झीरम फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी, हर आदिवासी परिवार से 20 रूपए चंदा
Arun Tiwari | Sept 19, 2026, 11:40 IST
झीरम फैसले के खिलाफ अपील
झीरम घाटी कांड के NIA विशेष अदालत के फैसले पर आदिवासी समाज ने आपत्ति जताई है। समाज ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई ले जाने का फैसला किया है।
झीरम घाटी कांड को लेकर आदिवासी समाज ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत के फैसले पर आपत्ति जताते हुए उसे हाईकोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। समाज की ओर से 25 मई 2013 को हुई झीरम घाटी की घटना की साजिश की दोबारा जांच कराने और मामले से जुड़े सभी पहलुओं को सामने लाने की मांग की गई है।
समाज ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जाएगा। बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों, झीरम मामले में सजा पाए आरोपियों के परिजनों और आदिवासी समाज के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक में झीरम घाटी मामले में आए फैसले, NIA कोर्ट की जांच और आगे की कानूनी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। समाज ने कहा कि मामले में साजिश और संदिग्ध परिस्थितियों की नए सिरे से जांच जरूरी है।
बैठक में आदिवासी समाज ने कानूनी लड़ाई के लिए आर्थिक संसाधन जुटाने का भी फैसला लिया। इसके तहत प्रत्येक आदिवासी परिवार से 20-20 रुपए सहयोग राशि लेने की बात कही गई। समाज के पदाधिकारियों के मुताबिक, इस राशि का उपयोग मामले से जुड़े कानूनी खर्च और आगे की न्यायिक प्रक्रिया में किया जाएगा।
बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि झीरम घाटी मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके परिवारों के पक्ष को भी सुना जाना चाहिए। समाज का दावा है कि कुछ ऐसे दस्तावेज और तथ्य हैं, जिनकी समीक्षा के आधार पर फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी की जाएगी।
बैठक में आत्मसमर्पित नक्सलियों के बयानों की भी दोबारा समीक्षा किए जाने की मांग उठी। समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि घटना से जुड़े सभी बयानों और दस्तावेजों का व्यापक स्तर पर परीक्षण होना चाहिए। उनका तर्क है कि मामले की पूरी तस्वीर सामने लाने के लिए जांच एजेंसियों के सामने रखे गए तथ्यों की दोबारा पड़ताल जरूरी है।
समाज की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए लोगों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाएगा, लेकिन झीरम घाटी की घटना के पीछे की साजिश और उसके सभी पहलुओं की जांच भी आवश्यक है।बैठक में बताया गया कि बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए।
आदिवासी समाज ने कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर हाईकोर्ट में अपील की तैयारी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया को आगे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
झीरम मामले को लेकर प्रदेश कांग्रेस भी बैठक करने जा रही है। बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में राजीव भवन में होगी। इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता और झीरम मामले से जुड़े नेता एवं पदाधिकारी शामिल होंगे।बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व मंत्री टीएस सिंहदेव, ताम्रध्वज साहू, प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गेंडू सहित झीरम हमले में शहीद हुए नेताओं के परिजनों, घायल लोगों और विधि विशेषज्ञों के शामिल होने की बात कही गई है।
बैठक में झीरम मामले में NIA की विशेष अदालत के हालिया फैसले के बाद आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक हमलों में शामिल रहा है। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद से ही इसके पीछे की साजिश और हमले के पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच और सवाल उठते रहे हैं। अब NIA कोर्ट के फैसले के बाद आदिवासी समाज और कांग्रेस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
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समाज ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक भी ले जाया जाएगा। बस्तर संभाग के छह जिलों के प्रतिनिधियों, झीरम मामले में सजा पाए आरोपियों के परिजनों और आदिवासी समाज के पदाधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक में झीरम घाटी मामले में आए फैसले, NIA कोर्ट की जांच और आगे की कानूनी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। समाज ने कहा कि मामले में साजिश और संदिग्ध परिस्थितियों की नए सिरे से जांच जरूरी है।
हर आदिवासी परिवार से 20 रुपए जुटाने का फैसला:
बैठक में समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि झीरम घाटी मामले में जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है, उनके परिवारों के पक्ष को भी सुना जाना चाहिए। समाज का दावा है कि कुछ ऐसे दस्तावेज और तथ्य हैं, जिनकी समीक्षा के आधार पर फैसले के खिलाफ अपील की तैयारी की जाएगी।
आत्मसमर्पित नक्सलियों के बयानों के पुनर्मूल्यांकन की मांग:
समाज की ओर से यह भी कहा गया कि अदालत के फैसले में दोषी ठहराए गए लोगों के संबंध में न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान किया जाएगा, लेकिन झीरम घाटी की घटना के पीछे की साजिश और उसके सभी पहलुओं की जांच भी आवश्यक है।बैठक में बताया गया कि बस्तर संभाग के बस्तर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों से प्रतिनिधि शामिल हुए।
आदिवासी समाज ने कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेजों की समीक्षा कर हाईकोर्ट में अपील की तैयारी की जाएगी। जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया को आगे सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने का निर्णय भी लिया जा सकता है।
कांग्रेस भी बनाएगी रणनीति:
बैठक में झीरम मामले में NIA की विशेष अदालत के हालिया फैसले के बाद आगे की कानूनी और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी।झीरम घाटी हमला छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े राजनीतिक हमलों में शामिल रहा है। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई थी।
घटना के बाद से ही इसके पीछे की साजिश और हमले के पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग स्तर पर जांच और सवाल उठते रहे हैं। अब NIA कोर्ट के फैसले के बाद आदिवासी समाज और कांग्रेस की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी से यह मामला एक बार फिर चर्चा में है।
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