छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम लागू, जबरन मतांतरण पर 10 साल तक जेल
Umeshwari Baghel | Jul 16, 2026, 11:43 IST
धर्मांतरण कानून अब सख्त सजा तय
छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 लागू हो गया है। जबरन, लालच या धोखे से मतांतरण कराने पर 10 साल तक की सजा और 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। सामूहिक मतांतरण के मामलों में उम्रकैद और 25 लाख रुपए तक जुर्माने की व्यवस्था की गई है।
समझें क्या है पूरा मामला
इस कानून का उद्देश्य धार्मिक स्वतंत्रता बनाए रखने के साथ जबरन या अवैध तरीके से कराए जाने वाले मतांतरण पर रोक लगाना बताया गया है। अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने वाले लोगों के लिए कठोर सजा और आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।
जबरन मतांतरण पर 7 से 10 साल तक की सजा
यदि मतांतरण का शिकार व्यक्ति महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अथवा अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित है तो मामले में सजा और अधिक कठोर हो जाएगी। ऐसे मामलों में दोषियों को 10 साल से 20 साल तक कारावास दिया जा सकता है।
सामूहिक मतांतरण पर उम्रकैद तक का प्रावधान
सरकार का मानना है कि सामूहिक मतांतरण के पीछे संगठित गतिविधियों की संभावना को देखते हुए इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
धर्म परिवर्तन से पहले देनी होगी 60 दिन पहले सूचना
प्रशासन इस सूचना के आधार पर प्रक्रिया की जांच करेगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि धर्म परिवर्तन किसी दबाव, लालच या धोखे के कारण तो नहीं हो रहा है।
मतांतरण के उद्देश्य से हुई शादी हो सकती है रद्द
हर जिले में बनेंगी विशेष अदालतें
महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा पर जोर
विशेषज्ञों के अनुसार नए कानून में सजा के प्रावधानों को कठोर बनाकर अवैध मतांतरण गतिविधियों पर नियंत्रण की कोशिश की गई है। वहीं कानून के पालन के दौरान व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों के संतुलन को बनाए रखना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
छत्तीसगढ़ में इस नए अधिनियम के लागू होने के बाद अब मतांतरण से जुड़े मामलों में पुलिस और प्रशासन को स्पष्ट कानूनी आधार मिलेगा। आने वाले समय में इसके प्रभाव और क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।
IMP FACTS
राज्य: छत्तीसगढ़
अपराध: बल, प्रलोभन, धोखे या दबाव से मतांतरण
सामान्य मामले में सजा: 7 से 10 साल जेल
जुर्माना: न्यूनतम 5 लाख रुपए
महिला/नाबालिग/SC/ST/OBC पीड़ित होने पर: 10 से 20 साल जेल
सामूहिक मतांतरण: उम्रकैद तक सजा
सामूहिक मतांतरण जुर्माना: 25 लाख रुपए तक
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन: 60 दिन पहले कलेक्टर को सूचना जरूरी
धर्म परिवर्तन के उद्देश्य से विवाह: शून्य घोषित किया जा सकता है
हर जिले में: विशेष अदालतों का प्रावधान
केस निपटारा लक्ष्य: 6 महीने
FAQ
- छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026 कब लागू हुआ?
यह कानून 10 जुलाई 2026 से पूरे छत्तीसगढ़ में लागू किया गया है। इसका उद्देश्य जबरन, धोखे या प्रलोभन से होने वाले मतांतरण पर रोक लगाना है। - जबरन मतांतरण पर कितनी सजा का प्रावधान है?
बल, दबाव, लालच या धोखे से मतांतरण कराने पर 7 से 10 साल तक जेल और न्यूनतम 5 लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान है। - धर्म परिवर्तन करने से पहले क्या सूचना देनी होगी?
स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला कलेक्टर को सूचना देना अनिवार्य होगा। प्रशासन इसकी जांच करेगा।
यह खबरें भी पढ़े...
धर्म स्वातंत्र्य कानून के तहत राज्य में पहली सजा, युवती की जान लेने वाली ईश्वरी साहू को उम्रकैद
बजरंग दल ने पादरी को किया पुलिस के हवाले, मतांतरण पर हंगामा
विधायक कॉलोनी बनाने नकटी गांव पर प्रशासन का एक्शन, 1600 लोग बेघर
मध्य प्रदेश में 1 अक्टूबर से राशन दुकानें बंद, राशन विक्रेता संघ ने 5 मांगों पर दी चेतावनी
By Sandeep Kumar
IAS आशीष टिकरिहा को जनसंपर्क संचालक का अतिरिक्त प्रभार, वेयर हाउसिंग कॉरपोरेशन के प्रबंध संचालक की जिम्मेदारी भी रहेगी
By VINAY VERMA
राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, तलाक के बाद पासपोर्ट पर पिता के नाम की कोई जरूरत नहीं
By Ashish Bhardwaj
पाटन चुनाव याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, भूपेश बघेल की आपत्ति पर पहले छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
By Arun Tiwari
भोपाल की सेज यूनिवर्सिटी में छात्रों का हंगामा: हॉस्टल मेस के खाने में कीड़े मिलने का आरोप, अब खाद्य विभाग करेगा जांच
By Jitendra Shrivastava
UPI एमडीआर पर सुप्रीम कोर्ट का रोक से इनकार: 15 अक्टूबर से दुकानदारों को देना होगा 0.4 फीसदी चार्ज
By Sanjay Dhiman
अस्पताल का लैब बोतलों में भ्रूण : कोरबा के लाइफ केयर हॉस्पिटल में कौन सा खेल? कोर्ट को भी नहीं मिला जवाब
By VINAY VERMA