नारायणपुर महिला कॉलेज के प्रिंसिपल समेत 6 प्रोफेसर निलंबित, उच्च शिक्षा विभाग का बड़ा एक्शन
Harrison Masih | Jan 12, 2026, 14:26 IST
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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर स्थित शासकीय आदर्श महिला महाविद्यालय में पीएम उषा योजना की राशि के दुरुपयोग और वित्तीय नियमों के उल्लंघन के मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। प्राचार्य समेत छह प्राध्यापकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।
INSHORT
- उच्च शिक्षा विभाग ने नारायणपुर महिला कॉलेज के 6 प्राध्यापकों को निलंबित किया।
- कार्रवाई पीएम उषा योजना की राशि के दुरुपयोग के आरोपों पर हुई।
- सामग्री खरीदी में गड़बड़ी और वित्तीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई।
- निलंबन छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1966 के तहत किया गया।
- मामले की अलग से विभागीय जांच होगी।
NEWS IN DETAILS
पीएम उषा मद की राशि के दुरुपयोग का आरोप
जारी आदेश के अनुसार, प्रारंभिक जांच में छत्तीसगढ़ वित्तीय नियम संहिता 2002 (संशोधित 2025) के उल्लंघन की पुष्टि प्रथम दृष्टया हुई है। इसी आधार पर शासन ने निलंबन की कार्रवाई की।
नियम 9(1)(क) के तहत कार्रवाई
निलंबन अवधि के दौरान सभी अधिकारियों का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक, उच्च शिक्षा कार्यालय, जगदलपुर (छत्तीसगढ़) निर्धारित किया गया है। इस दौरान उन्हें नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
पृथक विभागीय जांच के आदेश
शासन का कहना है कि यह कदम सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के मामलों में शून्य सहनशीलता नीति का स्पष्ट संकेत है। सरकार ने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है।
IMP FACTS
- प्राचार्य डॉ. योगेंद्र पटेल
- सहायक प्राध्यापक भूषण जय गोयल
- किशोर कुमार कोठारी
- हरीश चंद बैद
- नोहर राम
निलंबन आदेश नियम 9(1)(क) के तहत जारी।
निलंबन आदेश की कॉपी
Sootr Knowledge
- पीएम उषा योजना केंद्र सरकार की योजना है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों को मजबूत करना है।
- सरकारी योजनाओं की राशि का उपयोग तय नियमों और प्रक्रिया के अनुसार करना अनिवार्य होता है।
- निलंबन प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई मानी जाती है।
Sootr ALERTS
- निलंबन अवधि में सभी अधिकारियों का मुख्यालय क्षेत्रीय अपर संचालक कार्यालय, जगदलपुर रहेगा।
- सभी को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा।
- बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है।
आगे क्या
- पूरे मामले की विभागीय जांच अलग से की जाएगी।
- जांच के बाद चार्जशीट, वेतन रोक, पद से हटाना या बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई संभव।
- दोष सिद्ध होने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
निष्कर्ष
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