महिला कमांडो के हाथों में जंगल की सुरक्षा : अब इको-टूरिज्म को लगेंगे नए पंख
Umeshwari Baghel | Jun 17, 2026, 17:44 IST
बलौदाबाजार का ये गांव बना मिसाल
बलौदाबाजार-भाटापारा के धमनी गांव ने सामुदायिक प्रयासों से जंगल संरक्षण की मिसाल पेश की है। महिलाओं और युवाओं की भागीदारी से वन, जल और वन्यजीव सुरक्षित हुए हैं। गांव अब हरित मॉडल के रूप में पहचान बना रहा है।
समझें क्या है पूरा मामला
गांव की सबसे बड़ी खासियत यहां की सामुदायिक सोच है। ग्रामीणों ने मिलकर जंगल को केवल संसाधन नहीं, बल्कि अपनी पहचान और विरासत के रूप में स्वीकार किया है। इसी सोच ने धमनी को अन्य गांवों से अलग पहचान दिलाई है। यहां के लोग लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानकर काम कर रहे हैं।
सामूहिक भागीदारी से हुआ बदलाव
गांव में पेड़ों की अवैध कटाई पर रोक लगाने के लिए सामुदायिक निगरानी व्यवस्था विकसित की गई। ग्रामीण बारी-बारी से जंगल की निगरानी करते हैं और किसी भी प्रकार की गतिविधि पर तुरंत सामूहिक निर्णय लिया जाता है। इससे जंगल क्षेत्र में अवैध हस्तक्षेप लगभग समाप्त हो गया है।
महिलाओं और युवाओं की अहम भूमिका
युवाओं ने भी इस अभियान को डिजिटल और सामाजिक स्तर पर आगे बढ़ाया है। वे समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाते हैं और ग्रामीणों को पर्यावरण संतुलन के महत्व के बारे में जानकारी देते हैं।
वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण
इसके साथ ही जल स्रोतों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। महानदी के किनारे बसे इस गांव में जल संरक्षण के लिए पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का उपयोग किया जा रहा है। वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल स्रोतों की सफाई नियमित रूप से की जाती है।
पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणादायक मिसाल
आज धमनी गांव न केवल जिले में बल्कि पूरे क्षेत्र में (जंगल की सुरक्षा) पर्यावरण संरक्षण की एक प्रेरक कहानी बन चुका है। यह उदाहरण अन्य गांवों के लिए भी एक सीख है कि प्रकृति की रक्षा के लिए सामूहिक भागीदारी सबसे प्रभावी तरीका है।
निष्कर्ष
FAQ
- धमनी गांव को पर्यावरण संरक्षण का मॉडल क्यों कहा जा रहा है?
धमनी गांव में ग्रामीणों ने मिलकर जंगलों की कटाई रोक दी है और सामुदायिक निगरानी व्यवस्था बनाई है। यहां हर व्यक्ति प्रकृति संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, जिससे गांव एक हरित मॉडल बन गया है। - इस गांव में महिलाओं और युवाओं की क्या भूमिका है?
महिलाएं वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जागरूकता अभियान चलाती हैं। वहीं युवा ग्रामीणों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं और सामुदायिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। - क्या धमनी गांव में वन्यजीव संरक्षण भी किया जा रहा है?
हां, ग्रामीणों की निगरानी और जागरूकता के कारण वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास सुरक्षित हैं। किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर तुरंत सामूहिक निर्णय लिया जाता है।
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