दो विदेशी युवतियों को पुलिस ने दो महीने तक गुपचुप हिरासत में रखा, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
Arun Tiwari | Apr 30, 2026, 15:06 IST
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छत्तीसगढ़ पुलिस ने दो विदेशी युवतियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के दो महीने तक हिरासत में रखा, जिनका वीजा समाप्त हो गया था। इन युवतियों की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
Raipur : छत्तीसगढ़ पुलिस ने दो विदेशी युवतियों को बिना बताए दो महीने तक हिरासत में रखा। 2 महीने बाद एफआईआर दर्ज की गई।
अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए
केन्द्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। साथ ही, याचिकाकर्ता को भी प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले के अनुसार तेलीबांधा थाना पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि थाना क्षेत्र के एक होटल में उज्बेकिस्तान की दो युवतियां अवैध रूप से रह रही हैं।
इस सूचना के आधार पर फरवरी 2026 में पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। चूंकि मामला विदेशी नागरिकों से जुड़ा था, इसलिए जांच की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को सौंप दी गई।
याचिका में यह प्रमुख रूप से उठाया गया है कि पुलिस ने युवतियों को 9 जनवरी 2026 को हिरासत में लिया, जबकि इस मामले में एफआईआर क्रमांक 117/2026 करीब दो महीने बाद, 12 मार्च 2026 को दर्ज की गई।
इस दौरान उन्हें बिना किसी विधिक प्रक्रिया के हिरासत में रखा गया, जो प्रथम दृष्टया अवैध माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि न तो युवतियों को औपचारिक रूप
से गिरफ्तार किया गया और न ही निर्धारित समय के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। यह गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
याचिका में 16 अप्रैल 2026 को रायपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा दिए गए आदेश का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें डिफॉल्ट बेल, कंपाउंडिंग और डिपोर्टेशन से जुड़े पहलुओं पर टिप्पणी की गई थी।
अधिवक्ता ने दलील दी कि बिना न्यायिक जांच के लंबे समय तक हिरासत में रखना पॉवर के दुरुपयोग का उदाहरण है।
याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी कहा कि दोनों युवतियां उज्बेकिस्तान की नागरिक हैं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। वे भारत में अपने परिचितों और रिश्तेदारों से मिलने आई थीं।
उनके पास वैध पासपोर्ट था और वीजा का समाप्त होना अधिकतम एक तकनीकी उल्लंघन हो सकता है।
यह भी आरोप लगाया गया कि हिरासत में लिए जाने के बाद उनके पासपोर्ट और वीजा दस्तावेज खो गए, जिसका खामियाजा उन पर नहीं डाला जा सकता।
मामले में राज्य और केन्द्र सरकार की ओर से पेश डिप्टी एडवोकेट जनरल ने जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए दो सप्ताह का समय दे दिया।
इसके बाद याचिकाकर्ता को भी अपना प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता के प्रतिउत्तर के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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अवैध रूप से भारत में रह रही उज्बेकिस्तान की दो युवतियों की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए
केन्द्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। साथ ही, याचिकाकर्ता को भी प्रतिउत्तर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
होटल से हिरासत में ली गई थीं युवतियां
इस सूचना के आधार पर फरवरी 2026 में पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। चूंकि मामला विदेशी नागरिकों से जुड़ा था, इसलिए जांच की जिम्मेदारी इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) को सौंप दी गई।
हिरासत पहले, एफआईआर बाद में
इस दौरान उन्हें बिना किसी विधिक प्रक्रिया के हिरासत में रखा गया, जो प्रथम दृष्टया अवैध माना जा रहा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि न तो युवतियों को औपचारिक रूप
से गिरफ्तार किया गया और न ही निर्धारित समय के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। यह गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े कानूनी प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है।
मजिस्ट्रेट के आदेश का भी हवाला
अधिवक्ता ने दलील दी कि बिना न्यायिक जांच के लंबे समय तक हिरासत में रखना पॉवर के दुरुपयोग का उदाहरण है।
वीजा उल्लंघन को बताया तकनीकी गलती
उनके पास वैध पासपोर्ट था और वीजा का समाप्त होना अधिकतम एक तकनीकी उल्लंघन हो सकता है।
यह भी आरोप लगाया गया कि हिरासत में लिए जाने के बाद उनके पासपोर्ट और वीजा दस्तावेज खो गए, जिसका खामियाजा उन पर नहीं डाला जा सकता।
कोर्ट ने मांगा जवाब
इसके बाद याचिकाकर्ता को भी अपना प्रतिउत्तर दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अब इस मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता के प्रतिउत्तर के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
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