प्रधानमंत्री आवास योजना में छत्तीसगढ़ ने रचा कीर्तिमान, हर दिन बन रहे देश में सबसे ज्यादा घर
The Sootr | Feb 24, 2026, 14:48 IST
Impact Feature
छत्तीसगढ़ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में मात्र 10 माह में 5 लाख घर बनाकर देश में रिकॉर्ड कायम किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य आवास निर्माण में अग्रणी बना है।
Raipur. प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ ने देश में नया रिकॉर्ड बनाया है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में राज्य ने मात्र 10 माह और 4 दिन में पांच लाख प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूरा कर लिया है। किसी भी राज्य द्वारा एक वित्तीय वर्ष में इतने बड़े पैमाने पर आवास निर्माण का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस उपलब्धि के साथ छत्तीसगढ़ प्रतिदिन बनने वाले आवासों की संख्या के मामले में भी देश में सबसे आगे निकल गया है।
यह सफलता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने शुरुआत से ही स्पष्ट लक्ष्य तय किए और उन्हें पूरा करने के लिए जिला स्तर तक सघन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई।
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर राज्य सरकार ने शुरुआत में ही बड़ा फैसला लिया था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में हुई कैबिनेट की पहली बैठक में 18 लाख आवासों की स्वीकृति का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया था।
इस निर्णय के बाद राज्य के सभी जिलों को लक्ष्य देकर काम शुरू किया गया। प्रशासनिक स्तर पर योजना की नियमित समीक्षा की गई और निर्माण कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखी गई। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि राज्य ने इतनी कम अवधि में 5 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य हासिल कर लिया।
इस दौरान मानसून जैसी प्राकृतिक चुनौतियां भी सामने आईं, इसके बावजूद निर्माण कार्य की गति बनी रही। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में औसतन प्रतिदिन 1600 से अधिक आवासों का निर्माण किया गया।
इस उपलब्धि के पीछे जिलों की सक्रिय भागीदारी भी एक बड़ी वजह रही है। कई जिलों ने आवास निर्माण में उल्लेखनीय प्रदर्शन किया और निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर काम किया।
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 और रायगढ़ में 26 हजार 707 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूरा किया गया है। इन जिलों ने पूरे राज्य में आवास निर्माण की रफ्तार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनपद पंचायत स्तर पर भी कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय काम किया है। मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली और जैजैपुर जनपद पंचायतों में 7 हजार 500 से अधिक आवासों का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
आवास निर्माण के साथ राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दिया है। इस योजना में बड़ी संख्या में महिला स्व-सहायता समूहों को जोड़ा गया है।
इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ (CLF) बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति शुरू की है। इससे उन्हें रोजगार मिला और गाँवों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
इस पहल का परिणाम यह हुआ कि 8 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। आवास निर्माण से जुड़ी यह व्यवस्था ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बनती जा रही है।
प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को निर्माण कार्य में कुशल बनाने के लिए साय सरकार ने प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू किए हैं। इसके तहत लोगों को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में आरसेटी (RSETI) के माध्यम से 6 हजार से अधिक हितग्राहियों को प्रशिक्षण दिया गया है। इनमें 960 से अधिक महिलाएं और 292 से अधिक आत्मसमर्पित नक्सली शामिल हैं।
इस पहल से दोहरा लाभ मिला है। एक तरफ लोगों को रोजगार से जुड़ा कौशल मिल रहा है, तो दूसरी तरफ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
सरकार ने केवल घर बनाने तक ही योजना को सीमित नहीं रखा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों की निजी भूमि पर महात्मा गांधी नरेगा के तहत आजीविका बढ़ाने के लिए भी कार्य स्वीकृत किए गए हैं। प्रदेश में इस समय 10 हजार से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण चल रहा है। इन डबरियों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे और कृषि कार्य में भी मदद मिलेगी।
सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत कुंवरपुर में रहने वाली भुइरी बाई प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित होने वाली हितग्राहियों में से एक हैं।
भुइरी बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे घर में रहता था। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकता था और दीवारें कमजोर हो जाती थीं। ऐसे में सुरक्षित घर का सपना उनके लिए बहुत दूर लगता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके पति काशीराम के नाम पक्का घर स्वीकृत हुआ। उन्होंने मिलकर घर बनाने का काम शुरू किया, लेकिन निर्माण के दौरान उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद भी शासन की सहायता से घर बनकर तैयार हुआ। आज भुइरी बाई उसी पक्के घर में सुरक्षित और सम्मान के साथ जीवन जी रही हैं।
