इन दस नक्सलियों ने किया झीरम कांड, दोषी का बेटा बोला, बेगुनाह को ठहराया गुनहगार
Arun Tiwari | Sept 05, 2026, 18:45 IST
झीरम घाटी हमला
झीरम घाटी कांड में 13 साल बाद आए फैसले के बाद विवाद शुरू हो गया है। NIA कोर्ट ने 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। दोषी जोगा मडकामी के परिवार ने उन्हें निर्दोष बताते हुए सवाल उठाए हैं।
13 साल बाद झीरम कांड का फैसला आ गया है। इस कांड में कोर्ट ने 10 लोगों को दोषी माना है। इस फैसले पर विवाद शुरु हो गया है। दोषी ठहराए गए जोगा मडकामी के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाया है।
बेटे का कहना है कि पिता तो घटना स्थल से 20 किलोमीटर दूर थे। वे एक गांव के सरपंच भी थे। उनको नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया और अब गुनहगार ठहरा दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने भी इसे अधूरा इंसाफ बताया है। कांग्रेस का कहना है कि इसका मास्टर माइंड तो सामने ही नहीं आया। कांग्रेस ने एसआईटी बनाकर इसकी फिर से जांच कराने की मांग की है।
प्रमिला मोडियाम
चेतू लेकाम उर्फ मुन्ना
सुमित्रा मोडियाम
मुक्का मंडावी
कोसा कवासी
आयता मरकाम
जोगा मडकामी
बंजामी सन्ना
महादेव नाग
मडकामी देवा
![झीरम हत्याकांड के आरोपी]()
अदालत के फैसले पर दोषी करार दिए गए जोगा मडकामी के परिजनों ने सवाल उठाए हैं। झीरम घाटी हमले मामले में जगदलपुर की NIA कोर्ट की विशेष अदालत के फैसले के बाद गिरफ्तार आरोपी जोगा मरकाम के बेटे हेमलाल ने अपने पिता को निर्दोष बताया है।
हेमलाल का कहना है कि 13 साल पहले उसके पिता को नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया था। जब यह गिरफ्तारी हुई थी उस समय जोगा मरकाम कटेकल्याण इलाके के चिपाक गांव के सरपंच थे। हेमलाल का कहना है कि उसके पिता निर्दोष है उन्हें जबरन नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया है।
जोगा मरकाम के साले का भी बयान सामने आया है। जोगा मरकाम के साले सतीश कुमार पोडयाम ने घटना के दिन की बात बताते हुए कहा है कि उनके जीजा घटना स्थल से 20 किलोमीटर दूर गांव की एक शादी में शामिल थे। जिनको बाद में नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया था।
इस फैसले पर कांग्रेस ने भी सवाल उठाए हैं। झीरम घाटी हमले मामले के फैसले को कांग्रेस ने अधूरा इंसाफ बताया है। कांग्रेस के संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि NIA के फैसले से हमें कोई राहत नहीं मिली है।
NIA ने कोर्ट के सामने राजनीतिक षड्यंत का खुलासा नही किया। झीरम घाटी के मास्टरमाइंड कौन है इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना को अंजाम देने वाले बड़े नक्सलियों के खिलाफ एफआईआर क्यों नही हुई। कांग्रेस ने राज्य सरकार से SIT गठित कर फिर से जांच की मांग की है।
बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि जगदलपुर की विशेष NIA कोर्ट ने झीरम घाटी मामले में फैसला सुनाया है।.मामले में लंबे इंतजार के बाद सभी आरोपियों को दोषी करार दिया गया है। न्यायलय ने आरोपियों को हत्या और हत्या के प्रयास सहित 14 अलग अलग धाराओं में दोषी करार दिया गया है।
