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NEWS IN SHORT
.छत्तीसगढ़ में राम वन गमन पथ पर फिर तेज हुई सियासत
.पूर्ववर्ती भूपेश सरकार पर राम के नाम पर लूट के आरोप
.विधानसभा की कमेटी करेगी जांच, इसमें कांग्रेस विधायक भी शामिल
.भूपेश सरकार ने 81 करोड़ के काम दो कंपनियों को दिए
.एक एजेंसी को दो ईवेंट के 13 करोड़ का भुगतान किया
NEWS IN DETAIL
Raipur. छत्तीसगढ़ में एक बार फिर राम के नाम पर सियासत तेज हो गई है। सत्ता में आते ही विष्णुदेव सरकार ने ये घोषणा की थी कि राम के नाम पर भूपेश सरकार में करोड़ों के खर्च की जांच कराई जाएगी। भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने ये आरोप लगाया था कि राम वन गमन पथ के विकास के नाम पर पैसों की बंदरबांट की गई है। इसकी जांच कराने के लिए विधानसभा ने एक कमेटी बनाई। इसकी अध्यक्षता अजय चंद्राकर को सौंपी गई।
इस कमेटी में कांग्रेस के विधायक राघवेंद्र सिंह भी शामिल हैं। कमेटी की न अभी कोई बैठक हुई है और न ही जांच शुरु हो पाई है। लेकिन द सूत्र ने भूपेश सरकार के समय राम वन गमन पथ पर खर्च की गई राशि की पूरी पड़ताल की। आइए आपको बताते हैं कि राम के नाम पर भूपेश सरकार ने कहां कितना खर्च किया और क्यों उठ रहे हैं इस खर्च पर सवाल।
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राम वन गमन पथ पर 81 करोड़ खर्च :
राम हमेशा देश की राजनीति के केंद्र में ही रहे हैं। भाजपा की सियासत हमेशा राम के इर्द गिर्द ही घूमती रही है। पार्टी को इसका सियासी फायदा भी मिलता रहा है। अपने राजनीतिक नुकसान से डरी कांग्रेस भी राम की खुलकर बातें करने लगी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत कांग्रेस के संसदीय दल के अध्योध्या में रामलला के दर्शन करने जाने की अटकलें लग रही हैं।
वहीं भाजपा मनरेगा को जीरामजी कर कांग्रेस को राम विरोधी बता रही है। ये तो देश की बातें हैं लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि छत्तीसगढ़ में राम के नाम पर कितनी लूट हुई है। लूट इसलिए क्योंकि इसका काम भूपेश सरकार ने चहेती एजेंसियों को दिया। भाजपा राम वनगमन पथ पर कांग्रेस सरकार के दौरान किए गए कामों को लूट बता रही है। छत्तीसगढ़ में वनवास के दौरान भगवान राम ने लंबा वक्त बिताया है। छत्तीसगढ़ में ही राम का ननिहाल भी है। राम के नाम का यह दोहरा पुण्य छत्तीसगढ़ के हिस्से में आया है। वनवास के दौरान जहां जहां राम के चरण पड़े वो राम वन गमन पथ कहलाता है।
भूपेश बघेल की सरकार ने राम वन गमन पथ पर 81 करोड़ खर्च किए। बाकी इसके आयोजनों पर भी खूब खर्च किया गया। छत्तीसगढ़ में ऐसे दस स्थानों को चिन्हित किया गया जहां से श्रीराम गुजरे थे। इन स्थानों के विकास पर ही यह पैसा खर्च किया गया। लेकिन कांग्रेस सरकार के पांच साल में राम का काम आधा अधूरा ही हो पाया। राम के वनवास के नाम पर दो एजेंसियां मालामाल हो गईं। राम के नाम पर इन एजेंसियों ने 71 करोड़ रुपए कमा लिए। यहीं से राम नाम पर हुए खर्च पर सवाल उठने लगे।
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पांच करोड़ की सिर्फ राम की प्रतिमाएं :
