छत्तीसगढ़ सरकार पर बोझ बनी महतारी वंदन योजना, डेढ़ साल में बाहर हुईं 1 लाख महिलाएं
Arun Tiwari | Jul 09, 2025, 16:06 IST
Mahtari Vandan Yojana became a burden on Chhattisgarh government the sootr
खराब माली हालत के कारण विष्णु सरकार पर महतारी अब भारी पड़ने लगी है। पिछले डेढ़ साल में इस महतारी वंदन योजना से एक लाख महिलाएं बाहर हो गई हैं। इस हिसाब से देखा जाए तो आवेदन आने से लेकर 17वीं किश्त जारी करने तक हर महीने करीब 6 हजार महिलाएं कम हो रही हैं।
रायपुर : बीजेपी ने छत्तीसगढ़ में सरकार बनाने के लिए महतारी वंदन तो कर लिया लेकिन यही वंदन अब उसे बहुत भारी पड़ रहा है। खराब माली हालत के कारण विष्णु सरकार पर महतारी अब भारी पड़ने लगी है। पिछले डेढ़ साल में इस योजना से एक लाख महिलाएं बाहर हो गई हैं।
इस हिसाब से देखा जाए तो आवेदन आने से लेकर 17वीं किश्त जारी करने तक हर महीने करीब 6 हजार महिलाएं कम हो रही हैं। सरकार कहती जरुर है कि इस योजना में छूटी हुई महिलाओं को शामिल किया जाएगा लेकिन जो शामिल हैं उनको ही पैसे देने में सरकार को पसीने छूट रहे हैं। महिलाओं को खुश रखने के लिए इधर उधर से फंड जुटाया जा रहा है।
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छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने वाली महिलाएं अब सरकार को भारी पड़ने लगी हैं। महतारी वंदन के लिए सरकार के पास मुफ्त का चंदन नहीं है। तीन चुनावों में ट्रंफ कार्ड बनी महतारी वंदन योजना को सरकार बंद भी नहीं कर सकती। यह ऐसी फ्रीबीज है जो सरकार के गले में अटक गई है।
बंद करने पर विरोध और जारी रखने पर खराब माली हालत के बीच में यह योजना झूल रही है। इस योजना के तहत करीब करीब 700 करोड़ रुपए महीने का फंड महिलाओं के खाते में पहुंचता है। हर महिला को सरकार एक हजार रुपए महीने दे रही है। यह योजना मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना की तर्ज पर चालू की गई। लाड़ली लक्ष्मी ने मध्यप्रदेश में तो महतारी वंदन ने छत्तीसगढ़ में बीजेपी को बंपर वोटर दिलवाए।
नतीजा ये हुआ कि अब इस योजना को बंद करने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। यही कारण है कि हर महीने महिलाओं के नामों में कटौती जरुर होने लगी है। जब से योजना लांच हुई और फॉर्म जमा हुए तब से लेकर आज तक इस योजना से 1 लाख महिलाओं के नाम बाहर हो चुके हैं। तो सवाल उठता है कि क्या सरकार इस तरह से अपना बोझ कुछ कम करना चाहती है। छूटी हुई महिलाएं तो इसमें शामिल नहीं हो रहीं उल्टे जो शामिल महिलाएं वे भी बाहर होने लगी हैं।
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द सूत्र ने इस योजना की पड़ताल की। जुलाई 2025 तक मिली राशि का पूरा लेखा जोखा निकाला। महतारी वंदन योजना के लिए जब आवेदन मंगाए गए तो 70 लाख 27 हजार 154 महिलाओं के आवेदन पत्र आए। यह मार्च 2024 की बात है। इस महीने यानी जुलाई 2025 किश्त के अनुसार 69 लाख 23 हजार 167 महिलाओं के खाते में 648 करोड़ रुपए डाले गए।
यानी पिछले 17 महीनों में सीधे सीधे 1 लाख से ज्यादा महिलाएं इस योजना से बाहर हो गईं। एक महीने पहले जून में 69 लाख 30 हजार 41 महिलाओं के खाते में पैसे डाले गए। इस तरह एक महीने में ही 7 हजार से ज्यादा महिलाओं का नाम योजना से कट गया। इन डेढ़ साल में औसतन देखा जाए तो छह हजार महिलाएं हर महीने योजना से बाहर की गई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कहते हैं कि इनमें करीब 48 हजार महिलाओं की मौत हो चुकी है। कुछ के बैंक खाते से आधार लिंक न होने या बैंक खाता बंद होने के कारण यह राशि नहीं पहुंची है।
