छत्तीसगढ़ में हमर लैब बंद , 6 हजार तकनीशियन बनेंगे दफ्तर के बाबू
Aishwarya Dwivedi | Jun 28, 2026, 12:31 IST
हमारी लैब बंद, टेक्नीशियन बने क्लर्क
छत्तीसगढ़ में हमर लैब को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी है। इससे प्रभावित होने वाले 6 हजार सरकारी लैब तकनीशियनों को अब दूसरे विभागों में बाबू या क्लर्क बनाने का ऑफर मिला है।
समझें क्या है पूरा मामला
निजी हाथों में जाएगी कमान
इन सरकारी लैब में सालों से मरीजों के खून और यूरिन की जांच हो रही है। अब यहां करीब 6 हजार मेडिकल लैब तकनीशियन (MLT – Medical Lab Technician) काम कर रहे हैं। निजी हाथों में कमान जाते ही इन सरकारी तकनीशियनों के पास काम नहीं बचेगा। इसे देखते हुए स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों ने नया रास्ता निकाला है। अफसरों ने तकनीशियनों के प्रतिनिधिमंडल से खुद विकल्प मांगा है।
तकनीशियनों को बाबू बनाने का ऑफर
पंचायत विभाग में क्लर्क बनने का ऑफर भी इन्हें दिया जा रहा है। अचानक आए इस फैसले से 15 से 20 साल से सेवाएं दे रहे तकनीशियन हैरान हैं। इस समय पूरे स्वास्थ्य विभाग में खलबली मची हुई है। इन कर्मचारियों का चयन किसी सामान्य भर्ती प्रक्रिया से नहीं हुआ था। इन्होंने बेहद कठिन प्रतियोगी परीक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए यह नौकरी पाई थी।
अनुभव और विशेषज्ञता पर सवाल
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अभी इस बारे में अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है। अधिकारियों और एमएलटी प्रतिनिधियों के बीच लगातार चर्चा चल रही है। चर्चा से इतना साफ हो गया है कि लैब सेवाएं निजी हाथों में जरूर जाएंगी। इसके साथ ही बड़ी संख्या में तकनीकी कर्मचारियों की जिम्मेदारियां पूरी तरह बदल दी जाएंगी।
चरणबद्ध तरीके से होगा निजीकरण
अगले चरणों में बाकी जिला अस्पतालों की लैब भी बंद होंगी। इसके बाद सीएचसी (CHC – Community Health Centre) और पीएचसी (PHC – Primary Health Centre) की लैब भी इस दायरे में आएंगी। लैब सेवाओं के निजी हाथों में जाते ही तकनीकी स्टाफ का पूरा सेटअप बदल जाएगा।
तकनीशियनों को मिल सकते हैं ये काम :
- आयुष्मान भारत योजना में कार्ड बनाना और बाबूगिरी का काम करना।
- फूड एंड ड्रग विभाग में ड्रग इंस्पेक्टरों के असिस्टेंट का काम देखना।
- सीजीएमएससी में दवा और सामग्री प्रबंधन के डिपो संभालना।
- पंचायत विभाग में बाबूओं की तरह कार्यालय की जिम्मेदारियां निभाना।
- बचे हुए तकनीशियनों को अन्य प्रशासनिक इकाइयों में एडजस्ट करना।
FAQ
- छत्तीसगढ़ में 'हमर लैब' क्यों बंद की जा रही हैं?
उत्तर: छत्तीसगढ़ सरकार चरणबद्ध तरीके से सरकारी पैथोलॉजी लैब का निजीकरण करने जा रही है। लैब को निजी एजेंसी को सौंपने की तैयारी के कारण इन्हें बंद किया जा रहा है। - कितने लैब तकनीशियन प्रभावित होंगे और उन्हें क्या विकल्प मिला है?
उत्तर: इस फैसले से करीब 6 हजार मेडिकल लैब तकनीशियन प्रभावित होंगे। उन्हें आयुष्मान योजना, सीजीएमएससी, फूड एंड ड्रग विभाग या पंचायत विभाग में बाबू या क्लर्क बनने का विकल्प दिया जा रहा है।
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