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News In Short
- छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में डेविड चाको पर आरोप
- बच्चों को ट्रेनिंग देकर धर्म परिवर्तन का प्रयास
- विदेशी फंडिंग और वित्तीय लेन-देन की जांच
- चार दिवसीय राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शामिल
- पूरे नेटवर्क और फंडिंग स्रोत की गहन जांच
- मामला छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की परीक्षा बन गया
News In Detail
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के धर्मापुर में एक मामले को लेकर पुलिस और खुफिया एजेंसियां सतर्क हैं। आरोप है कि यहां बच्चों को धीरे-धीरे प्रभावित कर उनका धर्म बदलने की कोशिश की गई, जिसमें चर्च और आश्रम की भूमिका सामने आ रही है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी डेविड चाको बच्चों को खास तरह की ट्रेनिंग दे रहा था। जांच एजेंसियों को शक है कि इस काम के पीछे विदेशी फंडिंग और एक संगठित नेटवर्क भी जुड़ा हो सकता है।
डेविड चाको पर बच्चों को प्रभावित करने का आरोप
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छत्तीसगढ़ धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है। आरोप है कि बच्चों को खास मॉड्यूल और ट्रेनिंग सामग्री के जरिए प्रभावित करने की कोशिश की गई। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ दस्तावेजों और किताबों में ऐसी भाषा इस्तेमाल की गई, जिसके मतलब सीधे तौर पर समझ में नहीं आते। शुरुआती जांच से संकेत मिल रहे हैं कि यह मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ और संभवतः बाहर से जुड़े लोगों तक फैला हो सकता है।
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विदेशी फंडिंग और छुपे नेटवर्क का खुलासा
जांच के दौरान ट्रैवल वाउचर, आवास योजना और ऑनलाइन तथा नकद भुगतान के दस्तावेज मिले हैं। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर जुड़े कुछ लोगों को “पॉल” जैसे नाम देकर पैसे दिए गए। अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि यह विदेशी फंडिंग कहां से आई, पैसा भारत तक कैसे पहुंचा और किन खातों के जरिए खर्च किया गया। इसके साथ ही राज्य और देश के दूसरे हिस्सों से जुड़े लोगों की भी जानकारी जुटाई जा रही है।
राज्यभर के चार दिवसीय प्रशिक्षण पर जांच
दिसंबर में आयोजित चार दिवसीय राज्यव्यापी प्रशिक्षण कार्यक्रम भी जांच का हिस्सा है। इसमें छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से चुने गए लोग शामिल हुए थे। जांच एजेंसियों को शक है कि प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया और लोगों को किस आधार पर चुना गया। अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस कार्यक्रम का असली मकसद क्या था।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में धर्मांतरण के पुराने मामले
छत्तीसगढ़ के जशपुर, नारायणपुर, कांकेर, बस्तर और दुर्ग से पहले भी धर्मांतरण से जुड़े मामले सामने आए थे। जांच में यह पैटर्न देखने को मिला कि अक्सर सामाजिक सेवा, शिक्षा या चिकित्सा सहायता के जरिये संपर्क बनाया जाता और धीरे-धीरे वैचारिक और धार्मिक पहचान बदलने की कोशिश की जाती।
जांच का दायरा बढ़ा
पुलिस का कहना है कि जांच अब सिर्फ आरोपी तक सीमित नहीं रहेगी। चर्च से जुड़े बड़े पदों पर बैठे लोगों और संचालन करने वालों की भूमिका भी देखी जा रही है। अमेरिका से भारत भेजे गए पैसे, डॉलर को नकद में बदलने की प्रक्रिया और पैसों के इस्तेमाल की पूरी जांच चल रही है। एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में लगी हैं।
छत्तीसगढ़ में कानून और प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा
राजनांदगांव का यह मामला अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रह गया है। बच्चों को प्रभावित करने और विदेशी फंडिंग के संकेत मिलने के बाद यह छत्तीसगढ़ धर्मांतरण कानून की बड़ी परीक्षा बन गया है। सवाल यह है कि क्या सरकार और प्रशासन ऐसे संगठित नेटवर्क पर समय रहते कार्रवाई कर पाएंगे। जांच के नतीजे यह तय करेंगे कि आगे कानून कितना असरदार साबित होता है और इसका असर पूरे छत्तीसगढ़ पर कितना पड़ता है।
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