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महतारी वंदन योजना के लिए सरकार दूसरे विभागों के फंड में कटौती कर रही है। पिछले एक साल का आंकड़ा देखें तो सरकार ने महिला एवं बाल कल्याण, अनुसचित जनजाति उपयोजना और अनुसूचित जाति उपयोजना के फंड से 7 हजार करोड़ की राशि काटकर महतारी वंदन में बांट दी है।
इस एक साल में महतारी वंदन योजना में करीब 7840 करोड़ रुपए बांटे गए हैं जिनमें से इन तीनों विभागों के बजट से 7 हजार 200 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। महिला एवं बाल कल्याण मद से 3591 करोड़ रुपए, आदिवासियों की योजनाओं के लिए आए 2729 करोड़ रुपए और अनुसूचित जनजाति के हिस्से के 862 करोड़ रुपए महतारी वंदन योजना में बांटे गए हैं।
यही है फ्रीबीज की योजनाओं का असर जो सीधे तौर पर आम आदमी पर पड़ता है। जनता के टैक्स के पैसे पार्टियां अपनी सरकार बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
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इस हिसाब से देखा जाए तो आवेदन आने से लेकर 17वीं किश्त जारी करने तक हर महीने करीब 6 हजार महिलाएं कम हो रही हैं। सरकार कहती जरुर है कि इस योजना में छूटी हुई महिलाओं को शामिल किया जाएगा लेकिन जो शामिल हैं उनको ही पैसे देने में सरकार को पसीने छूट रहे हैं। महिलाओं को खुश रखने के लिए इधर उधर से फंड जुटाया जा रहा है।
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महतारी पड़ गई भारी
बंद करने पर विरोध और जारी रखने पर खराब माली हालत के बीच में यह योजना झूल रही है। इस योजना के तहत करीब करीब 700 करोड़ रुपए महीने का फंड महिलाओं के खाते में पहुंचता है। हर महिला को सरकार एक हजार रुपए महीने दे रही है। यह योजना मध्यप्रदेश की लाड़ली लक्ष्मी योजना की तर्ज पर चालू की गई। लाड़ली लक्ष्मी ने मध्यप्रदेश में तो महतारी वंदन ने छत्तीसगढ़ में बीजेपी को बंपर वोटर दिलवाए।
नतीजा ये हुआ कि अब इस योजना को बंद करने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता। यही कारण है कि हर महीने महिलाओं के नामों में कटौती जरुर होने लगी है। जब से योजना लांच हुई और फॉर्म जमा हुए तब से लेकर आज तक इस योजना से 1 लाख महिलाओं के नाम बाहर हो चुके हैं। तो सवाल उठता है कि क्या सरकार इस तरह से अपना बोझ कुछ कम करना चाहती है। छूटी हुई महिलाएं तो इसमें शामिल नहीं हो रहीं उल्टे जो शामिल महिलाएं वे भी बाहर होने लगी हैं।
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इस तरह से कम हो रही महिलाएं
यानी पिछले 17 महीनों में सीधे सीधे 1 लाख से ज्यादा महिलाएं इस योजना से बाहर हो गईं। एक महीने पहले जून में 69 लाख 30 हजार 41 महिलाओं के खाते में पैसे डाले गए। इस तरह एक महीने में ही 7 हजार से ज्यादा महिलाओं का नाम योजना से कट गया। इन डेढ़ साल में औसतन देखा जाए तो छह हजार महिलाएं हर महीने योजना से बाहर की गई हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कहते हैं कि इनमें करीब 48 हजार महिलाओं की मौत हो चुकी है। कुछ के बैंक खाते से आधार लिंक न होने या बैंक खाता बंद होने के कारण यह राशि नहीं पहुंची है।
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दूसरे विभागों से बंट रहा फंड
इस एक साल में महतारी वंदन योजना में करीब 7840 करोड़ रुपए बांटे गए हैं जिनमें से इन तीनों विभागों के बजट से 7 हजार 200 करोड़ रुपए निकाले गए हैं। महिला एवं बाल कल्याण मद से 3591 करोड़ रुपए, आदिवासियों की योजनाओं के लिए आए 2729 करोड़ रुपए और अनुसूचित जनजाति के हिस्से के 862 करोड़ रुपए महतारी वंदन योजना में बांटे गए हैं।
यही है फ्रीबीज की योजनाओं का असर जो सीधे तौर पर आम आदमी पर पड़ता है। जनता के टैक्स के पैसे पार्टियां अपनी सरकार बनाने के लिए इस्तेमाल कर रही है।
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