हालांकि दोषियों को सजा का ऐलान नही किया गया है। आने वाली 16 सितंबर को सभी दोषियों को कोर्ट सजा सुनाएगी।कोर्ट के फैसले से बचाव पक्ष असंतुष्ट।अरविंद चौधरी ने कहा है कि वे NIA कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का रास्ता अपनाएंगे।
झीरम घाटी कांड पर 13 साल बाद अदालत का फैसला आया है। छत्तीसगढ़ के राजनीतिक इतिहास में 25 मई 2013 की तारीख शायद ही कभी भुलाई जा सकेगी। इस दिन हुए नक्सली हमले में प्रदेश की एक पूरी राजनीतिक पीढ़ी को खत्म कर दिया गया था।
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से लौट रहे काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल जैसे दिग्गज नेता मारे गए।
NIA की विशेष अदालत ने झीरम मामले में सुनवाई समाप्त और आदेश आ गया परंतु आपके कथन अनुसार आपके पॉकेट में इस घटना का साक्ष्य था, यह साक्ष्य बाहर नहीं आया । आपने साक्ष्य को अदालत के सम्मुख नहीं रखा आप साक्ष्य छुपाने के आरोपी है वह भी उस घटना के जिसमें आपके पार्टी प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष सहित बहुत बड़े नेता मारे गए थे। आपको इस पर स्पष्टीकरण देना चाहिए। कांग्रेस नेतृत्व भी इस पर जवाब देवे।
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बेटे का कहना है कि पिता तो घटना स्थल से 20 किलोमीटर दूर थे। वे एक गांव के सरपंच भी थे। उनको नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया और अब गुनहगार ठहरा दिया गया है। वहीं कांग्रेस ने भी इसे अधूरा इंसाफ बताया है। कांग्रेस का कहना है कि इसका मास्टर माइंड तो सामने ही नहीं आया। कांग्रेस ने एसआईटी बनाकर इसकी फिर से जांच कराने की मांग की है।
ये हैं झीरम कांड के 10 आरोपी :
चेतू लेकाम उर्फ मुन्ना
सुमित्रा मोडियाम
मुक्का मंडावी
कोसा कवासी
आयता मरकाम
जोगा मडकामी
बंजामी सन्ना
महादेव नाग
मडकामी देवा
झीरम हत्याकांड के आरोपी
क्या निर्दोष को बना दिया दोषी :
हेमलाल का कहना है कि 13 साल पहले उसके पिता को नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया था। जब यह गिरफ्तारी हुई थी उस समय जोगा मरकाम कटेकल्याण इलाके के चिपाक गांव के सरपंच थे। हेमलाल का कहना है कि उसके पिता निर्दोष है उन्हें जबरन नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया है।
जोगा मरकाम के साले का भी बयान सामने आया है। जोगा मरकाम के साले सतीश कुमार पोडयाम ने घटना के दिन की बात बताते हुए कहा है कि उनके जीजा घटना स्थल से 20 किलोमीटर दूर गांव की एक शादी में शामिल थे। जिनको बाद में नक्सली बताकर गिरफ्तार किया गया था।
क्या बोले भूपेश:
पहली बात यह है कि झीरम घाटी में रचा गया षडयंत्र दुनिया के लोकतंत्र के इतिहास का सबसे बड़े राजनीतिक नरसंहार था और ऐसे मामले में निचले स्तर के सिर्फ़ 10 नक्सलियों को सज़ा मिलने को न्याय नहीं कहा जा सकता. इस घटना की जांच कर रही एजेंसी एनआईए ने ख़ुद ही कहा था कि झीरम की घटना को 200 लोगों ने अंजाम दिया था. एनआईए स्वयं ने 39 लोगों को मुलज़िम बनाया था. ये और बात है कि जांच में लगातार लापरवाही बरत रही एनआईए 10 से अधिक लोगों को पकड़ ही नहीं पाई. एनआईए ने नक्सलियों के शीर्ष नेताओं के नाम तो पहले ही एफ़आईआर से हटा दिए थे. पता नहीं किसके कहने पर. दूसरी बात यह है कि जाँच आयोग ने सिर्फ़ ‘सुरक्षा व्यवस्था में कमी’ को लेकर जांच की