हाईकोर्ट ने खारिज की हसदेव अरण्य पर रिट अपील; कहा- वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी, अब रोक संभव नहीं

Aishwarya Dwivedi | Apr 25, 2026, 23:28 IST
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बिलासपुर हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य मामले में रिट अपील खारिज की। कोर्ट ने कहा कि वैधानिक मंजूरियां पूरी हो चुकी हैं, इसलिए परियोजना पर रोक संभव नहीं, याचिका में देरी और खामियां भी पाई गईं।

NEWS IN SHORT

  • हाईकोर्ट ने रिट अपील खारिज, सिंगल बेंच फैसला बरकरार
  • पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं
  • वैधानिक मंजूरी मिलने के बाद परियोजना रोकना उचित नहीं
  • याचिका में देरी और तथ्य अधूरे, कोर्ट ने माना
  • फॉरेस्ट राइट्स एक्ट से मंजूरी रद्द करने का आधार नहीं

NEWS IN DETAIL

छत्तीसगढ़ के चर्चित हसदेव अरण्य क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और माइनिंग से जुड़ी रिट अपील पर बिलासपुर हाईकोर्ट ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। छत्तीसगढ़ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने इस मामले में दायर याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। अदालत ने 8 अक्टूबर 2025 को सिंगल बेंच द्वारा दिए गए पूर्व आदेश को सही ठहराते हुए उसे बरकरार रखा है।

पर्यावरण बनाम विकास पर कोर्ट की टिप्पणी

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने एक बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि, "सैद्धांतिक रूप से यह सच है कि आर्थिक मुआवजा कभी भी पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई नहीं कर सकता।" हालांकि, न्यायालय ने यह भी साफ किया कि यदि किसी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण और वन डायवर्जन (Forest Diversion) जैसी सभी वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और वहां लंबे समय से काम चल रहा है, तो स्थापित कानूनी ढांचे को दरकिनार नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ताओं की दलीलों में मिली खामियां

हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए याचिकाकर्ताओं की ओर से की गई देरी और तथ्यों की कमी पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि:

  • याचिका दायर करने में अनावश्यक विलंब किया गया।
  • मूल आदेशों को सीधे चुनौती नहीं दी गई, जिससे अपील का आधार कमजोर रहा।
  • फॉरेस्ट राइट्स एक्ट 2006 के तहत माइनिंग और वन डायवर्जन की मंजूरी रद्द करने का कोई ठोस आधार पेश नहीं किया गया।

पुरानी मंजूरियां रहेंगी बरकरार

अदालत ने माना कि याचिका में उठाए गए अधिकांश मुद्दे पहले ही विभिन्न न्यायिक फैसलों के जरिए तय किए जा चुके हैं। इस फैसले के बाद हसदेव अरण्य क्षेत्र में चल रही परियोजनाओं को बड़ी कानूनी राहत मिल गई है, क्योंकि वर्तमान में दी गई माइनिंग और वन क्लीयरेंस की मंजूरियां कानूनी रूप से वैध मानी गई हैं।

निष्कर्ष

बिलासपुर हाईकोर्ट ने हसदेव अरण्य मामले में रिट अपील खारिज कर सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने माना कि पर्यावरणीय नुकसान की भरपाई आर्थिक मुआवजे से संभव नहीं, लेकिन वैधानिक मंजूरियों और लंबे समय से चल रही परियोजनाओं को इस स्तर पर रद्द करना उचित नहीं है।

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  • बिलासपुर हाईकोर्ट
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  • छत्तीसगढ़ चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा
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