छत्तीसगढ़ में संपत्ति की नई गाइडलाइन दरों से बदली रियल एस्टेट की तस्वीर, कारोबार में लौटा भरोसा
The Sootr | Feb 23, 2026, 18:47 IST
Impact Feature
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा संपत्ति की नई गाइडलाइन दरों में संशोधन से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता आई है, जिससे निवेशकों और किसानों को सीधा लाभ मिल रहा है।
Raipur. छत्तीसगढ़ में जमीन और मकान के कारोबार से जुड़ा बड़ा बदलाव सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने संपत्ति की गाइडलाइन दरों में बड़ा संशोधन किया है। यह संशोधन कई वर्षों बाद लागू हुआ है और इसे राज्य के रियल एस्टेट क्षेत्र में सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक माना जा रहा है।
नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बन गई है। इससे खरीदारों, किसानों, बैंकिंग संस्थाओं और रियल एस्टेट डेवलपर्स सभी को सीधा लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में वर्ष 2017-18 के बाद पहली बार गाइडलाइन दरों की व्यापक समीक्षा की गई। इस दौरान बाजार की वास्तविक स्थिति, बिक्री के आंकड़े और जमीन के वास्तविक मूल्य को ध्यान में रखकर नई दरें तय की गईं। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य साफ था कि जमीन के सरकारी मूल्यांकन और वास्तविक बाजार कीमत के बीच बने बड़े अंतर को खत्म किया जाए। अब नई व्यवस्था के लागू होने के बाद संपत्ति बाजार में स्थिरता और भरोसे का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
कई वर्षों से गाइडलाइन दरों में बड़ा संशोधन नहीं हुआ था। विगत पांच वर्षों से गाइडलाइन दरों का पुनरीक्षण नहीं होने के कारण प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में कई प्रकार की विसंगतियां उत्पन्न हो गई थीं। अब वर्ष 2025–26 की नवीन गाइडलाइन में इन विसंगतियों को दूर करते हुए दरों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। पूर्व प्रचलित गाइडलाइन में नगर पालिका क्षेत्रों में कुल 200 कंडिकाएं थीं, जिन्हें घटाकर 102 किया गया है। एक ही वार्ड में अलग-अलग कंडिकाओं और भिन्न दरों के कारण आमजन को संपत्ति के मूल्य को समझने में कठिनाई होती थी, जिसे अब सरल और स्पष्ट बनाया गया है।
आपको बता दें कि पहले विसंगति की वजह से जमीन और मकान की रजिस्ट्री में तय सरकारी कीमत और वास्तविक बाजार कीमत के बीच काफी अंतर बन गया था। यह अंतर समय के साथ बढ़ता गया और संपत्ति के लेन-देन में कई तरह की समस्याएं पैदा होने लगीं। जब किसी जमीन की रजिस्ट्री सरकारी दर पर होती थी और वास्तविक बाजार कीमत उससे बहुत अधिक होती थी, तब कई बार लेन-देन पूरी तरह पारदर्शी नहीं रह पाता था। कई मामलों में अनौपचारिक भुगतान की स्थिति बन जाती थी। इससे बाजार में भ्रम और असंतुलन की स्थिति पैदा हो गई थी।
इस व्यवस्था का असर किसानों पर भी पड़ रहा था। जब किसी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण होता था, तब मुआवजा गाइडलाइन दरों के आधार पर तय होता था। चूंकि ये दरें वास्तविक कीमत से काफी कम थीं, इसलिए किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता था। बैंकिंग क्षेत्र में भी समस्या दिखाई देती थी क्योंकि बैंक लोन के लिए जमीन का मूल्यांकन सरकारी दरों के आधार पर करते थे, जो वास्तविक कीमत से कम होता था।
समस्याओं को देखते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर राज्य सरकार ने गाइडलाइन दरों की व्यापक समीक्षा का निर्णय लिया। इस प्रक्रिया में जिलेवार जमीन बिक्री के आंकड़े, राजस्व रिकॉर्ड, बाजार से प्राप्त डेटा और जमीन की वास्तविक स्थिति का अध्ययन किया गया। कई जगहों पर ग्राउंड सर्वे भी कराया गया ताकि दरों का निर्धारण वास्तविक स्थिति के अनुसार किया जा सके।
इस विस्तृत प्रक्रिया के बाद नई गाइडलाइन दरें तय की गईं और 20 नवंबर 2025 से उन्हें लागू कर दिया गया। नई व्यवस्था में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की दरों को बाजार के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर पुरानी दरें बेहद कम थीं। इस कारण कुछ इलाकों में दरों में 100 प्रतिशत से अधिक संशोधन करना पड़ा। कुछ पिछड़े क्षेत्रों में यह संशोधन 300 प्रतिशत तक किया गया, क्योंकि वहां पुरानी दरें वास्तविक बाजार मूल्य के एक छोटे हिस्से के बराबर ही थीं। शहरी क्षेत्रों में भी दरों को बाजार के करीब लाने का प्रयास किया गया। इससे रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो गया।
