भर्ती से पहले ही बवाल! 650 पदों की स्वास्थ्य नियुक्ति पर कानूनी साया

Rajesh Lahoti | Feb 17, 2026, 18:26 IST
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chhattisgarh health recruitment legal issues 650 posts
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छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य भर्ती प्रक्रिया में कानूनी साया, 650 पदों पर चयन प्रक्रिया में विवाद। सरकार ने कोर्ट में याचिका का कदम उठाया, परिणामों पर उठ रहे हैं सवाल।

News In Short

  • छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में 650 पदों की भर्ती प्रक्रिया विवादित हुई।
  • केविएट दायर किया गया, ताकि अदालत में पहले सरकार का पक्ष सुना जा सके।
  • पहले भी भर्ती परिणामों पर गड़बड़ी के आरोप उठ चुके हैं।
  • अगर मामला कोर्ट में चला तो नियुक्तियों में देरी हो सकती है।
  • स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भर्ती का बड़ा असर पड़ेगा, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।

News In Detail

रायपुर। छत्तीसगढ़ की बहुप्रतीक्षित स्वास्थ्य भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। 650 से अधिक पदों पर चल रही चयन प्रक्रिया अभी अंतिम दौर में भी नहीं पहुंची है। वहीं संचालनालय स्वास्थ्य सेवा ने केविएट दायर कर दी है। इसका सीधा मतलब है कि विभाग को आशंका है यह मामला कोर्ट तक जा सकता है।

सरकार ने पहले ही कानूनी कवच पहन लिया है। ताकि अगर कोई अभ्यर्थी हाईकोर्ट में याचिका लगाए तो एकतरफा आदेश न हो। पहले उसका पक्ष सुना जाए। इस कदम ने भर्ती प्रक्रिया पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

किन पदों पर हो रही है भर्ती?

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के 14 अगस्त 2024 को आदेश दिया था। इसके तहत स्टाफ नर्स, ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (पुरुष/महिला), फार्मासिस्ट ग्रेड-2, लैब टेक्नीशियन सहित कुल 650 पदों पर सीधी भर्ती की अनुमति दी गई थी। इसमें ओटी टेक्नीशियन, ड्रेसर ग्रेड-1, वार्ड बॉय, वार्ड आया और सहायक ग्रेड-3 पद भी शामिल है।

इन पदों के लिए 2024 और 2025 में अलग-अलग तारीखों पर सूचना जारी हुई थी। परीक्षाएं व्यापम के माध्यम से आयोजित की गईं थी। परिणाम संचालनालय को भेजे जा चुके हैं। अब चयन सूची के आधार पर नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

पहले भी रिजल्ट पर उठ चुके हैं सवाल

यह पहली बार नहीं है जब स्वास्थ्य विभाग की भर्ती विवादों में आई हो। पिछले कुछ वर्षों में कई परीक्षाओं के परिणाम को लेकर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी।

स्टाफ नर्स भर्ती परीक्षा

रिजल्ट जारी होने के बाद मेरिट सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप लगा था। कई उम्मीदवारों ने दावा किया कि अधिक अंक होने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ है। सोशल मीडिया पर अंक और चयन सूची की तुलना करते हुए पोस्ट वायरल हुए थे।

ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक (RHO) परीक्षा

कटऑफ और मेरिट गणना को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। कई जिलों में ज्ञापन सौंपे गए और चयन प्रक्रिया की समीक्षा की मांग की गई है।

फार्मासिस्ट ग्रेड-2 भर्ती

इस परीक्षा में रिजल्ट संशोधन और मेरिट सूची में बदलाव को लेकर विरोध हुआ है। पारदर्शिता को लेकर बहस छिड़ रही है।

लैब टेक्नीशियन और ओटी टेक्नीशियन परीक्षा

इन पदों के परिणाम आने के बाद आरक्षण नियमों और अंक जोड़ने की प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज कराई गईं है। इन सभी मामलों में विभाग ने तकनीकी त्रुटि या प्रक्रिया अनुसार चयन होने की बात कही है। इसे लेकर विवाद पूरी तरह शांत नहीं हुआ है।

केविएट का मतलब और संदेश

6 फरवरी को दायर केविएट का सीधा अर्थ है-कोई अदालत जाए तो पहले सरकार की बात सुनी जाए। यह एक एहतियाती कदम है। जब भर्ती प्रक्रिया को लेकर पहले से असंतोष की चर्चा हो, तब यह कदम और भी ज्यादा सवाल पैदा करता है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि केविएट आमतौर पर तब दायर की जाती है जब विभाग को कानूनी बवाल की आशंका हो।

स्वास्थ्य सेवाओं पर संभावित असर

राज्य के कई सरकारी अस्पताल पहले से स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। यह भर्ती प्रक्रिया स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए बेहद जरूरी मानी जा रही थी। मामला कोर्ट में उलझता है तो नियुक्तियां अटक सकती हैं। इसका असर सीधे मरीजों पर पड़ेगा, खासकर ग्रामीण इलाकों में।

अब आगे क्या?

सबसे बड़ा सवाल यही है-क्या इस बार चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है? अगर हां, तो फिर बार-बार विवाद और कानूनी तैयारी की नौबत क्यों आ रही है? 650 पदों की यह भर्ती सिर्फ नियुक्ति नहीं है। बल्कि सिस्टम की विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुकी है।

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