भाजपा कहती है कि कांग्रेस सरकार में मूर्ति घोटाला हुआ है। मूर्तियों के नाम पर काम करने वाली एजेंसियों ने अपनी जेब भरने का काम किया है। राम की मूर्तियां मानक स्तर की नहीं हैं। कांग्रेस सरकार में आस्था के साथ खिलवाड़ किया गया है और मोटी कमाई भी की गई है। कांग्रेस ने राम वन गमन पथ के विकास में सात स्थानों पर राम,लक्ष्मण और शबरी की प्रतिमाएं लगाई गईं। इन प्रतिमाओं पर पांच करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च की गई।
इन स्थानों पर इतनी लागत की प्रतिमाएं:
चंद्रखुरी _ श्रीराम की 51 फीट की प्रतिमा _ 69 लाख रुपए
शिबरीनारायण _ श्रीराम की प्रतिमा _ 74 लाख रुपए
_ श्रीराम,लक्ष्मण और माता शिबरी की प्रतिमा _ 15 लाख रुपए
चंपारण _ श्रीराम की प्रतिमा _ 60 लाख रुपए
मुकुंदपुर _ श्रीराम की प्रतिमा _ 56 लाख रुपए
_ सप्तरिषियों की प्रतिमा _ 34 लाख रुपए
सीतामढ़ी हरचौका _ श्रीराम की प्रतिमा _ 71 लाख रुपए
राजिम _ श्रीराम की प्रतिमा_ 71 लाख रुपए
रामगढ़ _ श्रीराम की प्रतिमा _ 71 लाख रुपए
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इन एजेंसियों को मिला इतना काम :
टीसीआईएल _ 35.31 करोड़
वॉप्कोस _ 36.82 करोड़
कुल 81 करोड़ में से 71 करोड़ इन दो एजेंसियों को
टीसीआईएल ने किए ये काम :
_ चंद्रखुरी, शिबरीनारायण,मुकुंदपुर और चंपारण में श्रीराम की प्रतिमा स्थापित कीं।
चंद्रखुरी : चंद्रखुरी भगवान राम का ननिहाल है। यह राम की माता कौशिल्या का मायका है। यहां पर इस एजेंसी द्वारा ये काम किए गए। भगवान राम की प्रतिमा, एलईडी ब्रांडिग, कियोस्क, पर्यटन सूचना केंद्र,कैफेटेरिया,स्टेज, पार्किंग स्थल डेवलपमेंट,एप्रोज रोड, बाउंड्री वॉल, रिटेनिंग वॉल, मॉड्यूलर शॉप, टॉयलेट, यज्ञशाला और ओवरहेड टैंक
शिबरीनारायण : यहां पर भगवान राम को शिबरी ने जूठे बेर खिलाए थे। यहां पर मुख्य प्रवेश द्वार, छोटा प्रवेश द्वार, सीसीटीवी कैमरा, दीप स्तंभ, एलईडी ब्रांडिंग, भगवान राम की मूर्ति, घाट विकास और बाउंड्री वॉल।
सिहावा : यज्ञशाला, सप्तरिषी प्लेटफॉर्म,ओवरहेड वॉटर टैंक, कॉटेज निर्माण,दीप स्तंभ, सीसीटीवी, इलेक्ट्रीफिकेशन
वॉप्कोस ने किए ये काम :
_ सीतामढ़ी_हरचौका,राजिम और रामगढ़ में श्रीराम की प्रतिमाएं स्थापित कीं।
राजिम : लोमश रिषी आश्रम, लैंडस्केपिंग, पर्यटन सूचना केंद्र, घाट वॉकवे डेपलवमेंट,एलईडी ब्रांडिंग,इलेक्ट्रीफिकेशन,पार्किंग, इंटरनल प्लंबिंग
एक साल में स्प्रिंग बाक्स ने सरकार से कमाए 13 करोड़ :
साल 2022 में ही राम वन गमन पथ के तहत हुए कुछ विकास कार्यों का तत्कालीन सरकार ने लोकार्पण समारोह आयोजित किया। यह समारोह शिबरीनारायण में हुआ। शिबरीनारायण वो स्थान है जहां पर भगवान श्रीराम ने शिबरी के हाथों बेर खाए थे। इस काम का जिम्मा भी स्प्रिंग बाक्स प्रायवेट लिमिटेड एजेंसी को ही मिला।
सरकारी बड़े कार्यक्रमों में आमतौर 40_50 लाख रुपए का खर्च दिखाया जाता है हालांकि असली लागत कुछ और ही होती है। लेकिन यहां भी सरकार ने इस एजेंसी को दिल खोलकर पैसा दिया। सरकार ने स्प्रिंग बॉक्स को 4 करोड़ 69 लाख 55 हजार 273 रुपए का पेमेंट किया। वहीं इस एजेंसी को आदिवासियों का नृत्य आयोजित कराने के लिए सरकार ने पूरे 8 करोड़ 8 लाख 80 हजार 663 रुपयों का भुगतान किया।
यानी एक साल में इस एजेंसी ने महज दो इवेंट कर सरकार से 13 करोड़ रुपए कमा लिए। यह एजेंसी कांग्रेस के करीबी नेता के परिवार की मानी जाती है। इसके डायरेक्टर शाहनाज किदवई, यास्मीन किदवई और अतुल गुप्ता है
