23 अक्टूबर को जगदलपुर में आयोजित होगा मुरिया दरबार, सीएम साय ने भेजा निमंत्रण, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया स्वीकार
VINAY VERMA | Sept 29, 2026, 18:42 IST
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का बस्तर दौरा
छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति के सबसे बड़े मंच बस्तर दशहरा में इस बार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। वे 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होंगी। इसकी पुष्टि 28 सितंबर को सामने आई जानकारी में हुई है।
छत्तीसगढ़ की आदिवासी संस्कृति के सबसे बड़े मंच बस्तर दशहरा में इस बार देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शामिल होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निमंत्रण को राष्ट्रपति ने स्वीकार कर लिया है। वे 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होंगी। इसकी पुष्टि 28 सितंबर को सामने आई जानकारी में हुई है।
राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के दौरान केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे।
मुरिया दरबार सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह बस्तर की सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक परंपरा का अहम हिस्सा है। यहां पारंपरिक सामाजिक प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद की परंपरा दिखाई देती है।
बस्तर दशहरा मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा करीब 75 दिन चलने वाला अनूठा आयोजन है। इसकी पहचान सिर्फ धार्मिक आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक भागीदारी से भी है।
राष्ट्रपति मुर्मु का बस्तर से यह पहला जुड़ाव नहीं है। 7 फरवरी 2026 को उन्होंने जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। उस दौरान उन्होंने बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण पर जोर दिया था।
इसके बाद 30 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें परगना मांझी, चालकी और समाज प्रमुख शामिल थे। राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम को जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बताया था।
23 अक्टूबर का आयोजन इसलिए भी खास होगा, क्योंकि राष्ट्रपति सीधे उस मंच पर पहुंचेंगी, जहां बस्तर की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था और आधुनिक लोकतंत्र का मेल दिखाई देता है। मांझी, चालकी और समाज प्रमुखों की भूमिका इस परंपरा का अहम हिस्सा रही है।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति की मौजूदगी बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए गौरव का अवसर है। उनके मुताबिक बस्तर की पहचान यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी है।
सरकार अब बस्तर की संस्कृति को पर्यटन से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। राष्ट्रपति की मौजूदगी से बस्तर की लोक परंपराओं और आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा मंच मिलने की उम्मीद है। सरकार का दावा है कि संस्कृति के संरक्षण के साथ पर्यटन बढ़ाने से स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कमाई के नए रास्ते खुल सकते हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा आकर्षण 23 अक्टूबर का मुरिया दरबार है। बस्तर दशहरा के इस प्रमुख आयोजन में राष्ट्रपति की मौजूदगी पूरे देश का ध्यान जगदलपुर और बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं की ओर खींचेगी।
FAQ
राष्ट्रपति को मुख्यमंत्री साय का निमंत्रण पत्र सौंपने के दौरान केंद्रीय मंत्री तोखन साहू, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर सांसद महेश कश्यप और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन मौजूद रहे।
बस्तर की परंपरा, अब देश के सामने
बस्तर दशहरा मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा करीब 75 दिन चलने वाला अनूठा आयोजन है। इसकी पहचान सिर्फ धार्मिक आयोजन के तौर पर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक भागीदारी से भी है।
मुर्मु का बस्तर से पुराना जुड़ाव
इसके बाद 30 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति ने बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इसमें परगना मांझी, चालकी और समाज प्रमुख शामिल थे। राष्ट्रपति ने बस्तर पंडुम को जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव बताया था।
मुरिया दरबार पर सबकी नजर
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि राष्ट्रपति की मौजूदगी बस्तर की जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के लिए गौरव का अवसर है। उनके मुताबिक बस्तर की पहचान यहां के जनजीवन, लोक आस्था, कला, परंपरा और प्रकृति से जुड़ी है।
पर्यटन और रोजगार पर भी जोर
फिलहाल सबसे बड़ा आकर्षण 23 अक्टूबर का मुरिया दरबार है। बस्तर दशहरा के इस प्रमुख आयोजन में राष्ट्रपति की मौजूदगी पूरे देश का ध्यान जगदलपुर और बस्तर की सदियों पुरानी परंपराओं की ओर खींचेगी।
FAQ
- बस्तर दशहरा में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु कब शामिल होंगी?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 23 अक्टूबर 2026 को बस्तर दशहरा में शामिल होंगी। - मुरिया दरबार का आयोजन क्यों महत्वपूर्ण है?
मुरिया दरबार बस्तर की सामाजिक व्यवस्था और सामुदायिक परंपरा का अहम हिस्सा है, जिसमें पारंपरिक सामाजिक प्रमुखों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय के बीच संवाद होता है। - राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की संस्कृति को किस प्रकार का लाभ होगा?
राष्ट्रपति की उपस्थिति से बस्तर की लोक परंपराओं और आदिवासी विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी, जो पर्यटन और रोजगार के अवसर बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।
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