सीएम के जी रामजी के बयान पर भूपेश बघेल का पलटवार, बोले महात्मा गांधी के मुंह से हे राम तब निकला जब गोडसे ने गोली मारी
Arun Tiwari | Jan 06, 2026, 17:31 IST
raipur mgnrega name change
मनरेगा का नाम जी रामजी होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच तलवारें खिंच गई हैं। एक तरफ बीजेपी के नेता इसको बेहतर बता रहे हैं तो कांग्रेस के नेता इसके विरोध में उतर आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीएम विष्णुदेव साय के बयान पर पलटवार किया है।
Raipur. मनरेगा का नाम जी रामजी होने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच तलवारें खिंच गई हैं। एक तरफ बीजेपी के नेता इसको बेहतर बता रहे हैं तो कांग्रेस के नेता इसके विरोध में उतर आए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सीएम विष्णुदेव साय के बयान पर पलटवार किया है।
भूपेश बघेल ने कहा कि सीएम कह रहे हैं कि महात्मा गांधी के अंतिम समय में मुंह से हेराम निकला था लेकिन वो हेराम तब निकला था जब आरएसएस के सदस्य नाथूराम गोडसे ने उनको गोली मारी थी। भूपेश बघेल ने एक्स के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है।
नाथूराम गोडसे मुर्दाबाद!
गोडसेवादी मुर्दाबाद!
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने बिल्कुल ठीक कहा कि पूज्य बापू महात्मा गांधी जी ने अपने अंतिम समय में "हे राम!" कहा था। क्या आपको याद है मुख्यमंत्री जी, ये शब्द महात्मा गांधी के मुंह से कब निकले थे? जब आरएसएस के सदस्य और सावरकर के चेले नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मार दी तब। गोडसे की गोली महात्मा गांधी को मिटाने की कोशिश थी।
गांधी को मिटाया नहीं जा सका। गोडसेवादी मानसिकता अभी तक गांधी के नाम को मिटाने की कोशिश में लगी हुई है। रोज़गार गारंटी क़ानून के आगे से गांधी का नाम हटाना भी वही गोडसेवादी सोच का नजीता है। वही सावरकर की कायर सोच का नतीजा है। और महात्मा गांधी कांग्रेस के नहीं इस देश के और इस दुनिया की धरोहर थे। उनका नाम ऐसी जगहों पर दर्ज है जहां आपके नेता जीते जी भी नहीं पहुंच पाएंगे।
देश के हर बड़े शहर में महात्मा गांधी मार्ग का होना कोई कम बड़ा सबूत नहीं है। आप एक ऐसे प्रधानमंत्री के प्रवक्ता बनकर मुख्यमंत्री जी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का अपमान कर रहे हैं, जो अपने नाम का लिखा सूट पहनते हैं, अपने नाम पर क्रिकेट स्टेडियम का सुख पाते हैं और हर जगह खुद की तस्वीर देखकर खुद ही इतराते हैं। वैसे मुख्यमंत्री के झूठ का खंडन करते हुए मैं कुछ संस्थानों का नाम नीचे लिख रहा हूँ, जो पूज्य बापू के नाम पर हैं।
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- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, केरल — कोट्टयम में एक प्रमुख सार्वजनिक विश्वविद्यालय, 1983 में स्थापित
- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ — वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एक राज्य विश्वविद्यालय
- महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय — मोतिहारी, बिहार में स्थित
- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, मेघालय — तुरा में एक राज्य विश्वविद्यालय
- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, तेलंगाना — नलगोंडा में
- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय — वर्धा, महाराष्ट्र में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय
- गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान — गांधीग्राम, तमिलनाडु में एक डीम्ड विश्वविद्यालय, ग्रामीण विकास पर केंद्रित
- महात्मा गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान — हैदराबाद, तेलंगाना में एक इंजीनियरिंग कॉलेज
- गांधीयन अध्ययन संस्थान — वर्धा, महाराष्ट्र में, गांधीयन सिद्धांतों को बढ़ावा देने वाला
- महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एमजीआईएमएस) — सेवाग्राम, महाराष्ट्र में भारत का पहला ग्रामीण मेडिकल कॉलेज, कस्तूरबा अस्पताल से संबद्ध
- महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अनुसंधान संस्थान (एमजीएमसीआरआई) — पुडुचेरी में
- महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय — जयपुर, राजस्थान में
भूपेश बघेल ने कहा कि दरअसल साय जी आप लोग नाम मिटाने वाले लोग हैं। आप लोग छत्तीसगढ़ के पुरखों स्व. ख़ूबचंद बघेल जी, स्वामी आत्मानंद जी का नाम मिटाने की कोशिशों में लगे हुए हैं। दिल्ली से आई हुई पर्चियाँ मीडिया के समक्ष पढ़कर आप प्रासंगिक बने रहिए मुख्यमंत्री जी। हम तो पूज्य बापू के नाम को मनरेगा से हटाने के इस 'गोडसेवादी' षड्यंत्र का विरोध करते रहेंगे। महात्मा गांधी जी अमर रहें!
