गारे पालमा में होगा खनन : सुप्रीम कोर्ट ने पलटा NGT का फैसला
Arun Tiwari | Aug 01, 2026, 19:34 IST
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के गारे पालमा सेक्टर-II कोयला खदान में महाजेनको को खनन जारी रखने की अनुमति दी है। हालांकि नई जनसुनवाई अनिवार्य होगी। एनजीटी भोपाल इसकी निगरानी करेगा और पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया पूरी कराएगा।
Raipur : सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले स्थित गारे पालमा (सेक्टर-II) कोयला खदान से जुड़े मामले में महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) को बड़ी राहत देते हुए खनन कार्य जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि परियोजना के लिए पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया नई जनसुनवाई के बिना पूरी नहीं मानी जाएगी।
अदालत ने नई जनसुनवाई कराए जाने की निगरानी का जिम्मा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को सौंप दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि परियोजना से जुड़ी अधिकांश आवश्यक शर्तों का पहले ही पालन किया जा चुका है। ऐसे में केवल इस आधार पर कि नई जनसुनवाई अभी तक नहीं कराई गई है, खनन गतिविधियों को पूरी तरह रोकना उचित नहीं होगा। अदालत ने माना कि जनसुनवाई पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसे हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए।
अफ्रेश शब्द की व्याख्या भी स्पष्ट
क्या है पूरा मामला
ट्रिब्यूनल का मानना था कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी किए बिना पर्यावरणीय मंजूरी देना पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप नहीं था। एनजीटी के इसी फैसले को महाराष्ट्र स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कंपनी को फिलहाल खनन जारी रखने की राहत दी, लेकिन नई जनसुनवाई कराने की अनिवार्यता भी बरकरार रखी।
एनजीटी करेगा पूरी प्रक्रिया की निगरानी
विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन पर जोर
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने गारे पालमा कोयला खदान पर क्या फैसला दिया?
सुप्रीम कोर्ट ने महाजेनको को गारे पालमा सेक्टर-II कोयला खदान में खनन जारी रखने की अनुमति दे दी है। हालांकि नई जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी होगा। - नई जनसुनवाई की निगरानी कौन करेगा?
सुप्रीम कोर्ट ने नई जनसुनवाई प्रक्रिया की निगरानी की जिम्मेदारी भोपाल स्थित एनजीटी की केंद्रीय पीठ को सौंपी है। - एनजीटी ने पहले पर्यावरण मंजूरी क्यों रद्द की थी?
एनजीटी ने माना था कि जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी किए बिना पर्यावरणीय मंजूरी दी गई थी। इसलिए उसने मंजूरी की दोबारा समीक्षा और नई जनसुनवाई के निर्देश दिए थे।
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