छत्तीसगढ़ में नई ईवी पॉलिसी: हर 25 KM पर मिलेंगे चार्जिंग स्टेशन, 24 घंटे सर्विस
Harrison Masih | May 19, 2026, 19:53 IST
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सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए नई ईवी नीति लागू की है, जिसके तहत राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर हर 25 किलोमीटर पर सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे।
छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए बड़ा और दूरगामी फैसला लिया है। नई नीति के तहत अब राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दोनों दिशाओं में हर 25 किलोमीटर की दूरी पर सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य आधारित ट्रांसपोर्ट नेटवर्क तैयार करना है।
नई व्यवस्था लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और अन्य ईवी वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तक भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार इसे प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
नई नीति में लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके तहत हर 100 किलोमीटर पर फास्ट चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए गए हैं। इन स्टेशनों पर केवल फास्ट चार्जिंग ही नहीं, बल्कि बैटरी स्वैपिंग सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। यानी वाहन चालक कुछ ही मिनटों में पुरानी बैटरी बदलकर नई बैटरी के साथ अपनी यात्रा जारी रख सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्वैपिंग तकनीक से चार्जिंग में लगने वाला समय काफी कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा अधिक आसान व सुविधाजनक बनेगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में लोगों की झिझक भी कम हो सकती है।
![Chhattisgarh EV policy]()
इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ भूमि विकास नियम 1984 में संशोधन किया है। संशोधित नियमों के तहत अब शहरों, रिहायशी कॉलोनियों, बाजारों, औद्योगिक क्षेत्रों और राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों तक व्यापक ईवी चार्जिंग नेटवर्क विकसित करने का रास्ता साफ हो गया है।
सरकार ने पहली बार इन-बिल्डिंग मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग सिस्टम को भी नियमों में शामिल किया है। इससे तकनीकी रूप से आधुनिक और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी।
नई नीति के तहत होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, जिला केंद्रों और माल परिवहन परिसरों में भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जा सकेंगे। इसके लिए संबंधित परिसरों में ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर हेतु अलग स्थान आरक्षित करना अनिवार्य होगा। सरकार का मानना है कि यदि लोगों को घर, बाजार और कार्यस्थल के आसपास चार्जिंग सुविधा मिलेगी तो इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ेगा।
नई गाइडलाइन के अनुसार बड़े परिसरों और स्टैंडअलोन चार्जिंग स्टेशनों में कुल पार्किंग क्षमता के कम से कम 20 प्रतिशत हिस्से को इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आरक्षित रखना होगा। इसी हिस्से में चार्जिंग प्वाइंट विकसित किए जाएंगे। चार्जिंग सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और बिजली मीटरिंग की जिम्मेदारी सर्विस प्रोवाइडर की होगी। सरकार का मानना है कि इस नीति से निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश में आधुनिक ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो सकेगा।
सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। मजबूत चार्जिंग नेटवर्क बनने से इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने, प्रदूषण कम होने और लोगों के ईंधन खर्च में राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है तो छत्तीसगढ़ आने वाले समय में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
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नई व्यवस्था लागू होने के बाद इलेक्ट्रिक कार, स्कूटर और अन्य ईवी वाहन चालकों को चार्जिंग के लिए लंबी दूरी तक भटकना नहीं पड़ेगा। सरकार इसे प्रदेश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मान रही है।
हर 100 KM में फास्ट चार्जिंग सुविधा
विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी स्वैपिंग तकनीक से चार्जिंग में लगने वाला समय काफी कम होगा और लंबी दूरी की यात्रा अधिक आसान व सुविधाजनक बनेगी। इससे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में लोगों की झिझक भी कम हो सकती है।
Chhattisgarh EV policy
जमीन विकास नियमों में बड़ा बदलाव
सरकार ने पहली बार इन-बिल्डिंग मोबाइल नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर और बैटरी स्वैपिंग सिस्टम को भी नियमों में शामिल किया है। इससे तकनीकी रूप से आधुनिक और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी।
होटल, ढाबे और बाजारों में भी लगेंगे चार्जिंग स्टेशन
पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में बनेंगे चार्जिंग प्वाइंट
पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता घटाने की तैयारी
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