दंतेवाड़ा से दिल्ली, आईपीएस से आईएएस तक ....नम्रता जैन की प्रेरक यात्रा
Harrison Masih | Jun 25, 2026, 18:41 IST
आईएएस नम्रता जैन
छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की IAS नम्रता जैन की प्रेरणादायक कहानी, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों और असफलताओं को पीछे छोड़ UPSC में ऑल इंडिया रैंक 12 हासिल की। जानिए उनका बचपन, यूपीएससी सफर, IPS से IAS बनने तक की यात्रा और प्रशासनिक उपलब्धियों के बारे में।
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले की एक साधारण लड़की ने अपने सपनों को ऐसा आकार दिया कि पूरे देश में उसका नाम चमक उठा। यह कहानी है आईएएस नम्रता जैन की, जिन्होंने संघर्षों, असफलताओं और कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत बनाकर यूपीएससी में ऑल इंडिया रैंक 12 हासिल की और देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में जगह बनाई।
दंतेवाड़ा जिले के गीदम क्षेत्र की नम्रता जैन एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता झंवरलाल जैन व्यवसायी हैं, जबकि मां किरण जैन गृहिणी हैं।परिवार की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं, लेकिन कई दशक पहले उनका परिवार बस्तर अंचल में आकर बस गया था। नम्रता की शुरुआती शिक्षा करली स्थित निर्मल निकेतन स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने भिलाई के केपीएस स्कूल से गणित विषय के साथ उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। आगे चलकर उन्होंने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
दंतेवाड़ा में बचपन बिताने के दौरान नम्रता ने नक्सल हिंसा को बेहद करीब से देखा। स्कूल के दिनों में गीदम थाने पर नक्सलियों की गोलीबारी की घटना ने उनके मन में कई सवाल खड़े कर दिए। वे सोचने लगीं कि आखिर समाज में बदलाव कैसे लाया जा सकता है और लोगों को हिंसा के रास्ते से शांति की ओर कैसे मोड़ा जा सकता है। इसी दौरान स्कूल के एक कार्यक्रम में आए एक कलेक्टर के भाषण ने उनकी सोच को नई दिशा दी। जब उनके पिता ने उन्हें बताया कि एक आईएएस अधिकारी समाज और प्रशासन में कितना बड़ा बदलाव ला सकता है, तभी उन्होंने तय कर लिया कि उन्हें भी प्रशासनिक सेवा में जाना है।
दिल्ली जाकर यूपीएससी की तैयारी शुरू करने वाली नम्रता के लिए यह सफर आसान नहीं था। वर्ष 2015 में दिए गए पहले प्रयास में वे प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2016 में दूसरे प्रयास में उन्होंने शानदार वापसी की। प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू तीनों चरणों को पार करते हुए उन्होंने देशभर में 99वीं रैंक हासिल की और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुईं। उन्हें मध्य प्रदेश कैडर मिला। यह उपलब्धि भी खास थी, क्योंकि बस्तर संभाग से अखिल भारतीय स्तर पर 100 से कम रैंक हासिल करने वाली वे पहली महिला बनीं।
हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान भी नम्रता ने अपने सपने को जीवित रखा। उन्होंने तैयारी जारी रखी और तीसरे प्रयास में इतिहास रच दिया। यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 12 हासिल की और भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के लिए चयनित हो गईं। समाजशास्त्र उनका वैकल्पिक विषय था। इस सफलता ने उन्हें देश के शीर्ष प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों की सूची में शामिल कर दिया। उनकी तैयारी का एक बड़ा हिस्सा ऑनलाइन अध्ययन पर आधारित था। लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास ने उन्हें देश के सबसे कठिन माने जाने वाले परीक्षा तंत्र में शीर्ष स्थान दिलाया।
यूपीएससी की तैयारी के दौरान ही दिल्ली में उनकी मुलाकात निखिल अशोक राखेचा से हुई, जो बाद में छत्तीसगढ़ कैडर के आईपीएस अधिकारी बने। इनकी शादी भी सादगीपूर्ण तरीके से हुई। जब नम्रता महासमुंद जिले के सरायपाली में एसडीएम थीं, तब दोनों ने महासमुंद कलेक्टर कार्यालय में विवाह किया। यह शादी अपनी सादगी और व्यावहारिकता के कारण काफी चर्चा में रही।
आईएएस बनने के बाद नम्रता जैन ने 26 अगस्त 2019 को सेवा ज्वाइन की। उन्होंने बलौदाबाजार-भाटापारा और रायपुर में सहायक कलेक्टर के रूप में प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसके बाद वे सरायपाली में एसडीएम रहीं।उन्होंने कोरिया और बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में जिला पंचायत सीईओ के रूप में भी जिम्मेदारियां संभालीं। अपने कार्यकाल में उन्होंने महिला सशक्तिकरण, स्व-सहायता समूहों के विकास और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। वे राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं। उन्होंने महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम किया है। अब नारायणपुर कलेक्टर के रूप में काम कर रहीं हैं।
नम्रता जैन की कहानी केवल एक आईएएस अधिकारी की जीवनी नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधन, कठिन परिस्थितियां और शुरुआती असफलताएं भी किसी व्यक्ति के सपनों को रोक नहीं सकतीं। दंतेवाड़ा की गलियों से निकलकर देश की शीर्ष प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने वाली नम्रता जैन आज हजारों युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उनकी यात्रा बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर हो, तो किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
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दंतेवाड़ा जिले के गीदम क्षेत्र की नम्रता जैन एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता झंवरलाल जैन व्यवसायी हैं, जबकि मां किरण जैन गृहिणी हैं।परिवार की जड़ें राजस्थान से जुड़ी हैं, लेकिन कई दशक पहले उनका परिवार बस्तर अंचल में आकर बस गया था। नम्रता की शुरुआती शिक्षा करली स्थित निर्मल निकेतन स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने भिलाई के केपीएस स्कूल से गणित विषय के साथ उच्च माध्यमिक शिक्षा पूरी की। आगे चलकर उन्होंने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की।
एक घटना जिसने बदल दी जिंदगी की दिशा
IAS Namrata jain
असफलता से नहीं टूटा हौसला
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IAS नम्रता जैन
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शानदार प्रशासनिक कार्यकाल
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