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Raipur. छत्तीसगढ़ में जी-राम-जी अधिनियम और मनरेगा से गांधी नाम हटाने के मुद्दे पर सियासी टकराव तेज हो गया है। इस विवाद के केंद्र में नाथूराम गोडसे को लेकर दिए गए बयान हैं, जिनके बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ विवाद अब मंत्री, कांग्रेस नेताओं और भाजपा तक पहुंच चुका है।
भूपेश बघेल का तीखा हमला
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा—“नाथूराम गोडसे मुर्दाबाद, गोडसेवादी मुर्दाबाद। मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गोडसेवादी सोच का परिणाम है।”
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के बयान का जिक्र करते हुए लिखा कि महात्मा गांधी के अंतिम शब्द “हे राम” तब निकले थे, जब आरएसएस से जुड़े और सावरकर के अनुयायी नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मारी थी।
भूपेश बघेल ने आगे लिखा कि गोडसे की गोली गांधी को मिटा नहीं सकी, गोडसेवादी मानसिकता आज भी गांधी का नाम मिटाने की कोशिश कर रही है। रोजगार गारंटी कानून से गांधी का नाम हटाना उसी सोच का परिणाम है
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मंत्री टंकराम वर्मा के बयान से विवाद और भड़का
भूपेश बघेल के बयान पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने धमतरी में प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “नाथूराम गोडसे एक राष्ट्रवादी व्यक्ति थे।” उन्होंने कहा कि पहले सरकारी योजनाएं किसी व्यक्ति के नाम पर नहीं होती थीं, लेकिन कांग्रेस ने महात्मा गांधी, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम योजनाओं से जोड़े।
मंत्री वर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अवसर मिलने पर महापुरुषों के नाम हटाकर योजनाओं का नाम अपने परिवार के नाम पर रखा। कांग्रेस नाम जोड़ने की राजनीति करती है।
कांग्रेस का पलटवार, भाजपा से मांगा जवाब
मंत्री टंकराम वर्मा के बयान पर कांग्रेस संचार विभाग के अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा— “भाजपा को साफ करना चाहिए कि नाथूराम गोडसे राष्ट्रवादी था या भारत का पहला हत्यारा?”
उन्होंने कहा कि— गोडसे ने आज़ादी के बाद महात्मा गांधी की हत्या की, वह गांधी का कातिल था। भाजपा को अपने मंत्री के बयान पर स्पष्ट रुख बताना चाहिए।
धमतरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या बोले मंत्री टंकराम वर्मा
दरअसल, 6 जनवरी को राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा धमतरी दौरे पर थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत जी-राम-जी अधिनियम 2025 लाया गया है, जो ग्रामीण विकास की दिशा में ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा— यह अधिनियम गांवों को विकसित बनाने का रोडमैप है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा। किसान, मजदूर और गरीब इसकी प्राथमिकता में हैं
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मनरेगा से बेहतर बताया जी-राम-जी अधिनियम
मंत्री वर्मा ने कहा कि— जी-राम-जी अधिनियम, मनरेगा का उन्नत स्वरूप है। मनरेगा में जहां 100 दिन का रोजगार मिलता था। नए अधिनियम में 125 दिन का कानूनी रोजगार मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया— मजदूरी भुगतान 7 दिनों के भीतर होगा। देरी होने पर मजदूरों को अतिरिक्त राशि (ब्याज) दी जाएगी। इससे भुगतान में होने वाली समस्याएं खत्म होंगी
2014 के बाद की योजनाओं का किया जिक्र
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में अपने पहले भाषण में स्पष्ट किया था कि सरकार गरीबों के लिए समर्पित रहेगी। इसी सोच के तहत— घर-घर बिजली, शौचालय, आवास, जनधन खाते जैसी योजनाएं लागू की गईं।
सियासत और वैचारिक टकराव तेज
जी-राम-जी अधिनियम और गांधी नाम हटाने को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब गोडसे, गांधी और राष्ट्रवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों तक पहुंच चुका है। बयानबाजी के चलते छत्तीसगढ़ की राजनीति में वैचारिक ध्रुवीकरण और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
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