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भूपेश बघेल ने कहा कि सीएम कह रहे हैं कि महात्मा गांधी के अंतिम समय में मुंह से हेराम निकला था लेकिन वो हेराम तब निकला था जब आरएसएस के सदस्य नाथूराम गोडसे ने उनको गोली मारी थी। भूपेश बघेल ने एक्स के जरिए अपनी प्रतिक्रिया दी है।
भूपेश बघेल का एक्स पर बयान :
गोडसेवादी मुर्दाबाद!
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी ने बिल्कुल ठीक कहा कि पूज्य बापू महात्मा गांधी जी ने अपने अंतिम समय में "हे राम!" कहा था। क्या आपको याद है मुख्यमंत्री जी, ये शब्द महात्मा गांधी के मुंह से कब निकले थे? जब आरएसएस के सदस्य और सावरकर के चेले नाथूराम गोडसे ने उन्हें गोली मार दी तब। गोडसे की गोली महात्मा गांधी को मिटाने की कोशिश थी।
गांधी को मिटाया नहीं जा सका। गोडसेवादी मानसिकता अभी तक गांधी के नाम को मिटाने की कोशिश में लगी हुई है। रोज़गार गारंटी क़ानून के आगे से गांधी का नाम हटाना भी वही गोडसेवादी सोच का नजीता है। वही सावरकर की कायर सोच का नतीजा है। और महात्मा गांधी कांग्रेस के नहीं इस देश के और इस दुनिया की धरोहर थे। उनका नाम ऐसी जगहों पर दर्ज है जहां आपके नेता जीते जी भी नहीं पहुंच पाएंगे।
देश के हर बड़े शहर में महात्मा गांधी मार्ग का होना कोई कम बड़ा सबूत नहीं है। आप एक ऐसे प्रधानमंत्री के प्रवक्ता बनकर मुख्यमंत्री जी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी का अपमान कर रहे हैं, जो अपने नाम का लिखा सूट पहनते हैं, अपने नाम पर क्रिकेट स्टेडियम का सुख पाते हैं और हर जगह खुद की तस्वीर देखकर खुद ही इतराते हैं। वैसे मुख्यमंत्री के झूठ का खंडन करते हुए मैं कुछ संस्थानों का नाम नीचे लिख रहा हूँ, जो पूज्य बापू के नाम पर हैं।
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8 जनवरी को रायपुर आएंगे सचिन पायलट, मनरेगा पर रहेगा फोकस
मनरेगा को लेकर जीतू पटवारी का बड़ा बयान, दो बार राम जोड़ें, पर...
भूपेश ने लिखा इन संस्थानों का नाम :
- महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ — वाराणसी, उत्तर प्रदेश में एक राज्य विश्वविद्यालय
- महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय — मोतिहारी, बिहार में स्थित
- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, मेघालय — तुरा में एक राज्य विश्वविद्यालय
- महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, तेलंगाना — नलगोंडा में
- महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय — वर्धा, महाराष्ट्र में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय
- गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान — गांधीग्राम, तमिलनाडु में एक डीम्ड विश्वविद्यालय, ग्रामीण विकास पर केंद्रित
- महात्मा गांधी प्रौद्योगिकी संस्थान — हैदराबाद, तेलंगाना में एक इंजीनियरिंग कॉलेज
- गांधीयन अध्ययन संस्थान — वर्धा, महाराष्ट्र में, गांधीयन सिद्धांतों को बढ़ावा देने वाला
- महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान संस्थान (एमजीआईएमएस) — सेवाग्राम, महाराष्ट्र में भारत का पहला ग्रामीण मेडिकल कॉलेज, कस्तूरबा अस्पताल से संबद्ध
- महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अनुसंधान संस्थान (एमजीएमसीआरआई) — पुडुचेरी में
- महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय — जयपुर, राजस्थान में
सीएम पर निशाना :
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मनरेगा नाम बदलाव के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे दिग्विजय, शिवराज को घेरेंगे
गिग वर्कर्स के समर्थन में गहलोत, मनरेगा का पुराना स्वरूप लौटाने की मांग
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