ऑनलाइन गेम का प्यार शादी के बाद हो गया ओवर, हाईकोर्ट पहुंचा मामला
Kanak Durga Jha | Feb 05, 2025, 13:21 IST
Love for online games got over after marriage matter reached HC
कोरबा के युवक और पश्चिम बंगाल की युवती के बीच ऑनलाइन गेम के जरिए दोस्ती हुई और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे। बाद में उन्होंने शादी कर ली।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से अजीब मामला सामने आया है। कोरबा के युवक और पश्चिम बंगाल की युवती के बीच ऑनलाइन गेम के जरिए दोस्ती हुई और दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे। बाद में उन्होंने शादी कर ली।
लेकिन, कुछ समय में ही युवती ने युवक के साथ रहने का इरादा बदल दिया और वो अपनी मां के साथ चली गई। इधर, युवक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। यह याचिका, किसी व्यक्ति को गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखे जाने पर रिहाई दिलाने के लिए दायर की जाती है।
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केस की सुनवाई हुई, तब युवती ने अपने माता-पिता के साथ रहने की बात कही। जिस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि माता-पिता के साथ रहना अवैध हिरासत नहीं है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल ने युवक की याचिका को खारिज कर दिया है।
दरअसल, कोरबा में रहने वाले शंकर गवेल पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर की लड़की के साथ ऑनलाइन गेम खेलता था। साल 2023 में उनकी पहचान हुई। जिसके बाद दोनों आपस में चैट पर बातचीत करने लगे। तब लड़की नाबालिग थी। कुछ समय बाद उनकी दोस्ती हुई। फिर दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगे। जिसके बाद उन्होंने बालिग होने पर शादी करने का फैसला किया।
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नवंबर 2024 में लड़की ने युवक को बताया कि उसके माता-पिता उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए मजबूर कर रहे हैं। उसने युवक के साथ शादी करने की बात कही। साथ ही उसे अपने साथ ले जाने कहा। इस पर युवक 26 नवंबर को इस्लामपुर पहुंचा, जहां युवती उससे मिली। जिसके बाद युवती उसके साथ कोरबा आ गई।
इस बीच 7 दिसंबर को कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में युवक ने युवती को सिंदूर लगाया, मंगलसूत्र और वरमाला डालकर शादी रचा ली। दोनों वयस्क थे और अपनी मर्जी से शादी कर चुके थे। इसके बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे।
इधर, शंकर पत्नी के जाने से परेशान रहने लगा। उसे शक था कि युवती के माता-पिता ने उसे जबरदस्ती रोक लिया है। लिहाजा, परेशान होकर उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका लगाई। इसमें बताया कि उसकी पत्नी वयस्क है। उसने अपनी मर्जी से शादी की है। लेकिन, उसके माता-पिता जबरदस्ती उसे बंधक बनाकर रख लिया है।
साथ ही उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए मजबूर किया जा रहा है। याचिका में युवक ने युवती का जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी भी पेश की, जिससे उसकी वयस्कता साबित हुई।
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इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच में हुई। इस दौरान बताया गया कि युवती अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के साथ रह रही है। उस पर किसी तरह का दबाव नहीं डाला गया है।
युवती ने खुद स्वीकार किया कि वो अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है। लिहाजा, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि युवती अपने माता-पिता के साथ रह रही है, जिसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका लगाने के लिए युवती ने उसे अधिकार भी नहीं दिया है। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने युवक की याचिका खारिज कर दी है।
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लेकिन, कुछ समय में ही युवती ने युवक के साथ रहने का इरादा बदल दिया और वो अपनी मां के साथ चली गई। इधर, युवक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर दी। यह याचिका, किसी व्यक्ति को गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखे जाने पर रिहाई दिलाने के लिए दायर की जाती है।
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केस की सुनवाई हुई, तब युवती ने अपने माता-पिता के साथ रहने की बात कही। जिस पर डिवीजन बेंच ने कहा कि माता-पिता के साथ रहना अवैध हिरासत नहीं है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र अग्रवाल ने युवक की याचिका को खारिज कर दिया है।
जानें क्या है पूरा मामला
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युवक ने मंदिर में युवती से की शादी
इस बीच 7 दिसंबर को कोरबा के सर्वमंगला मंदिर में युवक ने युवती को सिंदूर लगाया, मंगलसूत्र और वरमाला डालकर शादी रचा ली। दोनों वयस्क थे और अपनी मर्जी से शादी कर चुके थे। इसके बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे।
पत्नी के जाने से परेशान होकर पति ने लगाई याचिका
साथ ही उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए मजबूर किया जा रहा है। याचिका में युवक ने युवती का जन्म प्रमाण पत्र की कॉपी भी पेश की, जिससे उसकी वयस्कता साबित हुई।
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हाईकोर्ट बोला- माता-पिता के साथ रहना अवैध हिरासत नहीं
युवती ने खुद स्वीकार किया कि वो अपने माता-पिता के साथ रहना चाहती है। लिहाजा, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि युवती अपने माता-पिता के साथ रह रही है, जिसे अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिका लगाने के लिए युवती ने उसे अधिकार भी नहीं दिया है। इस आधार पर डिवीजन बेंच ने युवक की याचिका खारिज कर दी है।
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FAQ
- युवक और युवती की दोस्ती कैसे हुई और उन्होंने शादी का फैसला कब किया?
युवक और युवती की दोस्ती ऑनलाइन गेम के जरिए हुई थी। साल 2023 में दोनों की पहचान हुई और धीरे-धीरे वे एक-दूसरे से प्यार करने लगे। बालिग होने के बाद उन्होंने शादी करने का फैसला किया। - युवक ने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका क्यों दायर की?
युवक को शक था कि युवती के माता-पिता ने उसे जबरदस्ती बंधक बना लिया है और उसकी मर्जी के खिलाफ शादी के लिए मजबूर कर रहे हैं। इसलिए उसने हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। - हाईकोर्ट ने युवक की याचिका क्यों खारिज कर दी?
हाईकोर्ट ने पाया कि युवती अपनी मर्जी से अपने माता-पिता के साथ रह रही है और उस पर कोई दबाव नहीं है। कोर्ट ने कहा कि माता-पिता के साथ रहना अवैध हिरासत नहीं माना जा सकता, इसलिए युवक की याचिका खारिज कर दी गई।
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