छत्तीसगढ़ जेल प्रशासन: सुविधाओं को तरसीं महिला अधिकारी, गृहमंत्री से गुहार
VINAY VERMA | Aug 08, 2026, 13:18 IST
जेल महिला अधिकारी सुरक्षा का मुद्दा
छत्तीसगढ़ की जेलों में महिला अधिकारियों के लिए अलग प्रसाधन सुविधा न होने से सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दुर्ग जेल की महिला अफसर ने गृहमंत्री से सुरक्षा व मूलभूत सुविधाओं की गुहार लगाई है।
छत्तीसगढ़ की जेलों में महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। केंद्रीय, जिला और उप जेलों के प्रशासनिक भवनों में काम करने वाली महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए अलग शौचालय तक नहीं है। मजबूरी में उन्हें पुरुषों के लिए बने शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जेल जैसे हाई सिक्योरिटी परिसर में यह स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है।
केंद्रीय जेल प्रशासन दुर्ग में पदस्थ सहायक जेल अधीक्षक वर्षा संतोष कुंजाम ने गृहमंत्री विजय शर्मा को पत्र लिखकर अपनी परेशानी बताई है। उनका कहना है कि करीब 16 साल की सेवा में जगदलपुर, रायपुर और दुर्ग जेल में काम किया। लेकिन प्रशासनिक भवनों में महिलाओं के लिए अलग प्रसाधन की सुविधा नहीं मिली। यानी इतने साल में पद बदले, जगह बदली, लेकिन समस्या नहीं बदली।
पत्र में अधिकारी ने सुरक्षा को लेकर गंभीर अनुभव साझा किया है। उनका कहना है कि पुरुष शौचालय इस्तेमाल करते समय किसी पुरुष कर्मचारी या बंदी के अचानक पहुंचने का डर बना रहता है। कई बार शौचालय के बाहर का दरवाजा जोर से धक्का देकर खोलने की कोशिश की गई। अंदर स्थायी कुंडी या सिटकिनी की व्यवस्था भी नहीं होने का आरोप है। सोचिए, ड्यूटी जेल में और डर शौचालय के भीतर!
जेल विभाग का काम सुरक्षा व्यवस्था संभालना है। यहां बंदियों की निगरानी से लेकर हाई सिक्योरिटी इंतजाम तक होते हैं। लेकिन इसी परिसर में महिला कर्मचारी खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रही हैं। मामला सिर्फ शौचालय का नहीं है। यह कार्यस्थल पर सम्मान, निजता और सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। अगर एक महिला अधिकारी को इस सुविधा के लिए गृहमंत्री तक पत्र लिखना पड़े, तो बाकी स्टाफ की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
मामला सामने आने के बाद शासन स्तर पर भी हलचल हुई है। जेल विभाग के अवर सचिव डॉ. विवेक श्रीवास ने महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाओं को पत्र भेजा है। इसमें नियम के मुताबिक जरूरी कार्रवाई कर प्रतिवेदन देने को कहा गया है। अब देखना होगा कि फाइल आगे बढ़ती है या फिर मामला सरकारी पत्राचार में ही अटक जाता है।
महिला कर्मचारियों के लिए मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायतें सिर्फ जेल विभाग तक सीमित नहीं हैं। पुलिस थानों, तहसील कार्यालयों और दूसरे सरकारी दफ्तरों में भी महिला शौचालय की कमी के मामले सामने आते रहे हैं। कई जगह महिला स्टाफ को आसपास के निजी स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। सवाल है कि सरकारी भवन बनाते समय महिला कर्मचारियों के लिए बुनियादी सुविधा आखिर प्राथमिकता क्यों नहीं बनती?
इस मामले में सरकार के सामने सीधा टेस्ट है। क्या सिर्फ संबंधित अधिकारी से रिपोर्ट मांगकर मामला खत्म होगा या पूरे प्रदेश की जेलों का ऑडिट कराया जाएगा? हर केंद्रीय, जिला और उप जेल में महिला स्टाफ की संख्या, अलग शौचालय, चेंजिंग रूम और सुरक्षा इंतजाम की स्थिति देखनी होगी। एक जगह की शिकायत को अपवाद मानकर छोड़ना आसान है। लेकिन अगर यही समस्या कई जेलों में है तो यह सिस्टम की खामी होगी।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकारें बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन सुरक्षा का मतलब सिर्फ गेट पर गार्ड और कैमरे नहीं है। महिला कर्मचारी को काम के दौरान सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल देना भी उतना ही जरूरी है। दुर्ग जेल की अधिकारी का पत्र अब पूरे जेल विभाग के लिए आईना है। सरकार चाहे तो इसे एक शिकायत मानकर निपटा सकती है। या फिर इसे पूरे सिस्टम की सफाई की शुरुआत बना सकती है।
महिला स्टाफ के लिए अलग टॉयलेट क्यों नहीं?
सहायक अधीक्षक को गृहमंत्री तक क्यों लगानी पड़ी गुहार
16 साल में समस्या दूर क्यों नहीं हुई?
रायपुर और दुर्ग सेंट्रल जेल के अलावा अन्य कां क्या है हाल?
अब सिर्फ जांच होगी या कार्रवाई भी?
तालपुरी ट्रिपल मर्डर में फांसी टली, हाईकोर्ट ने कहा- मरते दम तक जेल
नरेश मीणा ने नगरफोर्ट थाने में किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल
तहलका के तरुण तेजपाल को रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल जेल की सजा सुनाई
ऑटो चालक को कुचलकर मारने वाले हाथी को मिली सशर्त जमानत, महावत को भेजा जेल
16 साल की नौकरी, समस्या जस की तस
दरवाजे पर धक्का, अंदर डर
जेल में सुरक्षा, लेकिन महिला स्टाफ?
अब अफसरों में पत्राचार शुरू
पुरानी शिकायतों से नहीं लिया सबक
गृह विभाग के सामने अब असली परीक्षा
नारे नहीं, जमीन पर इंतजाम चाहिए
5 बड़े सवाल
सहायक अधीक्षक को गृहमंत्री तक क्यों लगानी पड़ी गुहार
16 साल में समस्या दूर क्यों नहीं हुई?
रायपुर और दुर्ग सेंट्रल जेल के अलावा अन्य कां क्या है हाल?
अब सिर्फ जांच होगी या कार्रवाई भी?
FAQ
- छत्तीसगढ़ की जेलों के प्रशासनिक भवनों में महिला कर्मचारियों के सामने कौन सी प्रमुख बुनियादी समस्या सामने आई है?
उत्तर: केंद्रीय, जिला और उप जेलों के प्रशासनिक भवनों में महिला अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए अलग शौचालय (प्रसाधन) की सुविधा का न होना। - महिला अधिकारी द्वारा शौचालय उपयोग के दौरान सुरक्षा को लेकर किन गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया है?
उत्तर: पुरुष प्रसाधन का उपयोग करते समय अचानक किसी पुरुष कर्मचारी या बंदी के पहुंचने का भय। शौचालय के दरवाजे को बाहर से जोर से धक्का देकर खोलने का प्रयास। शौचालय के भीतर स्थायी कुंडी या सिटकिनी की व्यवस्था न होना।
यह खबरें भी पढ़ें...
नरेश मीणा ने नगरफोर्ट थाने में किया सरेंडर, कोर्ट ने भेजा जेल
तहलका के तरुण तेजपाल को रेप केस में बॉम्बे हाईकोर्ट ने 10 साल जेल की सजा सुनाई
ऑटो चालक को कुचलकर मारने वाले हाथी को मिली सशर्त जमानत, महावत को भेजा जेल
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari