अनुकंपा नियुक्ति का नया नियम, बड़े बच्चे को मिलेगा पहला हक
Aishwarya Dwivedi | Aug 17, 2026, 14:06 IST
हाई कोर्ट में अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के नियम
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में विवाद होने पर सीनियरिटी के आधार पर बड़े बच्चे को प्राथमिकता मिलेगी। कोर्ट ने मुंगेली डीईओ का फैसला रद्द कर दिया।
समझें क्या है पूरा मामला
अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट का आदेश
अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य मामला
जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने अगस्त 2019 में फैसला सुनाया। उन्होंने छोटे बेटे राजकुमार को अनुकंपा नौकरी के लिए चुना। इस फैसले के खिलाफ बड़े बेटे जितेंद्र ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में सीनियरिटी को मुख्य आधार बनाया गया था।
हाई कोर्ट का सख्त रुख
अदालत ने पटना और झारखंड हाई कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में जेष्ठता ही मुख्य आधार होगी। डीईओ का पुराना आदेश तुरंत प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। अब 30 दिनों में बड़े बेटे की पात्रता जांच कर फैसला होगा।
सीनियरिटी और पद का प्रभार
सरकार ने अदालत में अपना पक्ष मजबूती से रखा। मतावले मूल रूप से प्रिंसिपल थे और केवल बीईओ का प्रभार संभाल रहे थे। कलेक्टर ने उनके खिलाफ लापरवाही की रिपोर्ट भेजी थी। इसलिए प्रशासन ने दूसरे अधिकारी को जिम्मेदारी सौंप दी थी।
प्रभार सौंपना एक अस्थायी व्यवस्था
FAQ
- अनुकंपा नियुक्ति में विवाद होने पर प्राथमिकता किसे मिलेगी?
छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के अनुसार, यदि एक से अधिक योग्य दावेदार हैं तो बड़े बच्चे को प्राथमिकता दी जाएगी। - भारत में अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
उत्तर: सेवाकाल के दौरान किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके परिवार को तत्काल वित्तीय संकट और भुखमरी से बचाना। - दूसरी शादी से जन्मी संतान के अनुकंपा नियुक्ति में अधिकारों को लेकर अदालत का क्या रुख है?
उत्तर: कानून के तहत दूसरी शादी से जन्मी संतान भी मृत कर्मचारी की कानूनी वारिस (Legal Heir) मानी जाती है और अनुकंपा नौकरी की हकदार होती है।
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