कांकेर पदोन्नति घोटाला: जांच में तीन अधिकारी दोषी, लेकिन कार्रवाई सिर्फ दो पर
Harrison Masih | Jun 27, 2026, 13:55 IST
कांकेर पदोन्नति घोटाला 2026
कांकेर शिक्षा विभाग में प्रधानपाठक पदोन्नति और पोस्टिंग प्रक्रिया में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। उच्च स्तरीय जांच समिति ने तत्कालीन डीईओ, एक क्लर्क और समग्र शिक्षा के अधिकारी को अनियमितताओं का दोषी माना।
समझें क्या है पूरा मामला
जांच रिपोर्ट में किनके नाम आए?
हालांकि कार्रवाई के दौरान केवल क्लर्क और डीईओ पर कार्रवाई की गई, जबकि जांच रिपोर्ट में नाम आने के बावजूद वैभव मेघ्राम को पद पर बरकरार रखा गया। यही तथ्य अब सबसे बड़ा विवाद बन गया है।
कैसे सामने आया पदोन्नति घोटाला?
पहला चरण: काउंसिलिंग
- 320 स्वीकृत पदों में से केवल 101 पद भरे गए।
- 219 पद खाली छोड़ दिए गए।
दूसरा चरण: दोबारा काउंसिलिंग
- शेष रिक्त पदों के लिए फिर से प्रक्रिया चलाई गई।
- 123 पद भरे गए।
- इसके बाद भी 96 पद खाली रह गए।
यहीं से शुरू हुआ खेल
रिपोर्ट के मुताबिक पहले जारी पोस्टिंग आदेशों को बदला गया। 93 मामलों में संशोधित आदेश जारी किए गए। यह बदलाव कथित तौर पर बिना वैधानिक अनुमति के किया गया।
कलेक्टर की स्वीकृति के बिना सभी 93 मामलों में एकल संशोधन आदेश जारी कर दिए गए। यही कार्रवाई जांच समिति की नजर में सबसे गंभीर अनियमितता मानी गई।
कार्रवाई में दोहरे मापदंड के आरोप
सूत्रों के अनुसार तत्कालीन डीईओ अशोक पटेल को निलंबित किया गया। सहायक ग्रेड-2 प्रकाश तिवारी पर भी कार्रवाई हुई। लेकिन वैभव मेघ्राम के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई।
इससे सवाल उठ रहे हैं कि जब जांच रिपोर्ट में तीनों की भूमिका समान बताई गई, तो कार्रवाई अलग-अलग क्यों हुई?
भ्रष्टाचार और सिफारिशों के आरोप
अब उठ रहे हैं ये सवाल
- जांच में दोषी पाए गए तीसरे अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- 93 पोस्टिंग आदेशों में बदलाव किसके निर्देश पर किए गए?
- कलेक्टर की अनुमति के बिना संशोधन आदेश कैसे जारी हुए?
- क्या पूरे मामले में और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी?
- क्या लाभ पाने वाले शिक्षकों की सूची की भी समीक्षा की जाएगी?
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