बलरामपुर जिले के ग्राम पंचायत बादा के निवासी धरमपाल का परिवार भी इस योजना से लाभान्वित हुआ है। उनका जीवन लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में बीता।
धरमपाल के पिता रामसाय गांव के पटेल थे और खेती से परिवार का भरण-पोषण करते थे। माओवादी हिंसा की घटना में उनके पिता की हत्या हो गई, जिसके बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट आ गया। परिवार कई वर्षों तक मिट्टी और खपरैल से बने जर्जर घर में रहता रहा। बारिश और मौसम के बदलाव के समय असुरक्षा बनी रहती थी।
वर्ष 2024-25 में नक्सल पीड़ित परिवारों को प्राथमिकता देते हुए धरमपाल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर स्वीकृत हुआ। घर बनकर तैयार होने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है। धरमपाल का कहना है कि पक्का मकान मिलने से उनके जीवन में स्थिरता आई है और अब वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करते हैं।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही है। यह योजना केवल एक घर उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार देती है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। इस दिशा में प्रशासनिक टीम, जिला अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
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यह सफलता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व, प्रशासनिक समन्वय और जमीनी स्तर पर लगातार किए गए प्रयासों का परिणाम है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सरकार ने शुरुआत से ही स्पष्ट लक्ष्य तय किए और उन्हें पूरा करने के लिए जिला स्तर तक सघन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई।
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पहली कैबिनेट बैठक में लिया गया बड़ा निर्णय
इस निर्णय के बाद राज्य के सभी जिलों को लक्ष्य देकर काम शुरू किया गया। प्रशासनिक स्तर पर योजना की नियमित समीक्षा की गई और निर्माण कार्य की प्रगति पर लगातार नजर रखी गई। इसी समन्वित प्रयास का परिणाम है कि राज्य ने इतनी कम अवधि में 5 लाख आवास निर्माण का लक्ष्य हासिल कर लिया।
इस दौरान मानसून जैसी प्राकृतिक चुनौतियां भी सामने आईं, इसके बावजूद निर्माण कार्य की गति बनी रही। आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में औसतन प्रतिदिन 1600 से अधिक आवासों का निर्माण किया गया।
जिलों की प्रतिस्पर्धा से मिली गति
आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में बिलासपुर जिले में 29 हजार 235, महासमुंद में 27 हजार 224, बलरामपुर में 27 हजार 12, कोरबा में 26 हजार 839 और रायगढ़ में 26 हजार 707 प्रधानमंत्री आवासों का निर्माण पूरा किया गया है। इन जिलों ने पूरे राज्य में आवास निर्माण की रफ्तार को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनपद पंचायत स्तर पर भी कई क्षेत्रों ने उल्लेखनीय काम किया है। मस्तूरी, आरंग, डभरा, बिल्हा, पाली और जैजैपुर जनपद पंचायतों में 7 हजार 500 से अधिक आवासों का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया गया।
महिलाओं के लिए बना आजीविका का अवसर
इन समूहों से जुड़ी हजारों महिलाओं ने सीएलएफ (CLF) बैंक से ऋण लेकर निर्माण सामग्री की आपूर्ति शुरू की है। इससे उन्हें रोजगार मिला और गाँवों में आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं।
इस पहल का परिणाम यह हुआ कि 8 हजार से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। आवास निर्माण से जुड़ी यह व्यवस्था ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बनती जा रही है।
राजमिस्त्री प्रशिक्षण से बढ़ी कौशल क्षमता
इस पहल से दोहरा लाभ मिला है। एक तरफ लोगों को रोजगार से जुड़ा कौशल मिल रहा है, तो दूसरी तरफ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर भी मिल रहा है।
आवास के साथ आजीविका के साधन
भुइरी बाई के जीवन में आया बदलाव
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भुइरी बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे घर में रहता था। बारिश के मौसम में घर की छत से पानी टपकता था और दीवारें कमजोर हो जाती थीं। ऐसे में सुरक्षित घर का सपना उनके लिए बहुत दूर लगता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत उनके पति काशीराम के नाम पक्का घर स्वीकृत हुआ। उन्होंने मिलकर घर बनाने का काम शुरू किया, लेकिन निर्माण के दौरान उनके पति का निधन हो गया। इसके बाद भी शासन की सहायता से घर बनकर तैयार हुआ। आज भुइरी बाई उसी पक्के घर में सुरक्षित और सम्मान के साथ जीवन जी रही हैं।
धरमपाल के परिवार को मिला सुरक्षित घर
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धरमपाल के पिता रामसाय गांव के पटेल थे और खेती से परिवार का भरण-पोषण करते थे। माओवादी हिंसा की घटना में उनके पिता की हत्या हो गई, जिसके बाद परिवार पर आर्थिक और मानसिक संकट आ गया। परिवार कई वर्षों तक मिट्टी और खपरैल से बने जर्जर घर में रहता रहा। बारिश और मौसम के बदलाव के समय असुरक्षा बनी रहती थी।
वर्ष 2024-25 में नक्सल पीड़ित परिवारों को प्राथमिकता देते हुए धरमपाल को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर स्वीकृत हुआ। घर बनकर तैयार होने के बाद अब उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में रह रहा है। धरमपाल का कहना है कि पक्का मकान मिलने से उनके जीवन में स्थिरता आई है और अब वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त महसूस करते हैं।
गरीब परिवारों के सम्मान का आधार
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के घर से वंचित न रहे। इस दिशा में प्रशासनिक टीम, जिला अधिकारियों और मैदानी कर्मचारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है।
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