रोटी मेकर खरीदी में 2 करोड़ का खेल, अफसरों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ वेतनवृद्धि रोकी, रिटायरमेंट के बाद पूरा भुगतान भी कर दिया
VINAY VERMA | Sept 30, 2026, 19:29 IST
रोटी मेकर खरीदी में 2 करोड़ की गड़बड़ी
रायपुर में आदिम जाति विकास विभाग के तहत रोटी मेकर की खरीद से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें आई हैं। शिकायतकर्ताओं ने सवाल किया है कि केवल वेतन वृद्धि रोकने से स्थिति का समाधान संभव है। इस प्रकार की अनियमितताओं में शामिल सभी अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराने की आवश्यकता है।
रायपुर। आदिम जाति विकास विभाग की रोटी मेकर खरीदी अब सिर्फ मशीनों का मामला नहीं रह गया है। करीब 1.92 करोड़ रुपए की इस खरीदी में नियमों की अनदेखी के आरोपों के बीच कार्रवाई का तरीका ही सवालों के घेरे में आ गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी रकम के मामले में जिम्मेदारी तय करने के बजाय सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोककर मामला निपटाने की कोशिश क्यों की गई? इतना ही नहीं, तत्कालीन सहायक आयुक्त तारकेश्वर देवांगन को आसानी से रिटायर भी होने दिया गया और बकाया पैसों का भुगतान भी कर दिया गया।
मामले में लोक सेवा आयोग ने 20 अप्रैल 2026 को असंचयी प्रभाव से एक वेतनवृद्धि रोकने पर सहमति दी। इसका मतलब यह है कि सजा का असर सीमित रहेगा और आगे चलकर वेतन फिर सामान्य हो जाएगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि करीब दो करोड़ रुपए की खरीदी में अगर गड़बड़ी हुई है तो क्या सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोकना पर्याप्त कार्रवाई है?
आरोप है कि खरीदी में जिला स्तरीय क्रय समिति और टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार किया गया। रोटी मेकर खरीदने के लिए आश्रम-छात्रावासों के निर्माण और रखरखाव की राशि का इस्तेमाल किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। अगर ये आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ मशीन खरीदने वाले अफसर का नहीं, पूरी प्रक्रिया में शामिल लोगों का है।
शिकायतों में तत्कालीन सहायक आयुक्त तारकेश्वर देवांगन और विजय कंवर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि फाइल किसने तैयार की, खरीदी को मंजूरी किस स्तर पर मिली, भुगतान किसने कराया और नियमों को दरकिनार करने में कौन-कौन अधिकारी शामिल थे? सिर्फ दो नामों तक जांच सीमित रही या बाकी जिम्मेदारों की भूमिका भी खंगाली गई, इसका जवाब सामने नहीं आया है।
मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त तारकेश्वर देवांगन के जुलाई 2026 में सेवानिवृत्त होने का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं। सवाल यह भी है कि क्या विभागीय कार्रवाई को इस तरह हल्का रखा गया कि सेवानिवृत्ति के बाद मामला ठंडा पड़ जाए? अगर सरकारी नुकसान हुआ है तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
शिकायतकर्ता आशीष देव सोनी ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा के सामने दस्तावेज रखकर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर एफआईआर, निलंबन और 192.33 लाख रुपए की वसूली की मांग की है। अब बड़ा सवाल यही है कि विभाग यह पता लगाने की कोशिश कब करेगा कि इस खरीदी में अकेले अफसर जिम्मेदार थे या पूरी व्यवस्था में कई लोग शामिल थे।
अगर खरीदी में नियमों की अनदेखी हुई है तो सिर्फ वेतनवृद्धि रोकने से सरकारी खजाने का नुकसान वापस नहीं आएगा। जिम्मेदारी तय करने के लिए खरीद से लेकर भुगतान तक पूरी फाइल की जांच जरूरी है। सवाल यही है कि आखिर विभाग अधिकारी पर इतना मेहरबान क्यों रहा और उन सभी लोगों के नाम अब तक सामने क्यों नहीं आए, जिनकी भूमिका इस पूरी प्रक्रिया में रही होगी?
FAQ
सजा या सिर्फ खानापूर्ति?
टेंडर से लेकर भुगतान तक सवाल
कौन-कौन था फैसले में?
रिटायरमेंट से पहले मेहरबानी क्यों?
जांच हुई तो पूरी तस्वीर क्यों नहीं खुली?
कागजों से बाहर निकलेगा सच?
FAQ
- रोटी मेकर खरीदी में विवाद क्यों उठ रहा है?
रोटी मेकर की करीब 1.92 करोड़ रुपए की खरीदी में नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए हैं, जिसमें जिला स्तरीय क्रय समिति और टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार करने का आरोप भी शामिल है। - इस मामले में कौन-कौन से अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए गए हैं?
मामले में तत्कालीन सहायक आयुक्त तारकेश्वर देवांगन और विजय कंवर की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन यह भी पता लगाने की जरूरत है कि निर्णय प्रक्रिया में और किन अधिकारियों की भागीदारी रही। - क्या सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोकने को पर्याप्त सजा माना जा सकता है?
सवाल उठ रहा है कि रोटी मेकर की खरीदी में यदि गड़बड़ी हुई है तो सिर्फ एक वेतनवृद्धि रोकना पर्याप्त कार्रवाई है या नहीं, क्योंकि सरकारी खजाने को नुकसान का पूरा हिसाब-किताब होना चाहिए।
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