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नई दरों के लागू होने के बाद कुछ जिलों के हिस्सों में दरों में बहुत अधिक वृद्धि सामने आई। खासकर रायपुर और रायगढ़ जिलों के कुछ क्षेत्रों में गाइडलाइन दरों में 400 से 500 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई। इससे स्थानीय स्तर पर चिंता और असंतोष की स्थिति पैदा हुई।
सरकार ने इस स्थिति पर तुरंत ध्यान दिया और मामले की समीक्षा कराई। इसके बाद 30 जनवरी 2026 से संशोधित राहत आदेश जारी किया गया है। इस निर्णय के तहत दरों में हुई अत्यधिक बढ़ोतरी को संतुलित किया गया और वृद्धि को औसतन 100 प्रतिशत के दायरे में स्थिर किया गया है।
इस कदम से संपत्ति खरीदने वालों का आर्थिक बोझ कम हुआ और बाजार में संतुलन वापस लौटा है। सरकार की यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सुधार लागू करते समय जनभावनाओं और व्यावहारिक स्थितियों को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है।
नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद संपत्ति बाजार में सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है। जमीन और मकान की कीमतों में जो अनियंत्रित बढ़ोतरी पिछले कुछ वर्षों से देखी जा रही थी, उस पर अब काफी हद तक नियंत्रण आया है। रजिस्ट्री मूल्य और बाजार मूल्य के बीच अंतर कम होने से खरीदारों के लिए लेन-देन अधिक स्पष्ट और आसान हो गया है। इससे संपत्ति खरीदने के इच्छुक लोगों का भरोसा भी बढ़ा है।
रियल एस्टेट से जुड़े संगठनों के अनुसार, नई दरों के लागू होने के बाद राज्य में प्लॉट और हाउसिंग यूनिट्स की मांग में 12 से 17 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत है कि बाजार में निवेश और खरीदारी का माहौल फिर से सक्रिय हो रहा है।
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नई गाइडलाइन दरों का सबसे बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा। पहले जमीन अधिग्रहण के दौरान जो मुआवजा तय होता था, वह अक्सर वास्तविक बाजार कीमत से काफी कम होता था। इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। अब गाइडलाइन दरें बाजार के करीब आ गई हैं, इसलिए भविष्य में होने वाले भूमि अधिग्रहण में किसानों को बेहतर मुआवजा मिलने की संभावना बढ़ गई है।
राजस्व और अधिग्रहण विभाग के प्रारंभिक आकलन बताते हैं कि नई दरों के बाद जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा औसतन 25 से 40 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
नई व्यवस्था का असर बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ा है। पहले जब बैंक किसी संपत्ति के आधार पर लोन देते थे, तब गाइडलाइन दरों के कारण जमीन का मूल्यांकन वास्तविक कीमत से कम दिखाई देता था। इससे कई मामलों में ऋण स्वीकृति में कठिनाई आती थी। नई दरों के लागू होने के बाद बैंक अब संपत्ति का मूल्यांकन अधिक सटीक तरीके से कर पा रहे हैं। इससे होम लोन और प्रॉपर्टी लोन की प्रक्रिया भी आसान हुई है।
वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन लागू होने के बाद राज्य में होम लोन स्वीकृतियों में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोग अब अधिक विश्वास के साथ संपत्ति में निवेश कर रहे हैं।
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रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए भी गाइडलाइन दरों का संतुलित होना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। किसी भी आवासीय परियोजना की योजना, लागत निर्धारण और वित्तीय व्यवस्था इन्हीं दरों पर आधारित होती है। जब सरकारी दरें बाजार से बहुत अलग होती हैं, तब परियोजनाओं की योजना बनाना कठिन हो जाता है। नई गाइडलाइन दरों ने इस समस्या को काफी हद तक दूर कर दिया है।
संतुलित दरों के कारण अब परियोजनाओं की वित्तीय योजना बनाना आसान हुआ है। बैंक फंडिंग और गारंटी की प्रक्रिया भी सरल हो गई है। इसका असर यह हुआ है कि राज्य में नई कॉलोनियों और टाउनशिप योजनाओं को गति मिल रही है।
