छत्तीसगढ़ में साड़ी घोटालाः IAS एल्मा के पास थी दोहरी जिम्मेदारी, केवल ट्रांसफर
VINAY VERMA | Aug 31, 2026, 17:06 IST
साड़ी खरीदी में धांधली का खुलासा
छत्तीसगढ़ के 9.70 करोड़ रुपए के साड़ी घोटाले में सवाल उठ रहे हैं। खरीदी के समय IAS पीएल एल्मा के पास महिला एवं बाल विकास विभाग और खादी बोर्ड दोनों की जिम्मेदारी थी। शिकायतों के बाद जांच हुई, लेकिन अब तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।
छग में बीते साल हुए साड़ी घोटाला जांच और फिर नए आदेश के बाद समाप्त होता दिख रहा है। सबसे बड़ी बात कि मामले मे न तो किसी को आरोपी बनाया गया और न ही किसी पर कार्रवाई की गई। इस बात पर सवाल उठने लगे है। आरोप इसलिए भी लग रहे हैं कि मंत्री बंगले के पदस्थ अधिकारियों के अलावा सीनियर IAS अधिकारी पीएल एल्मा की भी बड़ी जिम्मेदारी थीे। क्योंकि खरीदी के दौरान पीएल एल्मा न केवल महिला एवं बाल विकास विभाग के डायरेक्टर थे बल्कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड में एमडी भी थे। साड़ियां खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के तहत ही खरीदी गई थी। यानि सप्लाई का ऑर्डर देने वाले भी पीएल एल्मा और ऑर्डर रिसीव कर खरीदी करने करने वाले भी पीएल एल्मा. मामले मे IAS कह रहे हैं कि सप्लाई करने वालों को मैने ही नोटिस दिया था, पेमेंट भी रोक दिया था। अभी मै उस विभाग मे नहीं हूं।
वर्ष 2024-25 में प्रदेश की करीब 1.94 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए लगभग 9 करोड़ 70 लाख रुपए की साड़ियां खरीदी गईं। प्रति साड़ी करीब 500 रुपए की दर तय थी। सप्लाई की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड को दी गई। यानी सरकारी व्यवस्था के भीतर ही खरीदी और सप्लाई का पूरा खेल चला।
वर्क ऑर्डर में साड़ी की लंबाई को लेकर स्पष्ट शर्त थी। साड़ी की लंबाई 6.3 मीटर रखी जानी थी, जिसमें 5.5 मीटर साड़ी और करीब 80 सेंटीमीटर ब्लाउज पीस शामिल था। अगस्त 2025 से फरवरी 2026 के बीच अलग-अलग जिलों में इनका वितरण किया गया। इसके बाद शिकायतों का सिलसिला शुरू हुआ।
कई जिलों से शिकायत आई कि महिलाओं को दी गई साड़ियों की लंबाई तय मानक से कम है। कहीं 5 मीटर की साड़ी पहुंची तो कहीं इससे भी कम लंबाई की शिकायत सामने आई। कार्यकर्ताओं का कहना था कि साड़ी इतनी छोटी है कि पहनने में भी परेशानी हो रही है। मामला यहीं नहीं रुका।
साड़ियों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठे। शिकायतों के मुताबिक कपड़ा बेहद पतला था। धोने के बाद रंग उतरने और साड़ी के सिकुड़ने की शिकायतें भी सामने आईं। कई कार्यकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि बाजार में इसी तरह की साड़ी 250 रुपए या उससे कम कीमत में उपलब्ध है। अगर यह दावा सही है तो 500 रुपए प्रति साड़ी की खरीदी अपने आप में बड़ा सवाल बन जाती है।
इस मामले का सबसे संवेदनशील पहलू तत्कालीन जिम्मेदारियों से जुड़ा है। खरीदी के समय पीएल एल्मा महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक थे। उसी दौरान वे खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। यानी जिस विभाग की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए साड़ी चाहिए थी, वहां वे शीर्ष अधिकारी थे और जिस बोर्ड को साड़ी सप्लाई करनी थी, वहां भी वे एमडी थे। यही भूमिका अब पूरे मामले में जवाबदेही का सबसे बड़ा सवाल बन रही है। रुटीन बताते हुए केवल ट्रांसफर कर दिया गया।
मामले में मंत्री बंगले से जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। राजनीतिक विरोध के बीच कांग्रेस और महिला कांग्रेस ने सरकार को घेरा और प्रदर्शन किए। विपक्ष ने इसे सरकारी धन और महिलाओं के सम्मान से जुड़ा मामला बताते हुए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
शिकायतों के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देश पर अमानक साड़ियों की जांच के आदेश दिए गए। जिला कार्यक्रम अधिकारियों को साड़ियों की लंबाई जांचने और तय मानक से कम पाए जाने पर उन्हें बदलने की जिम्मेदारी दी गई। लेकिन जांच के बाद भी अब तक किसी को आरोपी बनाकर कार्रवाई किए जाने की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
9.70 करोड़ की खरीदी में अगर साड़ी मानक से कम निकली तो जिम्मेदार कौन है? तय लंबाई से छोटी साड़ियां सप्लाई किस आधार पर हुई? गुणवत्ता की जांच खरीदी और वितरण से पहले क्यों नहीं हुई? एक ही समय में महिला एवं बाल विकास विभाग और खादी बोर्ड की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारी की भूमिका की जांच हुई या नहीं? मंत्री बंगले के अधिकारियों की भूमिका क्या थी?
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9.70 करोड़ की खरीदी
वर्क ऑर्डर में मानक साफ
5 मीटर की साड़ी मिली
धोते ही रंग और आकार गायब
एक ही अफसर, दो बड़ी जिम्मेदारियां
मंत्री बंगले की भूमिका भी सवालों में
जांच हुई, कार्रवाई कहां?
सवालों पर सरकार खामोश क्यों?
FAQ
- छत्तीसगढ़ साड़ी घोटाला क्या है?
यह मामला आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के लिए खरीदी गई साड़ियों की गुणवत्ता और लंबाई में कमी की शिकायतों से जुड़ा है। साड़ियों की खरीदी करीब 9.70 करोड़ रुपए में की गई थी। - साड़ी खरीदी के समय IAS पीएल एल्मा की क्या जिम्मेदारी थी?
खरीदी के समय पीएल एल्मा महिला एवं बाल विकास विभाग के संचालक और छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के एमडी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। - साड़ी घोटाले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
मामले में जांच के आदेश दिए गए थे। हालांकि अब तक किसी व्यक्ति को आरोपी बनाकर बड़ी कार्रवाई किए जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।
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