अजय चंद्राकर कमेटी करेगी जांच :
सरकार ने इन सभी कामों की जांच के लिए अजय चंद्राकर की अध्यक्षता में सात सदस्यों की कमेटी गठित की है। यह कमेटी हर स्थान का फिजिकल वैरीफिकेशन करेगी।
ये है अजय चंद्राकर कमेटी :
अजय चंद्राकर _ अध्यक्ष
सदस्य _ राघवेंद्र कुमार सिंह विधायक
डॉ एलएस निगम _ वरिष्ठ इतिहासकार
पीसी पारिख _ उप संचालक,पुरातत्व संचालनालय
प्रभात कुमार _ पुरातत्ववेत्ता
एसके टीकाम_जल संसाधन विभाग
शशांक सिंह _ जल संसाधन विभाग
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Sootr Knowledge :
राम वनगमन पथ उसको कहते हैं जहां जहां से भगवान राम गुजरे हैं। यह रामपथ अयोध्या से लेकर श्रीलंका तक जाता है। अलग अलग राज्यों में रामपथ का निर्माण किया जा रहा है। उत्तरप्रदेश के साथ ही भगवान राम मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा समय तक रहे हैं। यहां पर जगह जगह भगवान राम के गुजरने के निशान मिलते हैं।
मध्यप्रदेश के चित्रकूट में राम ने मंदाकिनी नदी के किनारे कुटिया बनाकर निवास किया तो छत्तीसगढ़ में शबरी को दर्शन दिए, दंडकारण्य में राक्षसों का संहार किया और यहीं से दक्षिण दिशा की ओर रवाना हुए। इन सभी स्थानों को रामपथ का नाम दिया गया है।
Important Points :
. राम वन गमन पथ पर सियासत
. भूपेश सरकार ने 81 करोड़ खर्च किए
. 81 करोड़ में से 71 करोड़ का काम टीसीआईएल और वाप्कोस को दिया
. स्प्रिंग बाक्स ने दो ईवेंट में 13 करोड़ कमाए
. भूपेश सरकार पर चहेती एजेंसियों को काम देने का आरोप
अब आगे क्या :
भाजपा ने आरोप लगाया है कि योजना के तहत निर्माण कार्यों में भारी अनियमितताए हुईं, जिनमें से कुछ एजेंसियों को भुगतान पहले ही कर दिया गया था, जबकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता का निरीक्षण नहीं किया गया। भाजपा नेताओं का कहना है कि जिन कंपनियों को काम सौंपा गया था, वे कांग्रेस नेताओं के करीबियों से ताल्लुक रखती थीं और इन कंपनियों ने पेटी कांट्रैक्ट के जरिए काम कराया, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हुई।
राम वन गमन पथ योजना के तहत विभिन्न स्थानों पर भगवान राम की मूर्तियों का निर्माण कराया गया था। इन मूर्तियों को लेकर बीजेपी नेताओं आरोप लगाए कि इन्हें विकृत तरीके से तैयार किया गया है। विशेष रूप से चंद्रखुरी और शिवरीनारायण में बनाई गई मूर्तियों के बारे में कहा गया कि ये भगवान राम जैसी नहीं दिखतीं। इन मूर्तियों की कीमत भी अलग-अलग बताई गई है, जिससे और भी सवाल उठे हैं।
इन सभी बिंदुओं पर विधानसभा की कमेटी जांच करेगी। इन सभी कामों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा। भूपेश बघेल का कहना है कि सरकार हर मोर्चे पर असफल है इसलिए निराधार आरोप लगाकर असल मुद्दों से ध्यान भटका रही है।
निष्कर्ष :
विधानसभा की कमेटी के अभी तक जांच शुरु नहीं करने से तो यह जाहिर होता है कि राम वनगमन पथ पर अभी सिर्फ बातें ही हो रही हैं। यहअलग बात है कि भूपेश बघेल की सरकार में कुछ कंपनियों को ही उपकृत किया गया जिससे सवाल उठना लाजिमी है। बहरहाल राम को राजनीतिक दलों ने धर्म के साथ राजनीति का विषय भी बना लिया है।
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