नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 3,000 पक्के घर, आशियाने बने मिसाल

Krishna Kumar Sikander | Aug 10, 2025, 12:14 IST
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houses for Naxal victims and surrendered Naxalites the sootr
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छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए एक विशेष योजना शुरू की है। इस योजना के तहत 15,000 पक्के घर बनाए जाने हैं, जिनमें से 3,000 परिवारों के लिए आवास निर्माण शुरू हो चुका है।

छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए ठोस कदम उठा रही है। विशेष परियोजना के तहत 15,000 पक्के घरों की स्वीकृति के बाद 3,000 परिवारों के लिए आवास निर्माण शुरू हो चुका है।

इनमें से 2,111 परिवारों को पहली किस्त और 128 को दूसरी किस्त मिल चुकी है। सुकमा की सोडी हुंगी और कांकेर की दशरी बाई के घर मात्र तीन महीने में बनकर तैयार हो गए, जो इस परियोजना की सफलता की मिसाल हैं।

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दुर्गम क्षेत्रों में बने सपनों के घर

नक्सल हिंसा से प्रभावित सुकमा के गादीरास गांव की सोडी हुंगी और कांकेर के कोयलीबेड़ा की दशरी बाई के लिए पक्के घर ने नई उम्मीद जगाई है। सोडी हुंगी के पति की 2005 में नक्सलियों ने हत्या कर दी थी, जिसके बाद वह कच्चे घर में मुश्किलों का सामना कर रही थी।

मार्च 2025 में स्वीकृत पीएम आवास योजना के तहत तीन किस्तों में 1.35 लाख रुपये की मदद से जुलाई में उनका पक्का घर तैयार हो गया। इसी तरह, दशरी बाई, जिनके पति की माओवादी घटना में मृत्यु हुई थी, ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद तीन महीने में अपना घर बनवाया।

कांकेर जिला मुख्यालय से 200 किमी दूर उलिया गांव में सड़क और परिवहन की कमी के बावजूद, जिला प्रशासन, ग्राम पंचायत और आवास टोली के सहयोग से उनका घर तैयार हुआ।

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विशेष परियोजना की पहल

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत विशेष परियोजना में 5,000 पात्र परिवारों में से 3,000 के लिए आवास मंजूर किए गए हैं। सुकमा में 984, बीजापुर में 761, नारायणपुर में 376, दंतेवाड़ा में 251, बस्तर में 214, कोंडागांव में 166 और कांकेर में 146 परिवारों को लाभ मिला है। यह परियोजना नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है।

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प्रशासनिक सहयोग और चुनौतियां

दशरी बाई ने बताया कि दुर्गम क्षेत्रों में निर्माण सामग्री लाने और श्रमिकों की व्यवस्था में कई चुनौतियां थीं। बारिश के कारण परिवहन और भी मुश्किल था, लेकिन प्रशासन और ग्राम पंचायत की मदद से काम तेजी से पूरा हुआ। सोडी हुंगी ने भी ग्राम पंचायत की निगरानी और तकनीकी मार्गदर्शन की सराहना की।

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सरकार की प्रतिबद्धता

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि यह परियोजना सिर्फ घर निर्माण नहीं, बल्कि विश्वास और स्थायित्व की नींव है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। सरकार का लक्ष्य हर पात्र परिवार को पक्का घर और सम्मानजनक जीवन देना है।

FAQ

  1. छत्तीसगढ़ सरकार की विशेष परियोजना के तहत नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पित नक्सलियों को क्या सुविधा दी जा रही है?
    छत्तीसगढ़ सरकार नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्के घर प्रदान कर रही है। इस विशेष परियोजना में अब तक 3,000 परिवारों को आवास मंजूर किए गए हैं और कई घर बनकर तैयार हो चुके हैं।
  2. सोडी हुंगी और दशरी बाई के घर बनने की कहानी क्या दर्शाती है?
    सोडी हुंगी और दशरी बाई के घर तीन महीनों में बनकर तैयार हुए, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार और प्रशासन के सहयोग से दुर्गम नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सफलता से विकास कार्य किए जा सकते हैं। यह परियोजना इन महिलाओं के लिए आशा की नई किरण बनी है।
  3. इस परियोजना में किन जिलों को प्राथमिकता दी गई है और कितने परिवारों को लाभ मिला है?
    इस परियोजना में नक्सल प्रभावित जिलों को प्राथमिकता दी गई है। इनमें सुकमा (984 परिवार), बीजापुर (761), नारायणपुर (376), दंतेवाड़ा (251), बस्तर (214), कोंडागांव (166) और कांकेर (146) शामिल हैं। कुल मिलाकर 3,000 परिवारों को अब तक आवास का लाभ मिल चुका है।
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