छत्तीसगढ़ में बस्तर फाइटर्स: नक्सलवाद के खिलाफ राज्य की नई पहल
VINAY VERMA | Feb 14, 2026, 24:05 IST
Photograph: (the sootr)
छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सलवाद समाप्त करने के लिए बस्तर में स्थानीय जवानों की भर्ती की शुरुआत की है। इसके तहत, बस्तर फाइटर्स को विशेष प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।
RAIPUR. छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य से नक्सलवाद को समाप्त करने के लिए 31 मार्च 2026 की अंतिम समय-सीमा तय है। इसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों की बस्तर से चरणबद्ध वापसी होने लगेगी। जिसके बाद कानून-व्यवस्था की पूरी जिम्मेदारी राज्य पुलिस के कंधों पर होगी। इस लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए अब सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर बस्तर संभाग में भविष्य की पुलिस व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
गृह विभाग के अनुसार, बस्तर क्षेत्र में अलग से 2500 जवानों की भर्ती की जाएगी, जिन्हें ‘बस्तर फाइटर्स’ नाम दिया जाएगा। इन जवानों की भर्ती स्थानीय युवाओं में से की जाएगी, ताकि वे क्षेत्र की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझते हुए सुरक्षा व्यवस्था संभाल सकें। सरकार का मानना है कि स्थानीय भर्ती से खुफिया तंत्र मजबूत होगा और आम जनता के साथ बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।
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इसके अलावा, केंद्र सरकार की CISF यानि Central Industrial Security Force की तर्ज पर राज्य स्तर पर SISF यानि State Industrial Security Force के गठन की तैयारी भी की जा रही है। इस नई फोर्स में पुलिस बल से 500 जवानों का चयन कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। एसआईएसएफ का मुख्य उद्देश्य राज्य के औद्योगिक प्रतिष्ठानों, खनन क्षेत्रों, विद्युत संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। औद्योगिक निवेश बढ़ने के साथ सुरक्षा की जरूरत को देखते हुए यह कदम अहम माना जा रहा है।
इसी क्रम में CAF यानि छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के लिए 1000 पदों पर नई भर्तियां की जाएंगी। इन जवानों को नक्सल प्रभावित और संवेदनशील इलाकों में तैनात किया जाएगा, ताकि केंद्रीय बलों की कमी को राज्य बलों से पूरा किया जा सके। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य पुलिस और सशस्त्र बल पूरी तरह सक्षम और प्रशिक्षित हों, जिससे किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
बस्तर क्षेत्र में जेल प्रशासन को भी मजबूत करने की योजना बनाई गई है। इसके तहत जेल विभाग में 100 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। नक्सल मामलों में गिरफ्तार आरोपियों और संवेदनशील कैदियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जेलों में अतिरिक्त स्टाफ की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। नई भर्तियों से जेल प्रबंधन अधिक व्यवस्थित और सुरक्षित होने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि 31 मार्च 2026 के बाद नक्सलवाद की समस्या काफी हद तक नियंत्रित हो जाएगी और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती में कमी आएगी। ऐसे में राज्य को अपनी आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था को स्वयं संभालने के लिए तैयार रहना होगा। इसी दृष्टि से यह व्यापक भर्ती और संरचनात्मक बदलाव किए जा रहे हैं।
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राज्य के गृह मंत्री विजय शर्मा का कहना है कि सरकार का पूरा फोकस तय समय-सीमा के भीतर नक्सल उन्मूलन और उसके बाद स्थायी शांति व्यवस्था स्थापित करने पर है। लेकिन सेंट्रल फोर्स के जाने के बाद राज्य के बल की जरुरत होगी। तय भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी होगी। जवानों को आधुनिक प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे छत्तीसगढ़ खासकर बस्तर की सुरक्षा व्यवस्था एक नए मॉडल के रूप में सामने आ सके।
2500 जवानों संभालेंगे कमान
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सेंट्रल की तर्ज पर फोर्स
1000 CAF की भर्तियां
जेलों को मजबूत करेंगे
सेंट्रल फोर्स की होगी वापसी
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