी पर बढ़ा आर्थिक बोझ :
छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सली सरेंडर पॉलिसी अब अपने खर्च को लेकर चर्चा में है। यह मामला विधानसभा में भी उठ चुका है। राज्य में नक्सल हिंसा पर काबू पाने के मकसद से लागू की गई यह नीति सरकार के लिए महंगी साबित हो रही है।
अब तक सरेंडर करने वाले नक्सलियों में से बड़ी संख्या इनामी नक्सलियों की है, जिन पर सरकार को करोड़ों रूपए खर्च करने पड़ रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 2937 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
इनमें से 1496 नक्सली इनामी हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत इन सभी इनामी नक्सलियों को उनकी घोषित इनाम राशि दी जानी है। इन इनामी नक्सलियों को कुल मिलाकर करीब 60 करोड़ रूपए का भुगतान किया जाना है। सरकार 10 करोड़ रुपए इनको दे चुकी है।
3 साल बाद मिलेगी इनाम राशि :
सरकार ने सरेंडर पॉलिसी (Naxal Surrender Policy) का पूरा कैलेंडर तैयार किया है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को उनकी पूरी इनाम राशि तत्काल नहीं दी जाएगी। इसके लिए उनको 3 साल इंतजार करना होगा।
इस राशि को सरकार उनके बैंक खाते में जमा करेगी। जिसको वे तीन साल बाद ही निकाल पाएंगे। इन तीन साल में यह मॉनिटर किया जाएगा कि सरेंडर करने वाला नक्सली दोबारा किसी नक्सली गतिविधि में शामिल न हो और समाज की मुख्यधारा में बने रहें।
जानकार कहते हैं कि यदि सरेंडर करने वाले इनामी नक्सलियों की संख्या इसी तरह बढ़ती रही, तो भविष्य में सरकार को इस नीति के लिए अलग से बजट प्रावधान करने पड़ सकते हैं।
इन दो नक्सलियों को मिले इनाम के 5 लाख :
भीमा माड़वी - 2 लाख रुपए
कोसा उर्फ मासा 3 लाख रुपए
इन नक्सलियों की इनामी राशि प्रक्रिया में :
रामधेर 40 लाख
जैनी 8 लाख
प्रेम उर्फ उमराव 8 लाख
सोनमति 8 लाख
कारु बेड़दा 8 लाख
मैनू नेगी 8 लाख
हुंगा तामो 8 लाख
चैतू डोडी 8 लाख
लक्ष्मण कोर्राम 8 लाख
ममता उर्फ शांता 8 लाख
Sootr knowledge :
नक्सली समस्या खत्म करने के लिए सरकार ने नक्लस पुनर्वास नीति बनाई है। इस नीति के तहत हथियार छोड़कर सरेंडर करने वाले नक्सलियों को सरकार रोटी,कपड़ा और मकान दे रही है।
उनके उपर घोषित इनाम की राशि उनको दी जा रही है। इसके साथ ही उनके हथियारों की कीमत भी नक्सलियों को दी जाएगी। सरकार आत्मसमर्पित नक्सलियों का पुनर्वास कर रही है तो हथियार थामें नक्सलियों का इनकाउंटर भी किया जा रहा है।
important points :
. खर्चीली साबित हो रही नक्सली सरेंडर पॉलिसी
. सरेंडर पॉलिसी ने बढ़ाया सरकार पर आर्थिक बोझ
. अगले तीन साल में सरकार देगी इनामी राशि
. डेढ़ हजार सरेंडर नक्सलियों को देना है इनाम की राशि
अब आगे क्या :
सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सली समस्या खत्म करने की डेडलाइन तय की है। सरकार ने हथियारबंद नक्सलियों से अपील की है कि वे हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटें।
सरकार अपनी डेडलाइन के तहत ही काम कर रही है। जो हथियार नहीं छोड़ेंगे उनकी गोली का जवाब गोली से दिया जाएगा।
निष्कर्ष :
छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सली सरेंडर पॉलिसी ने नक्सलवाद को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई है। लेकिन इस नीति सरकार का आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है।
अब तक सरेंडर करने वाले नक्सलियों में बड़ी संख्या इनामी नक्सलियों के होने से सरकार पर करोड़ों रूपए खर्च करने की जिम्मेदारी आ गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि यह खर्च राज्य में स्थायी शांति और सुरक्षा के लिए जरुरी है।
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