है न कि आपराधिक मामले में सज़ा दिलाने के लिए. सच यही है कि झीरम के पीछे रचे गए भयानक राजनीतिक षडयंत्र की जांच आज तक नहीं हुई है. दूसरी जांच इसलिए नहीं हुई क्योंकि इसका एक स्तर पर एनआईए विरोध करती रही और दूसरे स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के नेता विरोध करते रहे. जांच हुई ही नहीं: कांग्रेस पार्टी और पीड़ित परिवारों की ओर से हमेशा कहा गया कि इस घटना में वृहद राजनीतिक षडयंत्र हुआ है और इसकी जांच आवश्यक है. पर एनआईए ने इसकी जांच की ही नहीं. जब 2020 में शहीद उदय मुदलियार के सुपुत्र जितेंद्र मुदलियार ने शिकायत की तब कहीं जाकर छत्तीसगढ़ पुलिस ने एक दूसरी एफ़आईआर की. पता नहीं क्यों, इस एफ़आईआर पर एनआईए को आपत्ति हो गई और इसके ख़िलाफ़ एजेंसी सुप्रीम कोर्ट चली गई. सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर, 2023 में इस पर फ़ैसला दिया और एनआईए की आपत्ति ख़ारिज कर दी गई. लेकिन तब तक राज्य में फिर भाजपा की सरकार आ गई थी और अब तक ढाई साल में इस एफ़आईआर पर कोई जांच नहीं की गई है. दरअसल भाजपा आपराधिक षडयंत्र की जांच होने ही नहीं देना चाहती. क्यों नहीं होने देना चाहती यह लोग समझते हैं. जांच आयोग में भी भाजपा का अडंगा: वर्ष 2013 में घटना के बाद एक जांच आयोग का गठन किया गया था. इस आयोग को भी ‘सुरक्षा में कमी’ पर जांच करनी थी ना कि ‘आपराधिक मामले में सजा दिलाने’ के लिए. जस्टिस प्रशांत मिश्रा जांच आयोग ने जब अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की तब छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने यह कहा कि यह रिपोर्ट अधूरी है और उसे पूरा करने के लिए जस्टिस मिन्नहाजुद्दीन और जस्टिस सतीश अग्रिहोत्री के नेतृत्व में एक नया जांच आयोग बनाया. इस नए जांच आयोग के ख़िलाफ़ भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष धरमलाल कौशिक हाईकोर्ट पहुंच गए और उनकी याचिका पर इस आयोग पर रोक लगा दी गई. यह रोक आज भी प्रभावी है. जैसा कि मैंने कहा, भाजपा के नेता झीरम में हुए आपराधिक षडयंत्र की जांच होने ही नहीं देना चाहते.जब तक यह जांच नहीं होगी, तब तक झीरम का न्याय अधूरा रहेगा.
झीरम का मास्टर माइंड कौन :
NIA ने कोर्ट के सामने राजनीतिक षड्यंत का खुलासा नही किया। झीरम घाटी के मास्टरमाइंड कौन है इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि घटना को अंजाम देने वाले बड़े नक्सलियों के खिलाफ एफआईआर क्यों नही हुई। कांग्रेस ने राज्य सरकार से SIT गठित कर फिर से जांच की मांग की है।
हाईकोर्ट जाएगा बचाव पक्ष :
हालांकि दोषियों को सजा का ऐलान नही किया गया है। आने वाली 16 सितंबर को सभी दोषियों को कोर्ट सजा सुनाएगी।कोर्ट के फैसले से बचाव पक्ष असंतुष्ट।अरविंद चौधरी ने कहा है कि वे NIA कोर्ट के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का रास्ता अपनाएंगे।
13 साल बाद फैसला :
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से लौट रहे काफिले पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया। इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल जैसे दिग्गज नेता मारे गए।
बीजेपी नेता नरेश चंद्र गुप्ता ने भूपेश से पूछा सवाल
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