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नई गाइडलाइन दरों के लागू होने के बाद जमीन और मकान की रजिस्ट्री प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और व्यावहारिक बन गई है। इससे खरीदारों, किसानों, बैंकिंग संस्थाओं और रियल एस्टेट डेवलपर्स सभी को सीधा लाभ मिल रहा है।
प्रदेश में वर्ष 2017-18 के बाद पहली बार गाइडलाइन दरों की व्यापक समीक्षा की गई। इस दौरान बाजार की वास्तविक स्थिति, बिक्री के आंकड़े और जमीन के वास्तविक मूल्य को ध्यान में रखकर नई दरें तय की गईं। इसके पीछे सरकार का उद्देश्य साफ था कि जमीन के सरकारी मूल्यांकन और वास्तविक बाजार कीमत के बीच बने बड़े अंतर को खत्म किया जाए। अब नई व्यवस्था के लागू होने के बाद संपत्ति बाजार में स्थिरता और भरोसे का माहौल बनता दिखाई दे रहा है।
वर्षों पुरानी व्यवस्था से समस्या
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हर वर्ग होता था परेशान
इस व्यवस्था का असर किसानों पर भी पड़ रहा था। जब किसी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण होता था, तब मुआवजा गाइडलाइन दरों के आधार पर तय होता था। चूंकि ये दरें वास्तविक कीमत से काफी कम थीं, इसलिए किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिल पाता था। बैंकिंग क्षेत्र में भी समस्या दिखाई देती थी क्योंकि बैंक लोन के लिए जमीन का मूल्यांकन सरकारी दरों के आधार पर करते थे, जो वास्तविक कीमत से कम होता था।
अब वैज्ञानिक सर्वे से तय हुईं नई दरें
इस विस्तृत प्रक्रिया के बाद नई गाइडलाइन दरें तय की गईं और 20 नवंबर 2025 से उन्हें लागू कर दिया गया। नई व्यवस्था में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों की दरों को बाजार के अनुरूप बनाने का प्रयास किया गया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगहों पर पुरानी दरें बेहद कम थीं। इस कारण कुछ इलाकों में दरों में 100 प्रतिशत से अधिक संशोधन करना पड़ा। कुछ पिछड़े क्षेत्रों में यह संशोधन 300 प्रतिशत तक किया गया, क्योंकि वहां पुरानी दरें वास्तविक बाजार मूल्य के एक छोटे हिस्से के बराबर ही थीं। शहरी क्षेत्रों में भी दरों को बाजार के करीब लाने का प्रयास किया गया। इससे रजिस्ट्री मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच का अंतर काफी हद तक कम हो गया।
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ज्यादा बढ़ोतरी पर सरकार ने दी राहत
सरकार ने इस स्थिति पर तुरंत ध्यान दिया और मामले की समीक्षा कराई। इसके बाद 30 जनवरी 2026 से संशोधित राहत आदेश जारी किया गया है। इस निर्णय के तहत दरों में हुई अत्यधिक बढ़ोतरी को संतुलित किया गया और वृद्धि को औसतन 100 प्रतिशत के दायरे में स्थिर किया गया है।
इस कदम से संपत्ति खरीदने वालों का आर्थिक बोझ कम हुआ और बाजार में संतुलन वापस लौटा है। सरकार की यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि सुधार लागू करते समय जनभावनाओं और व्यावहारिक स्थितियों को भी बराबर महत्व दिया जा रहा है।
प्रॉपर्टी बाजार में लौटा भरोसा
रियल एस्टेट से जुड़े संगठनों के अनुसार, नई दरों के लागू होने के बाद राज्य में प्लॉट और हाउसिंग यूनिट्स की मांग में 12 से 17 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। यह संकेत है कि बाजार में निवेश और खरीदारी का माहौल फिर से सक्रिय हो रहा है।
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किसानों को मिलेगा बेहतर मुआवजा
राजस्व और अधिग्रहण विभाग के प्रारंभिक आकलन बताते हैं कि नई दरों के बाद जमीन अधिग्रहण के मामलों में मुआवजा औसतन 25 से 40 प्रतिशत तक अधिक हो सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
बैंक लोन की प्रक्रिया हुई आसान
वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, संशोधन लागू होने के बाद राज्य में होम लोन स्वीकृतियों में लगभग 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे यह स्पष्ट होता है कि लोग अब अधिक विश्वास के साथ संपत्ति में निवेश कर रहे हैं।
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नई आवासीय परियोजनाओं को मिली गति
संतुलित दरों के कारण अब परियोजनाओं की वित्तीय योजना बनाना आसान हुआ है। बैंक फंडिंग और गारंटी की प्रक्रिया भी सरल हो गई है। इसका असर यह हुआ है कि राज्य में नई कॉलोनियों और टाउनशिप योजनाओं को गति मिल रही है।
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