आठ साल बाद खुली डीकेएस फाइल, 62 करोड़ के भुगतान से पहले होगी बिलों की पड़ताल
Rajesh Lahoti | Jun 03, 2026, 19:13 IST
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छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने डीकेएस अस्पताल के विवादित बिलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है। यह कदम आठ वर्षों से लंबित 62 करोड़ रूपए के भुगतान मामले को स्पष्ट करने के लिए उठाया गया है।
Raipur. स्वास्थ्य मंत्री के स्तर से लगातार दबाव और आठ वर्षों से लंबित पड़े करोड़ों रूपए के भुगतान के मामलों के बीच स्वास्थ्य विभाग ने आखिरकार डीकेएस अस्पताल के विवादित बिलों की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी तय करेगी कि अस्पताल से जुड़े कौन-कौन से भुगतान वास्तविक हैं और किन बिलों में अनियमितता या फर्जीवाड़े की आशंका है। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ही करीब 62 करोड़ रूपए के लंबित भुगतानों पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
यह मामला वर्ष 2018-19 में सामने आए डीकेएस अस्पताल के बहुचर्चित घोटाले से जुड़ा हुआ है। उस समय अस्पताल में मैनपावर सप्लाई, सफाई ठेके, दवा और चिकित्सा उपकरणों की खरीदी तथा ऑपरेशन थिएटर के लिए उपकरण खरीद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। उस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के दामाद पुनीत गुप्ता अस्पताल के अधीक्षक थे।
मामले को लेकर जांच, एफआईआर और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली, लेकिन इसके बावजूद कई कंपनियों के भुगतान अब तक लंबित हैं। सूत्रों के मुताबिक 62 करोड़ रूपए के जिन भुगतानों पर विवाद है, उनमें क्लीन टेक फर्म का करीब 4.35 करोड़ रूपए का भुगतान भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इस भुगतान को जारी कराने के लिए संबंधित फर्म ने दो बार स्वास्थ्य मंत्री के स्तर पर भी दबाव बनवाया। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने भुगतान पर तत्काल निर्णय लेने से इनकार करते हुए पहले पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया है।
जानकारी के अनुसार डीकेएस अस्पताल में सफाई व्यवस्था के लिए जिस ठेके को मंजूरी दी गई थी, उसके तहत हर महीने लगभग 72 लाख रूपए का भुगतान किया जा रहा था। बाद में सरकार ने इस व्यवस्था की समीक्षा की और खर्च को अत्यधिक मानते हुए इसे घटाकर करीब 25 लाख रूपए प्रतिमाह कर दिया।
इसके बाद कई भुगतनों पर सवाल उठे और कुछ बिलों का भुगतान रोक दिया गया। करीब आठ वर्षों से भुगतान अटका होने के कारण संबंधित कंपनियां लगातार अधिकारियों, विभागीय प्रमुखों और मंत्रियों के चक्कर काट रही हैं। पिछले कुछ समय में भुगतान को लेकर दबाव बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।
छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी का नेतृत्व चिकित्सा शिक्षा विभाग (डीएमई) के स्तर पर किया जाएगा। कमेटी में अवर सचिव सोन साहू, मेडिकल कॉलेज के प्राध्यापक डॉ. सुमित त्रिपाठी तथा मेडिकल कॉलेज की वित्त अधिकारी रितू कौशिक को शामिल किया गया है। कमेटी का मुख्य काम वर्ष 2018-19 के दौरान किए गए कार्यों, प्रस्तुत बिलों और भुगतान दावों की जांच करना होगा।
समिति यह भी देखेगी कि किन कंपनियों ने वास्तव में सेवाएं प्रदान कीं, किन बिलों का आधार वैध है और किन मामलों में भुगतान नियमों के विपरीत या संदिग्ध परिस्थितियों में मांगा जा रहा है। समिति की रिपोर्ट के बाद ही लंबित 62 करोड़ रूपए के भुगतान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने कमेटी गठन की पुष्टि करते हुए कहा कि यह मामला काफी समय से लंबित और विवादित है। विभिन्न स्तरों पर लगातार इसके संबंध में पत्राचार और दावे किए जा रहे हैं। इसलिए निष्पक्ष जांच के लिए समिति बनाई गई है। समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी और उसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तथा भुगतान का निर्णय लिया जाएगा।
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्षों से लंबित भुगतानों में कितना हिस्सा वास्तविक कार्यों का है और कितना हिस्सा जांच के दायरे में आता है। ऐसे में डीकेएस अस्पताल से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
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2018-19 के बहुचर्चित घोटाले से जुड़ा है मामला
मामले को लेकर जांच, एफआईआर और लंबी कानूनी प्रक्रिया चली, लेकिन इसके बावजूद कई कंपनियों के भुगतान अब तक लंबित हैं। सूत्रों के मुताबिक 62 करोड़ रूपए के जिन भुगतानों पर विवाद है, उनमें क्लीन टेक फर्म का करीब 4.35 करोड़ रूपए का भुगतान भी शामिल है। बताया जा रहा है कि इस भुगतान को जारी कराने के लिए संबंधित फर्म ने दो बार स्वास्थ्य मंत्री के स्तर पर भी दबाव बनवाया। हालांकि विभागीय अधिकारियों ने भुगतान पर तत्काल निर्णय लेने से इनकार करते हुए पहले पूरे मामले की जांच कराने का फैसला लिया है।
सफाई ठेके के भुगतान पर भी उठे सवाल
इसके बाद कई भुगतनों पर सवाल उठे और कुछ बिलों का भुगतान रोक दिया गया। करीब आठ वर्षों से भुगतान अटका होने के कारण संबंधित कंपनियां लगातार अधिकारियों, विभागीय प्रमुखों और मंत्रियों के चक्कर काट रही हैं। पिछले कुछ समय में भुगतान को लेकर दबाव बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।
तीन सदस्यीय कमेटी करेगी बिलों और दावों की जांच
समिति यह भी देखेगी कि किन कंपनियों ने वास्तव में सेवाएं प्रदान कीं, किन बिलों का आधार वैध है और किन मामलों में भुगतान नियमों के विपरीत या संदिग्ध परिस्थितियों में मांगा जा रहा है। समिति की रिपोर्ट के बाद ही लंबित 62 करोड़ रूपए के भुगतान पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
रिपोर्ट के बाद होगा भुगतान पर अंतिम फैसला
विभागीय अधिकारियों का मानना है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वर्षों से लंबित भुगतानों में कितना हिस्सा वास्तविक कार्यों का है और कितना हिस्सा जांच के दायरे में आता है। ऐसे में डीकेएस अस्पताल से जुड़े पुराने विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
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